📍नई दिल्ली | 5 Feb, 2026, 11:40 PM
India Malaysia defence cooperation: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी मलेशिया दौरे को दोनों देशों रक्षा सहयोग के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। 7-8 फरवरी को होने वाले इस दौरे के दौरान भारत की नजर मलेशिया को डॉर्नियर एयरक्राफ्ट बेचने, स्कॉर्पीन सबमरीन के मेंटेनेंस और सुखोई-30 फाइटर जेट्स के अपग्रेडेशन जैसे अहम रक्षा सौदों पर टिकी हुई है।
दौरे से पहले राजधानी में आयोजित विशेष मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय में ईस्ट मामलों के सचिव पी. कुमारन ने कहा कि भारत और मलेशिया के बीच रक्षा सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने साफ किया कि आने वाले दिनों में डिफेंस सेक्टर दोनों देशों के रिश्तों का एक मजबूत शुरुआत हो सकती है। (India Malaysia defence cooperation)
India Malaysia defence cooperation: डॉर्नियर विमान की बिक्री पर भारत की नजर
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत मलेशिया को डॉर्नियर एयरक्राफ्ट बेचने की संभावनाएं तलाश रहा है। डॉर्नियर विमान छोटे और मध्यम दूरी के लिए इस्तेमाल होने वाले मल्टी-रोल एयरक्राफ्ट हैं, जिनका इस्तेमाल ट्रांसपोर्ट, सर्विलांस और समुद्री इलाकों की निगरानी में किया जाता है। भारत पहले ही कई मित्र देशों को डॉर्नियर विमान सप्लाई कर चुका है और अब मलेशिया इस सूची में शामिल हो सकता है।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, मलेशिया की भौगोलिक स्थिति और उसकी समुद्री जरूरतों को देखते हुए डॉर्नियर एयरक्राफ्ट उसके लिए एक उपयोगी विकल्प साबित हो सकते हैं। इससे न सिर्फ भारत के रक्षा निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक भरोसा भी मजबूत होगा। (India Malaysia defence cooperation)
स्कॉर्पीन सबमरीन में सहयोग की संभावना
रक्षा सहयोग का दूसरा अहम पहलू स्कॉर्पीन सबमरीन से जुड़ा है। भारत और मलेशिया दोनों ही इस श्रेणी की सबमरीन ऑपरेट करते हैं। सचिव पी. कुमारन ने बताया कि मलेशिया अपने स्कॉर्पीन सबमरीन के लिए मिड-लाइफ अपग्रेड और रेट्रोफिटिंग जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है।
भारत ने इस क्षेत्र में सहयोग का प्रस्ताव दिया है। खासतौर पर भारतीय नौसेना के स्कॉर्पीन प्रोजेक्ट के बाद भारतीय शिपयार्ड्स और डिफेंस कंपनियों के पास अब सबमरीन मेंटेनेंस और अपग्रेड का अच्छा अनुभव है। ऐसे में भारत मलेशिया के लिए एक भरोसेमंद मेंटेनेंस और टेक्निकल पार्टनर बन सकता है। (India Malaysia defence cooperation)
सुखोई-30 फाइटर जेट्स पर भी बातचीत
भारत और मलेशिया दोनों ही सुखोई-30 फाइटर जेट्स का इस्तेमाल करते हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ने मलेशिया को सुखोई-30 विमानों के मॉडिफिकेशन, अपग्रेडेशन और मिड-लाइफ मेंटेनेंस से जुड़े प्रस्ताव दिए हैं।
भारत में सुखोई-30 एमकेआई का मेंटेनेंस और अपग्रेडेशन बड़े पैमाने पर किया जाता है। ऐसे में मलेशिया के विमानों के लिए भारत एक किफायती और तकनीकी रूप से मजबूत विकल्प बनकर उभर सकता है। (India Malaysia defence cooperation)
भारतीय शिपयार्ड्स से नेवल प्लेटफॉर्म की सप्लाई
डिफेंस सहयोग को और आगे बढ़ाते हुए भारत मलेशिया को नेवल प्लेटफॉर्म सप्लाई करने की संभावनाएं भी तलाश रहा है। सचिव पी. कुमारन ने उम्मीद जताई कि भारतीय शिपयार्ड्स के जरिए मलेशिया को पेट्रोलिंग शिप या अन्य नौसैनिक प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए जा सकते हैं। यह कदम भारत की डिफेंस इंडस्ट्री के लिए एक और बड़ा अवसर खोल सकता है। (India Malaysia defence cooperation)
भारत-मलेशिया रक्षा संबंध बेहद पुराने
भारत और मलेशिया के बीच रक्षा संबंध कोई नए नहीं हैं। दोनों देशों के बीच 1993 में डिफेंस कोऑपरेशन पर एमओयू साइन हुआ था, जिसे इन रिश्तों की नींव माना जाता है। इस समझौते के तहत संयुक्त परियोजनाओं, ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक सपोर्ट और मेंटेनेंस जैसे क्षेत्रों में सहयोग का रास्ता खुला था।
समय के साथ यह सहयोग और मजबूत हुआ है। अगस्त 2024 में मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के भारत दौरे के दौरान दोनों देशों के रिश्तों को कम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा दिया गया था। (India Malaysia defence cooperation)
पीएम मोदी का दौरा क्यों है अहम
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी, विजन महासागर और इंडो-पैसिफिक रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। मलेशिया आसियान का संस्थापक सदस्य है और 2025 में उसकी अध्यक्षता भी कर रहा है।
इस दौरे के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, डिजिटल टेक्नोलॉजी, रिन्यूएबल एनर्जी, शिक्षा, हेल्थकेयर और लोगों के बीच संपर्क जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है। (India Malaysia defence cooperation)
सेमीकंडक्टर और अन्य एमओयू भी एजेंडे में
डिफेंस के अलावा सेमीकंडक्टर सेक्टर भी बातचीत का बड़ा विषय रहेगा। मलेशिया का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम काफी मजबूत माना जाता है और उसके कुल निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी सेक्टर से आता है। भारत और मलेशिया इस क्षेत्र में सरकार-से-सरकार समझौते, इंडस्ट्री सहयोग और रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर साथ काम करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
इसके अलावा डिजास्टर मैनेजमेंट, ऑडियो-विजुअल को-प्रोडक्शन, सीफेरर्स की ट्रेनिंग, एंटी-करप्शन सहयोग, हेल्थकेयर और टेक्निकल ट्रेनिंग जैसे विषयों पर भी कई एमओयू पर चर्चा चल रही है। (India Malaysia defence cooperation)


