📍Dhaka/New Delhi | 21 Dec, 2025, 12:01 AM
Bangladesh unrest: Bangladesh’s military chief General Waker-uj-Jaman, among political upheavals and violent events released in Bangladesh, has relied the Indian Army chief that all the bases, institutions and diplomatic establishments associated with India present in Bangladesh are completely safe. This conversation took place at the time when India’s anti-violent performance is released throughout Bangladesh.
According to sources, India and bangladesh The military chiefs are constantly in direct contact and keep track of ground conditions. The dialogue between the forces of both the countries is the sign that the coordination at the military level has been continually made by the circumstances as stressful as possible, security and stability.
Bangladesh unrest: Haddi’s death after flared violence
bangladesh In recent violence began after the death of Shyrif Usman Hadi, known for student leader and radical views. Haddi was shot by Nakabosh attackers in Dhaka a week ago. Severely wounded Haddi was taken to Singapore to treat, where he died on December 19.
Angry in many cities of Bangladesh spreading the news of the death of Hadi. Organizations telling themselves their supporters landed on the streets. At the same time see the performance became violent. A number of incidents of damage to fire, broken and government and non-governmental properties were revealed. (Bangladesh unrest)
The attacks were carried out on the office of two large media institutes of Bangladesh during violence. The protestors accused these media institutions that they are India supporters. Also, the left-wing cultural organisation in Dhaka was also broken down into the office of Udichi Craftgoshi.
इन घटनाओं ने बांग्लादेश में अभिव्यक्ति की आजादी और मीडिया की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खुद बांग्लादेश के कई वरिष्ठ पत्रकारों ने इसे स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए “अंधकारमय दौर” बताया है।
इन हालात का असर भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर भी साफ दिख रहा है। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से ही दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। भारत लगातार बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू समुदाय पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता जताता रहा है। (Bangladesh unrest)
Bangladesh unrest: बांग्लादेश के उच्चायुक्त को किया तलब
हालिया हिंसा के बीच भारत ने नई दिल्ली में बांग्लादेश के उच्चायुक्त को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। भारत ने साफ कहा कि ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग और अन्य सहायक मिशनों की सुरक्षा बांग्लादेश सरकार की जिम्मेदारी है।
इसके जवाब में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भी ढाका में भारतीय राजदूत को बुलाकर भारत में रह रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बयानों पर आपत्ति जताई। भारत ने स्पष्ट किया कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी पड़ोसी देश के खिलाफ गतिविधियों के लिए नहीं होने देता। (Bangladesh unrest)
सेना प्रमुखों की बातचीत क्यों है अहम
ऐसे तनावपूर्ण माहौल में दोनों देशों के सेना प्रमुखों के बीच सीधी बातचीत को बेहद अहम माना जा रहा है। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, बांग्लादेश के सेना प्रमुख ने भारत को भरोसा दिलाया है कि हिंसा के बावजूद भारतीय मिशनों, कर्मचारियों और परिसंपत्तियों की सुरक्षा में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
बांग्लादेशी सेना ने यह भरोसा उस समय जताया है, जब कुछ इलाकों में भारतीय उच्चायोग और सहायक उच्चायोगों के आसपास प्रदर्शन हुए थे। एहतियातन भारत ने कुछ समय के लिए बांग्लादेश में वीजा आवेदन केंद्र भी बंद कर दिए थे। (Bangladesh unrest)
फरवरी में चुनाव को लेकर बढ़ती चिंता
बांग्लादेश में अगले साल 12 फरवरी को आम चुनाव प्रस्तावित हैं। लेकिन मौजूदा हालात ने इन चुनावों को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। शरिफ उस्मान हादी की हत्या के बाद भड़की हिंसा से कानून-व्यवस्था कमजोर हुई है।
ढाका की सड़कों पर लगातार प्रदर्शन, मीडिया पर हमले और राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती तल्खी से यह सवाल उठने लगा है कि क्या चुनाव तय समय पर हो पाएंगे। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी समेत कई दलों ने आशंका जताई है कि मौजूदा हालात चुनाव प्रक्रिया को पटरी से उतार सकते हैं। (Bangladesh unrest)
भारत की नजरें क्यों टिकी हैं बांग्लादेश पर
भारत की पूर्वी सीमा बांग्लादेश से सटी हुई है और वहां की अस्थिरता का असर सीधे पूर्वोत्तर राज्यों और पश्चिम बंगाल पर पड़ सकता है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इस बात को लेकर भी सतर्क हैं कि बांग्लादेश में बढ़ती अराजकता का फायदा कट्टरपंथी और बाहरी ताकतें उठा सकती हैं। हाल के महीनों में भारत में कई बार यह आशंका जताई गई है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई बांग्लादेश में माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रही है, ताकि भारत पर पूर्वी मोर्चे से दबाव बनाया जा सके। (Bangladesh unrest)
अंतरिम सरकार पर बढ़ता दबाव
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार, जिसकी अगुवाई नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस कर रहे हैं, फिलहाल भारी दबाव में है। एक तरफ उसे चुनाव की तैयारी करनी है, तो दूसरी ओर सड़कों पर उतर आए कट्टरपंथी संगठनों से निपटना भी है। सूत्रों का कहना है कि सरकार या तो हालात पर पूरी तरह काबू नहीं कर पा रही है या फिर जानबूझकर नरमी बरत रही है। वहीं सरकार का दावा है कि वह स्थिति को संभालने के लिए जरूरी कदम उठा रही है और हादी की हत्या की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। (Bangladesh unrest)
भारत चाहता है शांति और स्थिरता
भारत ने अब तक आधिकारिक तौर पर यही रुख अपनाया है कि वह बांग्लादेश में शांति, स्थिरता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का समर्थन करता है। भारत का कहना है कि बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में दखल देना उसका उद्देश्य नहीं है, लेकिन वहां रहने वाले भारतीयों और भारतीय संस्थानों की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है।
सेना प्रमुखों के बीच हुई बातचीत को इसी कड़ी में देखा जा रहा है। यह संदेश भी दिया गया है कि दोनों देशों के की मिलिट्री डिप्लोमेसी हालात बिगड़ने नहीं देगी और किसी भी आपात स्थिति में यह संबंध बने रहेंगे। (Bangladesh unrest)
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