📍नई दिल्ली | 7 Feb, 2026, 4:01 PM
India Thailand Air Exercise: भारतीय वायु सेना और रॉयल थाई एयर फोर्स के बीच फरवरी में एक महत्वपूर्ण जॉइंट एयर एक्सरसाइज हो जा रही है, जो उत्तर मलक्का स्ट्रेट के पास, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के नजदीक की जाएगी।
यह अभ्यास 9 फरवरी को होना तय है और इसे भारत-थाईलैंड रक्षा संबंधों में एक नया और अहम कदम माना जा रहा है। अब तक दोनों देशों के बीच नौसेना स्तर पर सहयोग ज्यादा रहा है, लेकिन यह पहली बार है जब दोनों वायु सेनाएं इतने रणनीतिक इलाके में एक साथ अभ्यास करने जा रही हैं। (India Thailand Air Exercise)
India Thailand Air Exercise: कहां और कैसे होगा यह अभ्यास?
यह संयुक्त एयर एक्सरसाइज अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के ऊपर और उसके आसपास के क्षेत्र में की जाएगी, जो सीधे तौर पर मलक्का जलडमरूमध्य के पास स्थित है। यह इलाका बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के संगम पर पड़ता है और इसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सबसे संवेदनशील जगहों में से एक माना जाता है।
भारतीय वायु सेना इस अभ्यास में अपने 4 से 6 सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों को उतारेगी, जो अंडमान के किसी एयरबेस से उड़ान भरेंगे। वहीं थाईलैंड की वायु सेना अपने ग्रिपेन फाइटर जेट्स के साथ इस अभ्यास में हिस्सा लेगी, जो थाई एयरबेस से ऑपरेट करेंगे। (India Thailand Air Exercise)
मिड-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर एयरक्राफ्ट भी तैनात
यह अभ्यास केवल फाइटर बनाम फाइटर ट्रेनिंग तक सीमित नहीं होगा। भारतीय वायु सेना इसमें मिड-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर एयरक्राफ्ट भी तैनात करेगी, जिससे लंबी दूरी तक ऑपरेशन की क्षमता को परखा जा सके।
इसके अलावा एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम यानी एडब्ल्यूएसीएस भी इस अभ्यास का हिस्सा होंगे। इनका काम आसमान से निगरानी करना, एयर ट्रैफिक को कंट्रोल करना और लड़ाकू विमानों को रियल-टाइम जानकारी देना होता है।
साथ ही, भारतीय नौसेना भी आसपास के समुद्री क्षेत्र में अपने युद्धपोत तैनात करेगी, ताकि अगर किसी तरह की आपात स्थिति पैदा हो, तो सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन तुरंत किए जा सकें। (India Thailand Air Exercise)
अभ्यास का क्या है मकसद?
इस जॉइंट एयर एक्सरसाइज का सबसे बड़ा उद्देश्य दोनों वायु सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी यानी आपसी तालमेल को मजबूत करना है। अलग-अलग देशों के एयरक्राफ्ट, अलग सिस्टम और अलग रणनीतियों के साथ काम करते हैं। ऐसे में यह अभ्यास यह समझने का मौका देगा कि संकट की स्थिति में दोनों सेनाएं कितनी तेजी से और कितनी सटीकता से साथ काम कर सकती हैं।
इसके अलावा, इसमें बेस्ट प्रैक्टिसेज शेयर की जाएंगी, यानी दोनों देश एक-दूसरे के ऑपरेशन तरीकों, टेक्निक और अनुभवों से सीखेंगे। लंबी दूरी की उड़ान, लॉजिस्टिक्स सपोर्ट, मिड-एयर रिफ्यूलिंग और रिमोट इलाकों में ऑपरेशन जैसी क्षमताओं को भी परखा जाएगा। (India Thailand Air Exercise)
मलक्का स्ट्रेट के पास अभ्यास क्यों खास है?
मलक्का जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। एशिया, यूरोप और मिडिल ईस्ट के बीच होने वाला करीब 80 फीसदी समुद्री व्यापार और तेल सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की लोकेशन भारत को इस पूरे इलाके पर नजर रखने की रणनीतिक क्षमता देती है। यहां होने वाला यह एयर अभ्यास साफ संकेत देता है कि भारत और उसके साझेदार देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं।
यह अभ्यास यह भी दिखाता है कि भारत न सिर्फ अपने लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता और समुद्री सुरक्षा के लिए जिम्मेदारी लेने को तैयार है। (India Thailand Air Exercise)
नौसेना से आगे बढ़े डिफेंस रिलेशंस
भारत और थाईलैंड के बीच डिफेंस रिलेशंस पहले नौसेना तक सीमित माने जाते थे। दोनों देश मिलकर समुद्री गश्त, कोरपैट और अन्य नौसैनिक अभ्यास करते रहे हैं। लेकिन अब वायु सेना स्तर पर यह सीधा सहयोग इस रिश्ते को एक नई ऊंचाई पर ले जाता है।
यह अभ्यास भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और आसियान देशों के साथ बढ़ते रक्षा संबंधों का भी हिस्सा है। थाईलैंड जैसे देश के साथ हवाई अभ्यास यह संदेश देता है कि भारत दक्षिण-पूर्व एशिया में एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार बनकर उभर रहा है। (India Thailand Air Exercise)
आने वाले महीनों में और बड़े अभ्यास
सूत्रों के मुताबिक, यह अभ्यास सिर्फ शुरुआत है। फरवरी और मार्च 2026 में भारतीय वायु सेना फ्रांस, अमेरिका और ग्रीस जैसे देशों के साथ भी बड़े संयुक्त अभ्यास करने जा रही है। इससे यह साफ होता है कि भारतीय वायु सेना अपनी ग्लोबल रीच और ऑपरेशनल क्षमता को लगातार मजबूत कर रही है। (India Thailand Air Exercise)


