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105 मिनट में कूटनीति का बड़ा खेल; यूएई राष्ट्रपति की ‘शॉर्ट विजिट’ में छुपा है बड़ा रणनीतिक संकेत

खुद राष्ट्रपति का आना और प्रधानमंत्री से आमने-सामने मिलना यह बताता है कि मामला कुछ ज्यादा ही अहम था। इसीलिए इस स्टॉपओवर को सामान्य शिष्टाचार मुलाकात मानना ठीक नहीं होगा...

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📍नई दिल्ली | 19 Jan, 2026, 10:21 PM

UAE President India visit: संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की हालिया भारत यात्रा देखने में भले ही बहुत छोटी थी, लेकिन इसके संकेत काफी बड़े हैं। राष्ट्रपति का विमान शाम करीब 4 बजकर 20 मिनट पर नई दिल्ली में उतरा। ठीक 25 मिनट बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात हुई और फिर करीब 6 बजकर 5 मिनट पर वे वापस रवाना हो गए। यानी जमीन पर कुल मिलाकर सिर्फ 105 मिनट। आम तौर पर इतने कम समय की यात्रा को औपचारिक दौरा नहीं कहा जाता, लेकिन कूटनीति की दुनिया में ऐसी संक्षिप्त यात्राएं कई बार लंबे शिखर सम्मेलनों से ज्यादा संदेश देती हैं।

UAE President India visit: लैंडिंग से टेकऑफ तक कुल समय सिर्फ 105 मिनट

राष्ट्राध्यक्ष यूं ही किसी देश में उतरते नहीं हैं। इसके लिए सुरक्षा, प्रोटोकॉल और राजनीतिक तैयारी की जरूरत होती है। अगर बात सिर्फ व्यापार, निवेश या सामान्य द्विपक्षीय मुद्दों की होती, तो यह काम मंत्रियों या वरिष्ठ अधिकारियों के जरिए भी हो सकता था। लेकिन खुद राष्ट्रपति का आना और प्रधानमंत्री से आमने-सामने मिलना यह बताता है कि मामला कुछ ज्यादा ही अहम था। इसीलिए इस स्टॉपओवर को सामान्य शिष्टाचार मुलाकात मानना ठीक नहीं होगा।

सरकारी बयान में हमेशा की तरह भारत-यूएई आर्थिक साझेदारी, नॉन-ऑयल ट्रेड को 100 बिलियन डॉलर तक ले जाने, ऊर्जा और टेक्नोलॉजी सहयोग जैसे विषयों का जिक्र किया गया। ये सभी मुद्दे महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि ऐसे विषयों पर बातचीत महीनों चलती है। इन्हें आगे बढ़ाने के लिए 105 मिनट की राष्ट्रपति यात्रा की जरूरत नहीं होती। यहीं से साफ होता है कि बातचीत का असली फोकस कुछ और रहा होगा। (UAE President India visit)

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अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र को बनाया अस्थिर

इस पूरी यात्रा को पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात से जोड़कर देखना जरूरी है। गाजा संकट, ईरान से जुड़े तनाव, लाल सागर और अरब सागर में शिपिंग रूट्स पर बढ़ते खतरे और अमेरिका की बदलती वैश्विक प्राथमिकताओं ने खाड़ी क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है। लंबे समय तक खाड़ी की सुरक्षा अमेरिकी छतरी के नीचे रही, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। ऐसे में यूएई जैसे देश अपनी रणनीति को नए सिरे से संतुलित कर रहे हैं। (UAE President India visit)

UAE President India visit

यूएई और सऊदी अरब के बीच रिश्ते बिगड़े

इसके अलावा खाड़ी के भीतर भी समीकरण पहले जैसे नहीं रहे। यूएई और सऊदी अरब के बीच रिश्ते अब पूरी तरह समान दिशा में नहीं चलते। आर्थिक नेतृत्व, क्षेत्रीय प्रभाव और रणनीतिक स्वतंत्रता को लेकर दोनों के रास्ते अलग-अलग दिखने लगे हैं। ऐसे माहौल में यूएई उन देशों से रिश्ते मजबूत करना चाहता है जो भरोसेमंद हों, तेजी से फैसले ले सकें और जिनके साथ किसी तरह की वैचारिक या राजनीतिक शर्तें न जुड़ी हों। (UAE President India visit)

भारत बना रणनीतिक साझेदार

यहीं पर भारत यूएई के लिए सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि एक रणनीतिक साझेदार बनकर उभरता है। भारत की इंडियन ओशन में मजबूत मौजूदगी है, उसकी अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और उसकी विदेश नीति संतुलित और व्यावहारिक मानी जाती है। भारत किसी देश पर विचारधारा थोपने या शासन बदलने की बात नहीं करता। यही वजह है कि अस्थिर हालात में भारत यूएई के लिए एक सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प नजर आता है।

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जानकारों का मानना है कि इस छोटी लेकिन अहम मुलाकात का असली एजेंडा सुरक्षा और रणनीतिक समन्वय से जुड़ा था। पिछले कुछ वर्षों में भारत और यूएई के बीच काउंटर-टेररिज्म, खुफिया जानकारी साझा करने और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग काफी बढ़ा है। इन मुद्दों पर ज्यादातर बातचीत सार्वजनिक नहीं होती, क्योंकि सुरक्षा सहयोग आम तौर पर शांत कूटनीति के तहत चलता है।

ऐसे संवेदनशील मामलों पर चर्चा के लिए लंबी बैठकों या बड़ी घोषणाओं की जरूरत नहीं होती। कई बार सीधी, आमने-सामने बातचीत ही सबसे असरदार होती है। यही कारण है कि राष्ट्रपति का खुद दिल्ली आना और कम समय में लौट जाना एक मजबूत संकेत देता है कि दोनों देशों के बीच संवाद का स्तर काफी ऊंचा है। (UAE President India visit)

खाड़ी के दूसरे देशों के लिए संकेत है यह यात्रा

यह यात्रा सिर्फ भारत के लिए संदेश नहीं थी। इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ता है। खाड़ी के दूसरे देशों, वैश्विक ताकतों और उन सभी पक्षों के लिए यह संकेत था कि भारत और यूएई के रिश्ते सक्रिय हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत उच्च स्तर पर संपर्क किया जा सकता है। आज की कूटनीति में हर चीज संधियों और समझौतों से तय नहीं होती। कई बार एक छोटी सी यात्रा भी बहुत बड़ा संदेश दे देती है।

इस मुलाकात से किसी बड़े समझौते या नई घोषणा की उम्मीद करना सही नहीं होगा। यह यात्रा घोषणाओं के लिए नहीं थी। इसका मकसद था तेजी से बदलते हालात में आपसी समझ बनाए रखना और रणनीतिक तालमेल को मजबूत करना। कूटनीति में कई बार रिश्ते बनाने से ज्यादा जरूरी होता है, बने हुए रिश्तों का सही समय पर इस्तेमाल करना।

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यूएई राष्ट्रपति की यह 105 मिनट की स्टॉपओवर यात्रा यही बताती है कि भारत-यूएई संबंध अब उस स्तर पर पहुंच चुके हैं, जहां संकट या अनिश्चितता के समय सीधा और त्वरित संवाद सबसे अहम हथियार बन जाता है। शायद इसी वजह से यह छोटी-सी यात्रा कई लंबे शिखर सम्मेलनों से ज्यादा मायने रखती है। (UAE President India visit)

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  • 105 मिनट में कूटनीति का बड़ा खेल; यूएई राष्ट्रपति की ‘शॉर्ट विजिट’ में छुपा है बड़ा रणनीतिक संकेत

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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