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Explained: क्या है नौसेना का एलपीडी प्रोजेक्ट? आईएनएस विक्रांत जैसे चार बड़े वॉरशिप कैसे देंगे चीन के एम्फीबियस बेड़े को टक्कर

भारत के पास फिलहाल इस क्लास का एक प्रमुख जहाज आईएनएस जलाश्व है। यह पहले अमेरिकी नौसेना का यूएसएस ट्रेंटन था, जिसे भारत ने 2007 में अमेरिका से खरीदा था...

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📍नई दिल्ली | 21 Oct, 2026, 2:33 PM

Indian Navy LPD Warships: चीन ने अगस्त 2026 में अपने नौवें टाइप-071 लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक (एलपीडी) युद्धपोत को लॉन्च किया था। करीब 25,000 टन वजन वाले इस युद्धपोत का कील बिछाने से लेकर लॉन्चिंग तक का काम महज चार महीने में पूरा किया गया। चीन के इस तेजी से बढ़ते एंफीबियस बेड़े के बीच भारतीय नौसेना ने भी अपनी समुद्री सैन्य क्षमता बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। भारतीय नौसेना ने अक्टूबर 2026 के तीसरे सप्ताह में चार नए लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक (एलपीडी) युद्धपोतों के निर्माण के लिए चयनित भारतीय शिपयार्डों को रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी किया। इन युद्धपोतों का इस्तेमाल समुद्र के रास्ते सैनिकों, टैंकों, तोपों और दूसरे सैन्य उपकरणों को सीधे तट तक पहुंचाने के लिए किया जाएगा। इनकी मदद से भारतीय सेना और नौसेना ऐसे इलाकों में भी सैन्य अभियान चला सकेंगी, जहां बंदरगाह या जेटी उपलब्ध नहीं हैं।

नौसेना के वाइस चीफ वाइस एडमिरल अजय कोचर ने हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित स्वावलंबन 2026 कार्यक्रम से पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस जानकारी की पुष्टि की। चारों जहाजों के निर्माण पर करीब 50,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इनका वजन 30,000 टन से अधिक हो सकता है। जिसके बाद ये विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत के बाद भारत में बनने वाले सबसे बड़े युद्धपोत होंगे।

Indian Navy LPD Warships: क्या है एलपीडी प्रोजेक्ट और क्यों अहम हैं ये जहाज?

लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक एक खास तरह का एंफीबियस वॉरशिप है। इसका काम समुद्र से सैनिकों और भारी सैन्य उपकरणों को जमीन पर उतारना है। सामान्य युद्धपोतों की तरह इसका मुख्य उद्देश्य केवल दुश्मन के जहाजों पर हमला करना नहीं होता, बल्कि यह सैनिकों को युद्ध क्षेत्र तक पहुंचाने, हेलीकॉप्टर ऑपरेशन चलाने और सैन्य अभियान के दौरान जरूरी सामान की सप्लाई बनाए रखने में भी मदद करता है।

इन जहाजों की खासियत यह है कि इन्हें ऐसे समुद्री तटों पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जहां बड़े जहाजों के रुकने के लिए बंदरगाह मौजूद नहीं हैं। किसी मिलिट्री ऑपरेशंस के दौरान एलपीडी सैनिकों और वाहनों को समुद्र के पास लाकर विशेष लैंडिंग क्राफ्ट के जरिए तट तक पहुंचा सकता है।

भारत के पास फिलहाल इस क्लास का एक प्रमुख जहाज आईएनएस जलाश्व है। यह पहले अमेरिकी नौसेना का यूएसएस ट्रेंटन था, जिसे भारत ने 2007 में अमेरिका से खरीदा था। करीब 16,600 टन का ये जहाज पूर्वी नौसेना कमान विशाखापत्तनम में तैनात है। जलाश्व कोविड के दौरान ऑपरेशन समुद्र सेतु जैसे मिशनों में इस्तेमाल हो चुका है। लेकिन ये पुराना हो चुका है और नौसेना के पास अकेला युद्धपोत है। इसी कमी को पूरा करने के लिए भारत 4 नए एलपीडी बनाने की योजना पर काम कर रहा है।

