📍नंगरहार प्रांत | 23 Feb, 2026, 4:46 PM
Durand Line Pashtun deaths: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। 21 फरवरी की रात को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक की, और इसके बाद जो हुआ उसने हालात को और ज्यादा गंभीर बना दिया। अब स्थिति ऐसी है कि दोनों देशों में आम लोग डर और गुस्से के माहौल में जी रहे हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि इन घटनाओं में मरने वाले ज्यादातर लोग आम नागरिक हैं, जिनका आतंकवाद से कोई सीधा संबंध नहीं है।
ताजा अपडेट के मुताबिक, इन घटनाओं में 48 घंटे के भीतर 26 पश्तूनों की जान चली गई है। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। (Durand Line Pashtun deaths)
Durand Line Pashtun deaths: अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक: निशाने पर आतंकी या आम लोग?
20 और 21 फरवरी की दरम्यानी रात पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में एयरस्ट्राइक की। पाकिस्तान का दावा है कि यह हमला तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी के ठिकानों पर किया गया था। सरकार के मुताबिक यह एक इंटेलिजेंस-बेस्ड ऑपरेशन था, जिसका मकसद आतंकी नेटवर्क को खत्म करना था।
लेकिन जमीन पर जो तस्वीर सामने आई, उसने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए। स्थानीय प्रशासन और गांव वालों के अनुसार, हमला एक रिहायशी इलाके पर हुआ। बेसुद जिले के एक घर को निशाना बनाया गया, जहां आम लोग रह रहे थे। इस हमले में 17 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 11 बच्चे और कई महिलाएं शामिल थीं।
In less than 48 hours, 26 Pashtuns were killed across Afghanistan and Pakistan. It began with Pakistan’s Feb 20–21 airstrike in Nangarhar that local officials say killed 17 civilians, including 11 children and ended with firing on protesters in Tirah Valley. #PashtunLives #AfPak pic.twitter.com/6aziHyabVY
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घटना के बाद सामने आई तस्वीरों में टूटे हुए घर, बिखरा हुआ सामान और मलबे में दबे लोगों के शव दिखे। गांव वालों का कहना है कि वहां कोई आतंकी मौजूद नहीं था। यह सिर्फ एक परिवार का घर था, जो अचानक हमले की चपेट में आ गया।
तालिबान सरकार ने इस हमले को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया और पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी है। (Durand Line Pashtun deaths)
तिराह वैली में दूसरा झटका: मोर्टार से मौत और फिर गोलीबारी
एयरस्ट्राइक के 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि पाकिस्तान के खैबर जिले की तिराह वैली में एक और दुखद घटना सामने आई। यहां एक सिविलियन वाहन पर मोर्टार गिरा। यह घटना उस समय हुई जब लोग इफ्तार की तैयारी कर रहे थे।
इस हमले में 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जिनमें 2 बच्चे भी शामिल थे। यह घटना पूरे इलाके में गुस्से की वजह बन गई। स्थानीय लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और पास के मिलिट्री पोस्ट के सामने विरोध करने लगे।
लोगों की मांग थी कि उन्हें बताया जाए कि आम नागरिकों को क्यों निशाना बनाया गया।
लेकिन हालात उस समय और बिगड़ गए जब प्रदर्शन कर रहे लोगों पर गोली चला दी गई। स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, इस फायरिंग में 4 और लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए।
The pattern is becoming difficult to ignore: counter-terror operations repeatedly unfolding in Pashtun-majority regions, with civilian homes, vehicles and gatherings caught in the line of fire. Security doctrine is now shaping ethnic geography. #SecurityPolicy #HumanRights pic.twitter.com/uW45TkC6Gc
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यह घटना लोगों के गुस्से को और बढ़ाने वाली साबित हुई। अब सवाल सिर्फ सुरक्षा का नहीं, बल्कि इंसाफ का भी बन गया है। (Durand Line Pashtun deaths)
48 घंटे, दो देश और एक ही समुदाय
इन दोनों घटनाओं को साथ जोड़कर देखें तो तस्वीर और भी गंभीर नजर आती है। सिर्फ 48 घंटे के भीतर 26 लोगों की जान चली गई। अफगानिस्तान में 17, पाकिस्तान में पहले 5 और फिर फायरिंग में 4 लोगों की मौत हुई।
सबसे अहम बात यह है कि मरने वाले सभी लोग पश्तूनी समुदाय से थे। यानी डुरंड लाइन के दोनों तरफ एक ही जातीय समूह के लोग इस हिंसा का शिकार बने। (Durand Line Pashtun deaths)
क्या यह सिर्फ ‘काउंटर टेरर ऑपरेशन’ है?
