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Sheikh Hasina: शेख हसीना को वापस भेजें ढाका, बांग्लादेश ने की भारत से मांग

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📍नई दिल्ली | 23 Dec, 2024, 5:16 PM

Sheikh Hasina: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत को एक कूटनीतिक नोट भेजकर निवर्तमान प्रधानमंत्री शेख हसीना को ढाका वापस भेजने का अनुरोध किया है। 77 वर्षीय अवामी लीग नेता शेख हसीना 5 अगस्त से भारत में रह रही हैं, जब उन्हें अपने 16 साल लंबे शासन के दौरान बड़े विरोध प्रदर्शनों के बीच देश छोड़ना पड़ा था।

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Sheikh Hasina: अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण का वारंट

ढाका स्थित इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने शेख हसीना, उनके मंत्रियों, सलाहकारों और पूर्व सैन्य व सिविल अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। इन सभी पर “मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार” के आरोप लगाए गए हैं।

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने बताया, “हमने भारत सरकार को एक कूटनीतिक संदेश भेजा है, जिसमें कहा गया है कि बांग्लादेश उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के लिए वापस लाना चाहता है।”

Sheikh Hasina: भारत से प्रत्यर्पण का अनुरोध

बांग्लादेश के गृह सलाहकार जहांगिर आलम ने कहा कि उनके कार्यालय ने भारतीय विदेश मंत्रालय को शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर पत्र भेजा है। उन्होंने मीडिया को बताया, “हमने विदेश मंत्रालय को उनके प्रत्यर्पण के लिए पत्र भेजा है। यह प्रक्रिया अभी चल रही है।”

उन्होंने यह भी बताया कि ढाका और नई दिल्ली के बीच एक प्रत्यर्पण संधि है, जिसके तहत शेख हसीना को वापस लाया जा सकता है।

भारत और बांग्लादेश के कूटनीतिक संबंधों पर असर

शेख हसीना की वापसी का अनुरोध ऐसे समय में आया है जब भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने हाल ही में बांग्लादेश का दौरा किया है। उन्होंने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद युनुस से मुलाकात की। ढाका में संवाददाताओं से बात करते हुए, मिसरी ने कहा कि उन्होंने अपने समकक्षों के साथ ईमानदारी और रचनात्मकता से चर्चा की और “अत्यंत महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों” पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

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मोहम्मद युनुस के कार्यालय ने कहा कि इस मुलाकात के दौरान शेख हसीना के भारत में ठहराव पर भी चर्चा हुई। मुख्य सलाहकार ने कहा था, “हमारे लोग चिंतित हैं क्योंकि वह वहां से कई बयान दे रही हैं। इससे तनाव पैदा होता है।”

शेख हसीना का आरोप

विदेश सचिव की यात्रा से पहले, शेख हसीना ने अंतरिम सरकार पर हमला बोला और मोहम्मद युनुस पर “तानाशाही शासन” चलाने का आरोप लगाया। लंदन में अवामी लीग समर्थकों को दिए वर्चुअल संबोधन में, उन्होंने कहा कि राजनीतिक उथल-पुथल के पीछे युनुस का हाथ है, जिसने उनके शासन को समाप्त कर दिया।

शेख हसीना ने कहा, “5 अगस्त से अल्पसंख्यकों, हिंदुओं, ईसाइयों और बौद्धों के पूजा स्थलों पर हमले बढ़ गए हैं। हम इसकी निंदा करते हैं। जमात और आतंकवादी नई सरकार के तहत स्वतंत्र रूप से काम कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “बांग्लादेश अब एक फासीवादी शासन के चंगुल में है, जहां लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार खत्म कर दिए गए हैं। हमारे शासन के दौरान गरीबी उन्मूलन, बुनियादी ढांचे के विकास और लोकतंत्र को मजबूत करने की जो उपलब्धियां थीं, उन्हें युनुस के नेतृत्व में खत्म किया जा रहा है।”

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार द्वारा भारत को भेजे गए इस डिप्लोमैटिक संदेश ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे का समाधान भारत और बांग्लादेश के कूटनीतिक संबंधों की परीक्षा करेगा।

कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे कथित अत्याचार और मानवाधिकार हनन को लेकर चिंता जता चुके हैं। शेख हसीना ने अल्पसंख्यकों पर हो रहे इन हमलों के लिए अंतरिम सरकार को जिम्मेदार ठहराया है और इसे “लोकतंत्र के लिए खतरा” करार दिया है।

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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