वहीं, नए एलपीडी जहाजों का निर्माण होने पर भारतीय नौसेना की समुद्र से जमीन पर सैन्य अभियान चलाने की क्षमता बढ़ेगी।

30,000 टन से ज्यादा वजन, 900 सैनिकों को ले जाने की क्षमता

नौसेना की जरूरतों के मुताबिक, प्रस्तावित LPD जहाजों का डिस्प्लेसमेंट 30,000 टन से अधिक हो सकता है। इनकी लंबाई लगभग 220 मीटर होगी। प्रत्येक जहाज पर करीब 60 अधिकारी और 525 नाविक तैनात रह सकते हैं।

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इनकी सबसे अहम क्षमता एक बार में लगभग 900 पूरी तरह सुसज्जित सैनिकों को ले जाना है। इनके साथ टैंक, बख्तरबंद वाहन, तोपें और दूसरे सैन्य उपकरण भी रखे जा सकेंगे। इससे सैनिकों को केवल समुद्र के रास्ते पहुंचाना ही नहीं, बल्कि उनके साथ जरूरी युद्धक संसाधन भी तैनात करना संभव होगा।

जहाजों पर हैवी हेलीकॉप्टरों भी ऑपरेशन कर सकेंगे। इन पर दो हेवी-लिफ्ट हेलीकॉप्टरों और स्पेशल ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले 12 हेलीकॉप्टर ऑपरेट किए जा सकेंगे। हेवी-लिफ्ट हेलीकॉप्टर भारी सामान और सैनिकों को तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में मदद करते हैं।

इन जहाजों में एक विशेष वेल डेक भी होगा। यह जहाज के अंदर बना ऐसा हिस्सा होता है, जिसमें पानी भरकर लैंडिंग क्राफ्ट को अंदर लाया और बाहर निकाला जा सकता है। इससे सैनिकों और सैन्य वाहनों को सीधे तट तक पहुंचाने में मदद मिलती है। (Indian Navy LPD Warships)

मोबाइल लॉजिस्टिक्स हब की तरह करेंगे काम

इन एलपीडी जहाजों को केवल सैनिकों को उतारने के लिए नहीं बनाया जा रहा है। इनके डिजाइन में ऐसा वर्कशॉप भी शामिल करने की योजना है, जहां टास्क फोर्स के दूसरे जहाजों के कुछ उपकरणों की मरम्मत और तकनीकी सहायता दी जा सके।

मॉड्यूलर डिजाइन की मदद से जहाजों का इस्तेमाल जरूरत के हिसाब से बदला जा सकेगा। सैन्य अभियान के दौरान ये मोबाइल लॉजिस्टिक्स हब की तरह काम कर सकते हैं, जहां से ईंधन, उपकरण और दूसरे जरूरी सामान को आगे भेजा जा सकता है। आपदा राहत के समय इन्हें फ्लोटिंग अस्पताल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा।

भूकंप, चक्रवात या बाढ़ के बाद जब तटीय इलाकों में सड़कें और बंदरगाह क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, तब समुद्र से राहत सामग्री पहुंचाना महत्वपूर्ण हो जाता है। ऐसे में एलपीडी जहाज राहत दल, मेडिकल स्टाफ, हेलीकॉप्टर और जरूरी सामान को प्रभावित क्षेत्र के करीब ले जा सकते हैं। (Indian Navy LPD Warships)

50,000 करोड़ रुपये का है पूरा प्रोजेक्ट

भारतीय नौसेना इस प्रोजेक्ट पर एक दशक से अधिक समय से काम कर रही है। साल 2010 में चार एलपीडी खरीदने का फैसला किया गया था, लेकिन लंबे समय तक इसका निर्माण अनुबंध पूरा नहीं हो सका।

साल 2014 में रक्षा मंत्रालय ने लगभग 40,000 टन क्षमता वाले चार जहाजों के लिए निजी शिपयार्डों को आरएफपी जारी किया था। उस समय प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 25,000 करोड़ रुपये थी। हालांकि, सितंबर 2020 में इस आरएफपी को वापस ले लिया गया।

