📍नई दिल्ली | 6 Feb, 2026, 1:29 PM
Su-57 CAATSA sanctions India: भारत और अमेरिका के रिश्तों में फरवरी की शुरुआत काफी सकारात्मक मानी जा रही थी। ट्रेड डील के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामानों पर टैरिफ 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिए। भारत ने भी रूस से तेल खरीद कम करने का संकेत दिए। लेकिन इसी बीच एक नया खतरा सामने आ गया है, जो सीधे भारत की डिफेंस पॉलिसी और फाइटर जेट प्लानिंग पर असर डाल सकता है।
यह खतरा है काटसा (CAATSA) प्रतिबंधों का, जो अमेरिका अब रूस से सु-57 स्टेल्थ फाइटर जेट खरीदने वाले देशों पर लगाने की चेतावनी दे रहा है। ताजा मामला अल्जीरिया का है, लेकिन इसकी आंच भारत तक भी पहुंच सकती है। (Su-57 CAATSA sanctions India)
Su-57 CAATSA sanctions India: अल्जीरिया को क्यों दी अमेरिका ने चेतावनी
अमेरिका के विदेश मंत्रालय के अधिकारी रॉबर्ट पैलाडिनो ने अमेरिकी सीनेट की फॉरेन रिलेशंस कमेटी में साफ कहा है कि अल्जीरिया का रूस से हथियार खरीदना “बेहद चिंताजनक” है। उन्होंने इशारों में कहा कि अगर अल्जीरिया ने सु-57 स्टेल्थ फाइटर जेट का सौदा आगे बढ़ाया, तो उस पर काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट यानी CAATSA के तहत प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
दरअसल, अल्जीरिया पिछले साल रूस से सु-57 खरीदने वाला दुनिया का पहला एक्सपोर्ट कस्टमर बना था। लीक दस्तावेजों के मुताबिक, अल्जीरिया ने रूस से करीब 12 सु-57 फाइटर जेट खरीदे हैं, जिनकी डिलीवरी 2024 से 2026 के बीच होनी है। नवंबर 2025 में यह भी खबर आई थी कि अल्जीरिया को पहले दो सु-57 मिल चुके हैं और वे ऑपरेशनल ड्यूटी पर भी लगाए जा रहे हैं। (Su-57 CAATSA sanctions India)
CAATSA क्या है और यह क्यों अहम है
CAATSA अमेरिका का वह कानून है, जिसके तहत रूस, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों से बड़े रक्षा सौदे करने वालों पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इसका मकसद अमेरिका के विरोधी देशों की सैन्य और आर्थिक ताकत को कमजोर करना है। इस कानून के तहत अमेरिका न केवल सीधे प्रतिबंध लगा सकता है, बल्कि सेकेंडरी सैंक्शंस के जरिए उन देशों और कंपनियों पर भी कार्रवाई कर सकता है, जो प्रतिबंधित रूसी संस्थाओं से लेन-देन करते हैं।
इन प्रतिबंधों का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि अमेरिका उस देश को डिफेंस टेक्नोलॉजी, हथियार, इंजन और स्पेयर सप्लाई रोक सकता है। (Su-57 CAATSA sanctions India)
भारत कर रहा सु-57 खरीदने की तैयारी
हालांकि भारत अभी तक सु-57 का ग्राहक नहीं है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत इस फाइटर जेट को लेकर गंभीरता से विचार कर रहा है। भारतीय वायुसेना के सामने एक बड़ी चुनौती है पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर की कमी।
भारत का स्वदेशी स्टेल्थ फाइटर प्रोजेक्ट AMCA अभी डिजाइन और डेवलपमेंट फेज में है। इसके ऑपरेशनल होने में कम से कम 10 साल का समय लग सकता है। इसी गैप को भरने के लिए रूस ने भारत को सु-57 के को-प्रोडक्शन का ऑफर दिया है।
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल इस ऑफर का मूल्यांकन कर रही है। भारत दो से तीन स्क्वाड्रन (करीब 36 से 54 विमान) खरीदने की योजना बना रहा है, ताकि AMCA आने तक वायुसेना की स्टेल्थ जरूरत पूरी की जा सके। (Su-57 CAATSA sanctions India)
तुर्की का उदाहरण: सबसे बड़ा सबक
CAATSA का सबसे बड़ा उदाहरण तुर्की है। तुर्की ने रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा था। इसके बाद अमेरिका ने उस पर प्रतिबंध लगाए और उसे एफ-35 स्टेल्थ फाइटर प्रोग्राम से बाहर कर दिया।
यह तब हुआ जब तुर्की न सिर्फ अमेरिका का करीबी सहयोगी था, बल्कि नाटो का सदस्य भी था। तुर्की ने एफ-35 प्रोग्राम में करीब 1.4 बिलियन डॉलर का निवेश किया था, लेकिन फिर भी उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
