HomeIndian Air Forceवायु सेना में शामिल हुए गरुड़ कमांडोज, 72 हफ्तों की ट्रेनिंग के...

वायु सेना में शामिल हुए गरुड़ कमांडोज, 72 हफ्तों की ट्रेनिंग के बाद मैरून बेरेट्स बने स्पेशल फोर्स ऑपरेटर्स

गरुड़ स्पेशल फोर्स भारतीय वायु सेना की एलीट यूनिट है, जिसकी स्थापना वर्ष 2004 में की गई थी। यह यूनिट वायु सेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई है...

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US

📍नई दिल्ली | 18 Jan, 2026, 7:17 PM

IAF Garud Special Forces: भारतीय वायु सेना ने 17 जनवरी को अपनी सबसे एलीट यूनिट गरुड़ स्पेशल फोर्सेस के एक नए बैच को आधिकारिक तौर पर सर्विस में शामिल किया। इस मौके पर मैरून बेरेट सेरेमोनियल परेड का आयोजन उत्तर प्रदेश स्थित एयर फोर्स स्टेशन चांदीनगर में मौजूद गरुड़ रेजिमेंटल ट्रेनिंग सेंटर (जीआरटीसी) में किया गया। सर्विस में शामिल में जवान बेहद कठिन और लंबी ट्रेनिंग पूरी करके गरुड़ कमांडो बने हैं।

इस सेरेमनी की समीक्षा असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ ऑपरेशंस (एयर डिफेंस) ने मुख्य अतिथि के रूप में की। उन्होंने नए गरुड़ कमांडोज को बधाई दी और कहा कि तेजी से बदलते सुरक्षा हालात में स्पेशल फोर्सेस की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा अहम हो गई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कठिन प्रशिक्षण ही किसी भी कमांडो को असली ऑपरेशनल हालात के लिए तैयार करता है। (IAF Garud Special Forces)

IAF Garud Special Forces: मैरून बेरेट पहनना आसान नहीं

परेड के दौरान सफल ट्रेनीज को मैरून बेरेट, गरुड़ प्रोफिशिएंसी बैज और स्पेशल फोर्सेस टैब्स प्रदान किए गए। यह सम्मान हर किसी को नहीं मिलता। मैरून बेरेट सैन्य दुनिया में एलीट एयरबोर्न और स्पेशल फोर्स ऑपरेटर्स की पहचान मानी जाती है। इसे पाने के लिए जवानों को न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी खुद को साबित करना पड़ता है।

इस अवसर पर उन जवानों को ट्रॉफियां भी दी गईं, जिन्होंने ट्रेनिंग के दौरान असाधारण प्रदर्शन किया। वायु सेना ने इसे गरुड़ों के लिए गर्व और उपलब्धि का क्षण बताया और कहा कि यह बेहद कठिन ट्रेनिंग के समापन का प्रतीक है, जो इन जवानों को “यंग स्पेशल फोर्सेस ऑपरेटर्स” में बदल देता है। (IAF Garud Special Forces)

यह भी पढ़ें:  Parliamentary Defence Panel: संसदीय रक्षा समिति ने किया बेंगलुरु में HAL फैसिलिटी का दौरा, तेजस Mk-1A और AMCA प्रोजेक्ट के बारे में ली जानकारी

लाइव डेमो में दिखी गरुड़ों की ऑपरेशनल क्षमता

परेड के दौरान गरुड़ कमांडोज ने अपनी क्षमताओं का लाइव प्रदर्शन भी किया। इसमें कॉम्बैट फायरिंग, होस्टेज रेस्क्यू, फायरिंग ड्रिल, असॉल्ट एक्सप्लोसिव्स, ऑब्स्टैकल क्रॉसिंग, वॉल क्लाइंबिंग, स्लिथरिंग, रैपेलिंग और मिलिट्री मार्शल आर्ट्स जैसे स्किल्स शामिल थे। इन डेमो से साफ दिखा कि गरुड़ कमांडोज किसी भी मुश्किल हालात में मिशन को अंजाम देने के लिए पूरी तरह तैयार रहते हैं। (IAF Garud Special Forces)

गरुड़ फोर्स क्या है और क्यों खास है

गरुड़ स्पेशल फोर्स भारतीय वायु सेना की एलीट यूनिट है, जिसकी स्थापना वर्ष 2004 में की गई थी। यह यूनिट वायु सेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। गरुड़ कमांडोज का मुख्य काम एयर फोर्स के अहम ठिकानों, रडार सिस्टम, मिसाइल यूनिट्स और एयरबेस की सुरक्षा करना है।