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने भी 2020 की अपनी रिपोर्ट में इस खरीद प्रक्रिया में हुई देरी का उल्लेख किया था। इसके बाद नौसेना ने 24 अगस्त 2021 को भारतीय शिपयार्डों के लिए नया रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन (आरएफआई) जारी किया। इसमें विदेशी डिजाइन कंपनियों के साथ साझेदारी करने की अनुमति दी गई थी।

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23 अक्टूबर 2025 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) ने इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 33,000 करोड़ रुपये की एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी (एओएन) मंजूरी दी थी। उस समय जहाजों का डिस्प्लेसमेंट 20,000 से 25,000 टन के बीच था। अब परियोजना की अनुमानित लागत करीब 50,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

एओएन रक्षा खरीद प्रक्रिया की शुरुआती औपचारिक मंजूरी होती है। इसके बाद तकनीकी प्रस्ताव, कीमत, निर्माण योजना और अन्य शर्तों की जांच की जाती है। आरएफपी जारी होने का मतलब है कि चयनित कंपनियों को अब अपने विस्तृत तकनीकी और व्यावसायिक प्रस्ताव देने हैं। (Indian Navy LPD Warships)

कब तक होगी डिलीवरी

एलपीडी कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर होने में अभी समय लग सकता है और इसके लिए 2027 या 2028 तक इंतजार करना पड़ सकता है। साल 2021 में जारी रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन (आरएफआई) के मुताबिक, कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के बाद पहला एलपीडी युद्धपोत 60 महीने यानी पांच साल के भीतर तैयार करना होगा। इसके बाद बाकी तीन जहाजों की डिलीवरी एक-एक साल के अंतराल पर की जानी है। इस समयसीमा को आधार मानें तो अगर कॉन्ट्रैक्ट 2027 या 2028 में साइन होता है, तो पहला जहाज लगभग 2032 से 2034 के बीच मिल सकता है। बाकी तीन जहाजों की डिलीवरी 2034 से 2037 के बीच होने का अनुमान है। पहला एलपीडी युद्धपोत 2033–34 के आसपास नौसेना में शामिल हो सकता है। जबकि चारों जहाजों का बेड़ा 2030 के दशक के मध्य या अंत तक तैयार हो सकता है। (Indian Navy LPD Warships)

किन भारतीय शिपयार्डों के बीच मुकाबला?

इस प्रोजेक्ट में भारतीय सरकारी और निजी शिपयार्ड विदेशी कंपनियों के साथ साझेदारी कर रहे हैं। मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने अक्टूबर 2025 में स्वान डिफेंस एंड हेवी इंडस्ट्रीज के साथ विशेष समझौता किया था। दोनों कंपनियां मिलकर एलपीडी के डिजाइन और निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार कर रही हैं।

हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने फ्रांस की नेवल ग्रुप के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह साझेदारी फ्रांसीसी मिस्त्राल क्लास के एलपीडी डिजाइन से जुड़ी पेशकश के लिए महत्वपूर्ण है।

अन्य संभावित दावेदारों में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड और दक्षिण कोरिया की एचडी हुंडई हेवी इंडस्ट्रीज शामिल हैं। इनके बीच भारतीय नौसेना की जरूरतों के अनुसार जहाज का डिजाइन तैयार करने को लेकर सहयोग की चर्चा है। एलएंडटी और स्पेन की नवांटिया ने भी इसी महीने अक्टुबर की शुरुआत में जुआन कार्लोस-1 क्लास एलपीसी के लिए समझौता किया है। (Indian Navy LPD Warships)

भारत-ब्रिटेन सहयोग से तैयार होगा इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम

इन जहाजों में इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम होगा। जिसमें बिजली पैदा करने वाले इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर की मदद से जहाज को आगे बढ़ाया जाता है। पारंपरिक सिस्टम्स में इंजन से मैकेनिकल पावर सीधे प्रोपेलर तक पहुंचाई जाती है, जबकि इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन में एनर्जी मैनेजमेंट और जहाज के अलग-अलग सिस्टम को पावर सप्लाई दी जा सकती है।