पाकिस्तान लगातार यह कह रहा है कि उसकी कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ है। टीटीपी लंबे समय से पाकिस्तान के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है और कई हमलों में उसका नाम सामने आता रहा है।
लेकिन जमीनी सच्चाई अलग तस्वीर दिखा रही है। बार-बार आम नागरिकों की मौत से यह सवाल उठ रहा है कि क्या इन ऑपरेशंस में सावधानी बरती जा रही है या नहीं।
पिछले एक साल के आंकड़े देखें, तो तस्वीर और साफ होती है। जनवरी 2025 से अब तक पाकिस्तान के अंदर 160 से ज्यादा पश्तून नागरिक मारे जा चुके हैं। वहीं अफगानिस्तान में पाकिस्तान की कार्रवाई में 80 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है।
इनमें बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की है, जो किसी भी तरह से लड़ाई का हिस्सा नहीं थे। (Durand Line Pashtun deaths)
पश्तून इलाकों में ही क्यों हो रही हैं ज्यादा घटनाएं?
विशेषज्ञों का कहना है कि यह संयोग नहीं हो सकता कि ज्यादातर घटनाएं उन्हीं इलाकों में हो रही हैं जहां पश्तून आबादी ज्यादा है। चाहे वह अफगानिस्तान का सीमावर्ती इलाका हो या पाकिस्तान का खैबर पख्तूनख्वा।
यह सच है कि टीटीपी भी इन इलाकों में सक्रिय है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पूरे इलाके को ही शक की नजर से देखा जाए।
Since 2025, hundreds of Pashtuns have reportedly died in operations on both sides of the Durand Line. Each incident is framed as counter-terrorism. But cumulatively, they deepen a perception of collective punishment. And perception can become political reality. #ConflictAnalysis pic.twitter.com/pVIAj2gR48
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धीरे-धीरे यह आरोप भी सामने आ रहे हैं कि सुरक्षा के नाम पर पूरे समुदाय को दबाव में रखा जा रहा है। गांवों को ऑपरेशन जोन बना दिया जाता है, घरों को नुकसान पहुंचता है और आम लोग बीच में फंस जाते हैं। (Durand Line Pashtun deaths)
विरोध पर गोली: हालात कितने गंभीर?
तिराह वैली की घटना ने हालात की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। जब लोग अपने मारे गए परिजनों के लिए इंसाफ मांगने निकले, तो उन्हें भी गोली का सामना करना पड़ा। यह हालात बताते हैं कि अब सिर्फ सैन्य कार्रवाई ही नहीं, बल्कि विरोध को भी खतरे के तौर पर देखा जा रहा है। जब किसी इलाके में आम नागरिकों की आवाज को दबाया जाने लगे, तो यह सिर्फ सुरक्षा का मामला नहीं रह जाता, बल्कि एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बन जाता है। (Durand Line Pashtun deaths)
पूरी दुनिया की है नजर
इस पूरे घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रखी जा रही है। भारत ने नागरिकों की मौत खासकर महिलाओं और बच्चों के नुकसान को लेकर चिंता जताई है। अफगानिस्तान ने इसे सीधा-सीधा अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है और पाकिस्तान से जवाब मांगा है। इससे साफ है कि यह मामला अब सिर्फ दो देशों के बीच का नहीं रह गया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुका है। (Durand Line Pashtun deaths)

