📍नई दिल्ली | 4 Feb, 2026, 2:23 PM
PM Modi Israel visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस महीने के आखिर में इजराइल दौरे पर रवाना हो सकते हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, फरवरी के आखिरी सप्ताह में यह यात्रा हो सकती है और इसके आधिकारिक कार्यक्रम की घोषणा जल्द किए जाने की उम्मीद है। अगर यह दौरा होता है, तो यह भारत-इजराइल रिश्तों में एक और अहम अध्याय जोड़ेगा, खासकर ऐसे समय में जब मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बदल रहे हैं।
सरकार के करीबी सूत्रों का कहना है कि भारत इस दौरे के जरिए यह संदेश देना चाहता है कि वह मिडिल ईस्ट में केवल एक दर्शक नहीं, बल्कि एक सक्रिय और जिम्मेदार भागीदार है। भारत टेक्नोलॉजी, सिक्योरिटी कोऑपरेशन और इकनॉमिक स्टेबिलिटी के जरिए क्षेत्रीय हालात को संतुलित करने में अपनी भूमिका निभा रहा है। (PM Modi Israel visit)
PM Modi Israel visit: क्यों अहम है यह यात्रा
भारत और इजराइल के रिश्ते बीते एक दशक में काफी मजबूत हुए हैं। खासतौर पर 2014 के बाद दोनों देशों के बीच डिफेंस, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्रों में सहयोग तेज हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी पहले भी 2017 में इजराइल का ऐतिहासिक दौरा कर चुके हैं, जिसने द्विपक्षीय रिश्तों को नई ऊंचाई दी थी। अब एक बार फिर यह दौरा ऐसे वक्त में प्रस्तावित है, जब क्षेत्र में जियो-पॉलिटिकल अस्थिरता और सिक्योरिटी री-अलाइनमेंट देखने को मिल रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, भारत इजराइल के साथ अपने रिश्तों को इस तरह आगे बढ़ाना चाहता है कि उसका संतुलन खाड़ी देशों के साथ मजबूत साझेदारी से भी बना रहे। यही वजह है कि नई दिल्ली इज़राइल के साथ रिश्तों को “बैलेंस्ड पार्टनरशिप” के तौर पर देखती है, न कि किसी एक धड़े के साथ खड़े होने के रूप में। (PM Modi Israel visit)
किन मुद्दों पर रहेगा फोकस
इस संभावित यात्रा का मुख्य एजेंडा भविष्य को ध्यान में रखकर तय किया गया है। बातचीत का केंद्र विज्ञान और टेक्नोलॉजी, डिफेंस इनोवेशन, क्वांटम टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी और एडवांस्ड एग्रीकल्चर जैसे क्षेत्र हो सकते हैं।
इजराइल की पहचान अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी, स्टार्ट-अप इकोसिस्टम और साइबर सिक्योरिटी में वैश्विक नेतृत्व के तौर पर है, जबकि भारत एक विशाल बाजार और तेजी से बढ़ती डिजिटल इकॉनमी है। दोनों देशों के लिए यह साझेदारी केवल खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि नॉलेज-बेस्ड और लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की दिशा में आगे बढ़ रही है।
सूत्रों का कहना है कि इस दौरान कई एमओयू पर भी हस्ताक्षर हो सकते हैं। इनमें संस्कृति, डिफेंस कोऑपरेशन, साइंस एंड टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी और क्वांटम रिसर्च जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। (PM Modi Israel visit)
ट्रांजैक्शनल डिफेंस से स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक
भारत-इजराइल रिश्तों की शुरुआत मुख्य रूप से डिफेंस खरीद तक सीमित मानी जाती थी। लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह दौरा इस बदलाव को और मजबूत करेगा, जहां फोकस केवल हथियारों की खरीद पर नहीं, बल्कि संयुक्त रिसर्च, को-डेवलपमेंट और इनोवेशन पर होगा।
डिफेंस इनोवेशन, ड्रोन टेक्नोलॉजी, मिसाइल डिफेंस सिस्टम और साइबर वॉरफेयर जैसे क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। भारत चाहता है कि यह सहयोग ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों के साथ जुड़कर आगे बढ़े। (PM Modi Israel visit)
मिडिल ईस्ट के लिए बड़ा संदेश
इस दौरे का असर सिर्फ भारत-इजराइल रिश्तों तक सीमित नहीं रहेगा। यह पूरे मिडिल ईस्ट के लिए एक मजबूत संदेश होगा कि भारत आत्मविश्वास के साथ इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। भारत खुद को एक स्थिर, टेक्नोलॉजी-ड्रिवन और भरोसेमंद पार्टनर के तौर पर पेश कर रहा है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि खाड़ी देशों के साथ भारत की लगातार बातचीत और साझेदारी यह दिखाती है कि मिडिल ईस्ट अब भारत को हर अहम डेवलपमेंट में “इन द लूप” रखना चाहता है। इजराइल दौरा इसी व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। (PM Modi Israel visit)
बता दें कि इस साल जनवरी में प्रधानमंत्री मोदी ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात की थी। उस बातचीत में नए साल की शुभकामनाओं के साथ-साथ भारत-इजराइल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा हुई थी। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय हालात पर भी विचार साझा किए थे।
इसके अलावा, नवंबर में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी इजराइल के दौरे पर गए थे। उन्होंने वहां नेतन्याहू और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर आर्थिक, टेक्नोलॉजिकल और स्ट्रैटेजिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर बातचीत की थी। इस दौरान बिजनेस फोरम और सीईओ फोरम में 60 से ज्यादा भारतीय उद्योगपतियों ने हिस्सा लिया था। (PM Modi Israel visit)