भारत और ब्रिटेन इस तकनीक पर मिलकर काम कर रहे हैं। दोनों देशों की योजना इसके पावर प्लांट को संयुक्त रूप से डिजाइन करने, विकसित करने और उत्पादन करने की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अक्टूबर 2025 में मुंबई में मुलाकात के दौरान इस पहल की घोषणा की थी।

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जीई वर्नोवा और भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) ने इस तकनीक के परीक्षण के लिए भारत की पहली लैंड-बेस्ड मैरिटाइम टेस्टिंग सुविधा स्थापित करने की दिशा में साझेदारी की है। जमीन पर टेस्टिंग फैसिलिटी से जहाज में लगाने से पहले प्रोपल्शन सिस्टम की तकनीकी जांच करना संभव होगा। (Indian Navy LPD Warships)

ड्रोन और नेटवर्क आधारित युद्ध में भी काम आएंगे एलपीडी

भारतीय नौसेना इन जहाजों को कमांड प्लेटफॉर्म के रूप में भी इस्तेमाल करना चाहती है। इनसे यूएवी और मानवरहित अंडरवॉटर व्हीकल यानी यूयूवी के ऑपरेशन और कॉर्डिनेशन में मदद मिल सकती है।

समुद्री ड्रोन दूर तक निगरानी कर सकते हैं, जबकि पानी के भीतर चलने वाले मानवरहित वाहन समुद्र तल का नक्शा तैयार करने, समुद्री माइंस का पता लगाने और पनडुब्बी रोधी अभियानों में उपयोगी हो सकते हैं। जहाजों में विमान, मिसाइल और ड्रोन से बचाव के लिए हथियार तथा सुरक्षा प्रणाली भी शामिल किए जाने की योजना है।

अगस्त 2025 में तीनों सेनाओं ने एंफीबियस ऑपरेशन के लिए जॉइंट डॉक्ट्रिन जारी की थी। इसमें समुद्र, हवा और जमीन पर काम करने वाली मिलिट्री युनिट्स के बीच तालमेल पर जोर दिया गया था। एलपीडी जहाज ऐसे संयुक्त अभियानों में सैनिकों, बख्तरबंद वाहनों, तोपखाने और लॉजिस्टिक्स को एक साथ पहुंचाने वाला प्रमुख प्लेटफॉर्म बन सकते हैं। (Indian Navy LPD Warships)

चीन की एंफीबियस ताकत भी है अहम वजह

चीन की नौसेना लगातार बड़े एंफीबियस युद्धपोतों का बेड़ा बढ़ा रही है। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी के पास टाइप-071 लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक और टाइप-075 एंफीबियस असॉल्ट शिप जैसे जहाज हैं। इनकी मदद से सैनिकों, हेलीकॉप्टरों और सैन्य वाहनों को समुद्र के रास्ते दूरस्थ इलाकों तक पहुंचाया जा सकता है।

हिंद महासागर में चीनी नौसैनिक गतिविधियां, पाकिस्तान के ग्वादर, जिबूती और श्रीलंका में बंदरगाहों पर मौजूदगी तथा क्षेत्र में उसकी बढ़ती पहुंच भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। चार नए एलपीडी जहाज भारतीय नौसेना को सैनिकों और सैन्य संसाधनों को समुद्र के रास्ते तेजी से तैनात करने की अतिरिक्त क्षमता देंगे। (Indian Navy LPD Warships)

Author

  • Herry passport

    Harendra Chaudhary is active in defence journalism and is associated with RakshaSamachar.com. They have long been covering strategic news, defence policies and national security related issues involving Indian Army, Navy and Air Force. In his career of journalism, Harendra has written detailed articles on Parliament’s activities, military campaigns, India-Pak and India-China border dispute, defence procurement and ‘Make in India’ defence projects. They are known for deep understanding and analytical approach of defense cases.

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