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China Genetic Data Threat: क्या चीन बना रहा है सुपर सोल्जर? दुनिया भर से DNA क्यों जुटा रही चीनी कंपनी, अमेरिकी एजेंसियों ने दी ये बड़ी चेतावनी

दुनिया एक तरह की डीएनए आर्म्स रेस में प्रवेश कर रही है। जेनिटिक डेटा से किसी व्यक्ति की नस्ल, बीमारी की संभावना, शारीरिक बनावट, और पारिवारिक रिश्तों तक का पता लगाया जा सकता है...

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📍नई दिल्ली/वॉशिंगटन | 8 Dec, 2025, 9:13 PM

China Genetic Data Threat: अमेरिका ने चीन की जीनोमिक्स कंपनी बीजीआई को लेकर एक बड़ी चेतावनी जारी की है। अमेरिकी सीनेट की इंटेलिजेंस कमेटी के शीर्ष सदस्य और डेमोक्रेट नेता मार्क वॉर्नर ने कहा है कि चीन की यह कंपनी दुनिया भर से इंसानों का जेनिटिक डेटा जुटा रही है, जिसका इस्तेमाल कई तरह के संवेदनशील और खतरनाक कामों में किया जा सकता है। वॉर्नर ने कहा कि यह मुद्दा आने वाले वर्षों में हुवावे से भी बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

मार्क वॉर्नर ने यह बयान सीएनबीसी सीएफओ काउंसिल समिट में दिया। उन्होंने कहा कि बीजीआई की पहुंच इतनी जबरदस्त है कि दुनिया के कई देशों की जनसंख्या का डीएनए डेटा उसके पास जमा हो चुका है। अमेरिकी एजेंसियों के अनुसार, बीजीआई दुनिया की सबसे बड़ी जीनोमिक्स लैब्स में से एक है, जो अस्पतालों, दवा कंपनियों और कई देशों की सरकारों के साथ मिलकर डीएनए से जुड़े काम करती है।

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China Genetic Data Threat: दुनिया भर में फैला बीजीआई

बीजीआई को पहले बीजिंग जीनोमिक्स इंस्टीट्यूट कहा जाता था, चीन की राष्ट्रीय जीनोमिक्स परियोजनाओं का हिस्सा रहा है। बाद में इसने डीएनए सीक्वेंसिंग, प्रीनेटल टेस्टिंग, कैंसर स्क्रीनिंग और बड़े पैमाने पर पॉपुलेशन जेनेटिक एनालिसिस जैसे कई सेक्टर्स में वैश्विक स्तर पर काम बढ़ाया। रिपोर्ट के अनुसार, बीजीआई ने कई देशों में राष्ट्रीय जेनिटिक डेटाबेस बनाने में मदद की और कोविड-19 के समय कई जगह टेस्टिंग लैब्स भी तैयार की थीं।

अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की सर्विसेज के जरिए कंपनी ने बहुत बड़ी मात्रा में इंसानी डीएनए जुटा लिया है। एक वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, जेनिटिक डेटा सिर्फ मेडिकल जानकारी नहीं है। जब यह बड़ी मात्रा में इकट्ठा होता है, तो यह एक “रणनीतिक संसाधन” बन जाता है।

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डीएनए आर्म्स रेस की चेतावनी

अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि दुनिया एक तरह की डीएनए आर्म्स रेस में प्रवेश कर रही है। जेनिटिक डेटा से किसी व्यक्ति की नस्ल, बीमारी की संभावना, शारीरिक बनावट, और पारिवारिक रिश्तों तक का पता लगाया जा सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से इसे बड़े पैमाने पर सर्विलांस, ट्रैकिंग, और लंबे समय तक बायोलॉजिकल रिसर्च में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

वॉर्नर ने कहा, “वे दुनिया भर का डीएनए इकट्ठा कर रहे हैं। इंसानों पर इस तरह का प्रयोग और बौद्धिक संपदा की चोरी दोनों ही चिंता का विषय हैं।”

अमेरिकी कांग्रेस की जांच रिपोर्टों में दावा किया गया है कि बीजीआई के चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और चीनी सेना से गहरे संबंध हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन में व्यापारिक डेटा और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच कोई स्पष्ट अंतर नहीं होता, इसलिए कंपनियों का डेटा सीधे राज्य के काम में भी इस्तेमाल हो सकता है।

क्या ‘सुपर सोल्जर’ पर काम कर रहा है चीन?