इसके अलावा गरुड़ कमांडोज की बड़ी जिम्मेदारी कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू (सीएसएआर) होती है। यानी दुश्मन क्षेत्र में गिरे वायु सेना के पायलटों को सुरक्षित वापस लाना। यह काम बेहद जोखिम भरा होता है और इसके लिए उच्च स्तर की ट्रेनिंग जरूरी होती है।

गरुड़ कमांडोज दुश्मन इलाके में अस्थायी एयरबेस तैयार करने, एयर ट्रैफिक कंट्रोल संभालने, काउंटर टेररिज्म, एंटी हाइजैकिंग, स्पेशल रेकॉनिसेंस और डायरेक्ट एक्शन जैसे मिशनों में भी माहिर होते हैं। जरूरत पड़ने पर ये दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को निष्क्रिय करने और एयरस्ट्राइक के लिए टारगेट को लेजर से गाइड करने का काम भी करते हैं। (IAF Garud Special Forces)

ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका

हाल ही में मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान गरुड़ कमांडोज की भूमिका को बेहद अहम रही थी। इस ऑपरेशन के दौरान गरुड़ कमांडोज ने कई हाई रिस्क मिशनों में हिस्सा लिया, जिनमें ड्रोन न्यूट्रलाइजेशन और स्पेशल सपोर्ट ऑपरेशंस शामिल थे।

यह भी पढ़ें:  सुखोई-57 स्टील्थ फाइटर पर अभी नहीं हुआ कोई फैसला, HAL को है रूसी रिपोर्ट का इंतजार

वायु सेना के मुताबिक, नए शामिल हुए गरुड़ ऑपरेटर्स इस तरह के मिशनों में वायु सेना की क्षमता को और मजबूत करेंगे और आने वाले समय में नई तरह की स्पेशल जिम्मेदारियां संभालने के लिए तैयार रहेंगे। (IAF Garud Special Forces)

गरुड़ बनने की ट्रेनिंग हैं सबसे कठिन

गरुड़ कमांडो बनने की ट्रेनिंग भारतीय स्पेशल फोर्सेस में सबसे कठिन और लंबी मानी जाती है। इसकी अवधि लगभग 72 सप्ताह, यानी लगभग डेढ़ साल होती है। शुरुआत बेसिक एयरमैन ट्रेनिंग से होती है, इसके बाद तीन महीने का प्रोबेशन पीरियड होता है, जहां ड्रॉपआउट रेट काफी ज्यादा रहता है।

ट्रेनिंग के दौरान जवानों को पैरा जंप, जंगल सर्वाइवल, हाई एल्टीट्यूड ऑपरेशन, बर्फीले इलाकों में सर्वाइवल, एडवांस वेपन हैंडलिंग और क्लोज क्वार्टर बैटल की ट्रेनिंग दी जाती है। कई बार इन्हें आर्मी की यूनिट्स, नेशनल सिक्योरिटी गार्ड और अन्य स्पेशल फोर्सेस के साथ अटैच किया जाता है, ताकि रियल ऑपरेशनल अनुभव मिल सके। (IAF Garud Special Forces)

अन्य स्पेशल फोर्सेस से अलग भूमिका

भारतीय सेना की पैरा स्पेशल फोर्सेस, नौसेना की मार्कोस और वायु सेना की गरुड़ फोर्स तीनों की भूमिका अलग-अलग है। जहां पैरा एसएफ जमीन पर डीप स्ट्राइक और स्ट्रैटेजिक मिशन करती है, वहीं मार्कोस समुद्री और अंडरवॉटर ऑपरेशंस में माहिर होती है। गरुड़ कमांडोज का फोकस एयरबेस सुरक्षा, एयर सपोर्टेड स्पेशल ऑपरेशंस और वायु सेना से जुड़े हाई वैल्यू टारगेट्स पर होता है। (IAF Garud Special Forces)

वायु सेना की ताकत में नया इजाफा

वायु सेना का कहना है कि गरुड़ स्पेशल फोर्सेस के इस नए बैच के शामिल होने से उसकी स्पेशल ऑपरेशंस क्षमता और मजबूत हुई है। मौजूदा सुरक्षा हालात, बॉर्डर टेंशन और बदलते युद्ध के तरीकों को देखते हुए गरुड़ कमांडोज आने वाले समय में वायु सेना की सबसे अहम ताकत बने रहेंगे। (IAF Garud Special Forces)

यह भी पढ़ें:  Exercise GARUD SHAKTI 24: भारतीय सेना के विशेष बलों का दल इंडोनेशिया के लिए रवाना, ‘गरुड़ शक्ति’ संयुक्त अभ्यास में लेगा हिस्सा

Author

  • News Desk

    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
News Desk
News Desk
रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

Most Popular