📍नई दिल्ली | 27 Jan, 2026, 6:55 PM
Embbraer-Adani Mou: भारत के एविएशन सेक्टर के लिए 27 जनवरी का दिन बेहद खास माना जा रहा है। मंगलवार को ब्राजील की जानी-मानी ग्लोबल एयरोस्पेस कंपनी एम्ब्रेयर और अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के बीच एक अहम एमओयू पर दस्तखत किए गए। इस समझौते का मकसद भारत में इंटीग्रेटेड रीजनल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट इकोसिस्टम तैयार करना है।
यह समझौता इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इसके जरिए भारत में पहली बार कमर्शियल फिक्स्ड-विंग एयरक्राफ्ट की फाइनल असेंबली लाइन (एफएएल) बनाई जाएगी। अब तक भारत में सैन्य विमान और हेलीकॉप्टर तो बनते रहे हैं, लेकिन यात्री विमानों की असेंबली देश के भीतर नहीं होती थी। (Embbraer-Adani Mou)
Embbraer-Adani Mou: आत्मनिर्भर भारत के विजन को मिलेगा नया आधार
यह एमओयू सरकार के आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और उड़ान योजना (यूडीएएन) के तहत किया गया है। सरकार लंबे समय से यह चाहती रही है कि भारत केवल विमान खरीदने वाला देश न रहे, बल्कि विमान बनाने वाले देशों की सूची में भी शामिल हो।
इस साझेदारी से भारत की पहचान एक एविएशन मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर सकती है। साथ ही, ग्लोबल एविएशन सप्लाई चेन में भारत की भागीदारी भी मजबूत होगी। (Embbraer-Adani Mou)
रीजनल एयरक्राफ्ट पर रहेगा मुख्य फोकस
दोनों कंपनियों की इस साझेदारी का मुख्य फोकस रीजनल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट पर रहेगा। इसमें एम्ब्रेयर के आधुनिक ई-190-ई2 और ई-195-ई2 जैसे विमान शामिल हैं, जो आमतौर पर 70 से 150 यात्रियों को ढो सकते हैं।
भारत में जहां छोटे और मध्यम शहरों के बीच हवाई कनेक्टिविटी तेजी से बढ़ रही है, ऐसे विमानों की मांग आने वाले वर्षों में काफी बढ़ने वाली है। ये विमान कम रनवे वाले एयरपोर्ट्स से भी ऑपरेट किए जा सकते हैं, जिससे टियर-2 और टियर-3 शहरों को फायदा मिलेगा। (Embbraer-Adani Mou)
फाइनल असेंबली लाइन क्यों है अहम
फाइनल असेंबली लाइन का मतलब होता है कि विमान के अलग-अलग हिस्सों को एक ही स्थान पर लाकर पूरा एयरक्राफ्ट तैयार किया जाए। इस एमओयू के तहत शुरुआत में विमानों की असेंबली भारत में की जाएगी और बाद में धीरे-धीरे इंडिजनाइजेशन बढ़ाया जाएगा।
आने वाले समय में ज्यादा से ज्यादा पार्ट्स और कंपोनेंट्स भारत में ही बनाए जाने की योजना है। इससे देश में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगा और स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत होगी। (Embbraer-Adani Mou)
सप्लाई चेन और रोजगार के नए मौके
इस प्रोजेक्ट के जरिए भारत में एक मजबूत एविएशन सप्लाई चेन तैयार की जाएगी। इसमें स्थानीय उद्योगों, एमएसएमई और निजी कंपनियों को जोड़ा जाएगा। इसका सीधा असर रोजगार पर पड़ेगा।
एविएशन मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग, क्वालिटी कंट्रोल और टेक्निकल सपोर्ट जैसे क्षेत्रों में हजारों हाई-स्किल नौकरियां पैदा होने की संभावना है। इससे न सिर्फ युवाओं को अवसर मिलेंगे, बल्कि भारत का स्किल बेस भी मजबूत होगा। (Embbraer-Adani Mou)
मेंटेनेंस और ट्रेनिंग इकोसिस्टम भी होगा तैयार
यह साझेदारी केवल विमान बनाने तक सीमित नहीं है। इसके तहत भारत में एमआरओ यानी मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल सुविधाएं विकसित करने की भी योजना है। इससे भारतीय एयरलाइंस को विमान मेंटेनेंस के लिए विदेशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
इसके साथ ही पायलट और टेक्नीशियन ट्रेनिंग प्रोग्राम्स भी शुरू किए जाएंगे, ताकि रीजनल एविएशन सेक्टर की बढ़ती जरूरतों को पूरा किया जा सके। (Embbraer-Adani Mou)
भारत को रीजनल विमानों की जरूरत क्यों
भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू एविएशन बाजार है, लेकिन इसके बावजूद कई छोटे शहर अभी भी सीधे हवाई नेटवर्क से नहीं जुड़े हैं। बड़े विमानों को हर रूट पर चलाना व्यावहारिक नहीं होता और ऑपरेशनल लागत भी ज्यादा आती है।
रीजनल एयरक्राफ्ट इस समस्या को दूर कर सकते हैं। उड़ान योजना के तहत छोटे शहरों को जोड़ने का लक्ष्य पहले से तय है और एम्ब्रेयर-अदाणी की यह साझेदारी इस योजना को जमीन पर उतारने में मददगार साबित हो सकती है। (Embbraer-Adani Mou)
अदाणी और एम्ब्रेयर दोनों को होगा फायदा
अदाणी ग्रुप पहले से ही एयरपोर्ट ऑपरेशन, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और ड्रोन सेक्टर में सक्रिय है। इस साझेदारी उन्हें कमर्शियल एविएशन मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में मजबूत पहचान दिला सकती है।
वहीं एम्ब्रेयर के लिए भारत एक तेजी से बढ़ता हुआ बाजार है। भारत में पहले से ही 50 से अधिक एम्ब्रेयर विमान ऑपरेट हो रहे हैं। इस करार से कंपनी को भारत में लंबे समय तक टिके रहने और विस्तार करने का मौका मिलेगा।
वहीं, इस एमओयू से भारत और ब्राजील के बीच रणनीतिक और औद्योगिक रिश्ते भी मजबूत होंगे। दोनों देश अब एविएशन और डिफेंस जैसे अहम सेक्टर में साझेदारी बढ़ाएंगे। (Embbraer-Adani Mou)