सबसे गंभीर चिंता इस बात को लेकर है कि चीन कहीं जेनिटिक डेटा का इस्तेमाल जेनेटिकली एनहैन्स्ड सोल्जर्स, यानी बेहतर क्षमता वाले सैनिक बनाने में न कर रहा हो। अमेरिकी अधिकारियों ने पहले भी कहा है कि चीन ने ह्यूमन परफॉर्मेंस एनहैंसमेंट और मिलिटरी बायोटेक्नोलॉजी पर रिसर्च की है।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय खुफिया निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने 2020 में एक रिपोर्ट में कहा था कि चीन की सेना ने मानव क्षमताओं को बढ़ाने वाले जीनोमिक रिसर्च में रुचि दिखाई है। मार्क वॉर्नर ने इसी मुद्दे को दोहराते हुए कहा, “यह वाकई डराने वाला है।”

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हुवावे की तरह दोहराई जा रही कहानी

मार्क वॉर्नर ने कहा कि कुछ साल पहले तक अमेरिका में बहुत कम लोग जानते थे कि हुवावे कौन है। लेकिन धीरे-धीरे हुआवे ने दुनिया के टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर में गहरी पैठ बना ली। बाद में इसे प्रतिबंधित करना मुश्किल हो गया।

वॉर्नर ने चेतावनी दी कि बीजीआई भी उसी रास्ते पर चल रही है। कंपनी को चीनी सरकार का पूरा समर्थन मिला हुआ है और वह दुनिया भर में तेजी से विस्तार कर रही है।

साल 2023 में अमेरिका ने बीजीआई की कई सहायक कंपनियों को ट्रेड ब्लैकलिस्ट में डाला था। इससे उन्हें अमेरिकी तकनीक तक पहुंचने में रोक लग गई। अमेरिकी सांसद अब बायोसिक्योर एक्ट पास करने की कोशिश कर रहे हैं, जो चीन की बायोटेक कंपनियों को अमेरिका में काम करने से रोक देगा।

वहीं जो अमेरिकी अस्पतालों और शोध संस्थान बीजीआई की तकनीक पर निर्भर हैं, उन पर भी दबाव बढ़ गया है।

बीजीआई ने एसोसिटेड प्रेस को दिए बयान में कहा कि यह बिल “गलत आधार पर तैयार किया गया है” और कंपनी अमेरिकी नागरिकों के निजी डेटा तक पहुंच नहीं रखती।

क्यों पीछे रह गईं अमेरिकी खुफिया एजेंसियां?

मार्क वॉर्नर ने कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने इस क्षेत्र में देर से ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका की इंटेलिजेंस अब भी सरकारों और सेनाओं पर केंद्रित है, जबकि असली खतरा अब कमर्शियल टेक्नोलॉजी सेक्टर्स जैसे जैसे एआई, बायोटेक, और सेमीकंडक्टर्स में छिपा है।

उन्होंने कहा कि चीन की कंपनियों को समझने के लिए अधिक एडवांस तरीकों से मॉनिटरिंग की जरूरत है। उन्होंने उदाहरण दिया कि कैसे चीन की चिप कंपनी एसएमआईसी ने अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद छह नैनोमीटर चिप बना ली, जिससे अमेरिकी अधिकारी चौंक गए।

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अंतरराष्ट्रीय गठबंधन भी हुआ कमजोर

वॉर्नर ने कहा कि चीन पर निगरानी रखने के लिए अमेरिका को अपने सहयोगी देशों के साथ घनिष्ठ संबंध रखने की जरूरत है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह भरोसा कमजोर हुआ है। फाइव आइज एलायंस के कुछ देशों ने कहा है कि वे अब अमेरिका के साथ खुफिया जानकारी साझा करने में संकोच कर रहे हैं।

वॉर्नर ने कहा कि तकनीकी विकास में सिर्फ मशीनें बनाना ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानक तय करना भी बहुत महत्वपूर्ण होता है। चीन अब कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में अपनी भूमिका बढ़ा रहा है और वहां अपने इंजीनियर भेज रहा है, जिससे वह वैश्विक नियम बनाने में प्रभाव डाल रहा है। उन्होंने कहा, “सवाल यह है कि दुनिया का नेतृत्व कौन करेगा हम या चीन?”

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