हालांकि एस-400 सौदे पर 2018 और 2022 में अमेरिका ने भारत पर CAATSA लगाने की धमकी दी थी, लेकिन उस दौरान बाइडन प्रशासन ने वेवर दे दिया था। वहीं, 2025 में सु-57 खरीदने की चर्चाओं के दौरान भी काटसा थोपने की चेतावनी दी गई, लेकिन अभी कोई सैक्शंस नहीं लगाए गए। लेकिन अब ज्योपॉलिटिकल हालात बदल चुके हैं। अमेरिका ने जिस तरह से रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत पर दबाव बनाया और ऊंचा टैरिफ लगा कर ट्रेड डील को रोके रखा। वहीं रूसी तेल खरीद कम करने के बाद ट्रेड डील को अंजाम देने के बाद माना जा रहा है कि अगर भारत सु-57 खरीदने की कोशिश करता है, तो यह भारी पड़ सकता है। (Su-57 CAATSA sanctions India)
रूस की कंपनियां पहले से प्रतिबंधित
रूस की सरकारी रक्षा कंपनी रोस्टेक पहले से ही अमेरिका की प्रतिबंधित सूची में है। इसी कंपनी के तहत यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन आती है, जो सु-57 बनाती है। अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने 2022 में रोस्टेक और उससे जुड़ी कई संस्थाओं पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। ऐसे में जो भी देश या कंपनी रोस्टेक से बड़ा सौदा करती है, उस पर सेकेंडरी सैंक्शंस का खतरा रहता है। (Su-57 CAATSA sanctions India)
अगर भारत पर काटसा लगा तो क्या होगा?
अगर भारत पर काटसा के तहत सख्त कार्रवाई होती है, तो इसका असर सिर्फ रूस से जुड़े सौदों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका सीधा असर भारत-अमेरिका डिफेंस सहयोग पर पड़ सकता है। भारत ने अमेरिका से भी कई अहम रक्षा सौदे किए हैं। इनमें 31 एमक्यू-9बी ड्रोन, एएच-64ई अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर, स्ट्राइकर इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल और जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल शामिल हैं।
सबसे अहम बात यह है कि भारत का स्वदेशी फाइटर जेट तेजस अमेरिकी कंपनी जीई 404 इंजन पर निर्भर है। आने वाले सालों में एचएएल को वायुसेना को 180 तेजस एमके-1ए विमान देने हैं और तेजस एमके-2 के लिए जीई 414 इंजन की डील भी करनी है। अगर काटसा के चलते अमेरिका इंजन सप्लाई या टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर रोक लगाता है, तो पूरा प्रोग्राम खतरे में पड़ सकता है। (Su-57 CAATSA sanctions India)
भारत को पहले मिल चुकी है छूट
हालांकि भारत का मामला अब तक अलग रहा है। भारत ने 2018 में रूस से पांच एस-400 रेजिमेंट खरीदीं, लेकिन उस पर काटसा लागू नहीं किया गया। 2022 में अमेरिकी संसद ने भारत को इस मामले में छूट देने की सिफारिश भी की थी। इसी तरह ईरान के चाबहार पोर्ट के लिए भी भारत को सीमित समय की छूट मिली।
यह दिखाता है कि अमेरिका भारत को रणनीतिक नजर से देखता है और कई बार विशेष रियायत देता रहा है। यहां तक कि डोनाल्ड ट्रंप ने एक समय भारत को एफ-35 देने का प्रस्ताव भी दिया था, जबकि भारत के पास एस-400 सिस्टम मौजूद है। (Su-57 CAATSA sanctions India)
फिर भी क्यों बढ़ी चिंता
इसके बावजूद चिंता इसलिए बढ़ी है क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी दिखाया है कि वह सख्त फैसले लेने से पीछे नहीं हटते। रूसी तेल खरीद के मुद्दे पर उन्होंने भारत पर भारी टैरिफ लगाए थे। ऐसे में अगर भारत सु-57 सौदे की ओर बढ़ता है, तो उसे हर पहलू को बहुत सावधानी से देखना होगा।
वहीं, भारत आज एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है। एक तरफ वायुसेना को तुरंत स्टेल्थ फाइटर की जरूरत है, दूसरी तरफ अमेरिकी डिफेंस सप्लाई और तेजस प्रोग्राम की मजबूरी भी है। सु-57 डील भारत को शॉर्ट टर्म में ताकत दे सकती है, लेकिन लॉन्ग टर्म में यह अमेरिका के साथ बने रणनीतिक संतुलन को बिगाड़ सकती है।
अब देखना यह होगा कि भारत रूस के ऑफर पर कितना आगे बढ़ता है, और क्या अमेरिका इस मामले में भी भारत के लिए अलग रास्ता निकालता है, या फिर काटसा की तलवार इस बार सच में लटकती है। (Su-57 CAATSA sanctions India)


