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IAF can get bigger booster: New 114 Rafael, Mega Deal from France to close

Another important aspect of Raphael deal is its cost. This deal can be of many tens of billion euros. However, India already has a benchmark of the price of 36 Rafale Jets...

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📍नई दिल्ली | 10 Jan, 2026, 5:51 PM

114 Rafale Fighter Jet Deal: भारत और फ्रांस के बीच एक बार फिर बड़ी डिफेंस डील हो सकती है। भारतीय वायु सेना में कम होते स्क्वाड्रन को देखते हुए दोनों देशों के बीच मेगा राफेल डील को लेकर बातचीत आखिरी चरण में है। इस प्रस्ताव के तहत भारत अतिरिक्त राफेल फाइटर जेट्स का सौदा कर सकता है, ताकि वायु सेना की ऑपरेशनल जरूरतों को समय रहते पूरा किया जा सके।

इस डील को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं, क्योंकि अगले महीने france के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के भारत दौरे की तैयारी चल रही है। माना जा रहा है कि उनके दौरे से पहले और उसके दौरान इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक और रणनीतिक स्तर पर अहम फैसले लिए जा सकते हैं।

114 Rafale Fighter Jet Deal: डील हो सकती है गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट

भारतीय वायु सेना की सबसे बड़ी चुनौती इस समय स्क्वाड्रन की कमी है। वायु सेना के पास फिलहाल केवल 29 से 31 फाइटर Squadron ही बचे हैं, जबकि जरूरत 42 स्क्वाड्रन की है। पुराने मिग-21 और जैगुआर जैसे विमानों के धीरे-धीरे रिटायर होने से यह अंतर और बढ़ता जा रहा है। ऐसे में वायु सेना को तुरंत आधुनिक लड़ाकू विमानों की जरूरत है। (114 Rafale Fighter Jet Deal)

सूत्रों के मुताबिक, भारतीय वायु सेना ने सरकार को कम से कम 114 आधुनिक कॉम्बैट एयरक्राफ्ट की जरूरत का प्रस्ताव भेजा है। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए Raphael जेट्स को एक भरोसेमंद विकल्प माना जा रहा है। राफेल पहले ही भारतीय वायु सेना में अपनी क्षमता साबित कर चुका है और ऑपरेशनल स्तर पर इसे पूरी तरह अपनाया जा चुका है।

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इस डील की खास बात यह है कि यह गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट यानी सरकार-से-सरकार के बीच होगी। इसका मतलब है कि खरीद प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेज होगी और लंबी टेंडर प्रक्रिया से बचा जा सकेगा। साथ ही, इस सौदे में मेक इन इंडिया को भी अहम जगह दी जा रही है। (114 Rafale Fighter Jet Deal)

सूत्र बताते हैं कि इस डील के तहत खरीदे जाने वाले राफेल जेट्स का बड़ा हिस्सा भारत में ही बनाया जाएगा। इसके लिए फ्रांस की कंपनी Tenth Aviation और भारत की टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के बीच पहले ही अहम समझौते हो चुके हैं। जून 2025 में टाटा और दसॉ के बीच राफेल फाइटर जेट के फ्यूजलाज बनाने को लेकर करार हुआ था।

हैदराबाद में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स की एक नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी तैयार की जा रही है। इस प्लांट में राफेल के चार प्रमुख फ्यूजलाज सेक्शन बनाए जाएंगे। यह पहली बार होगा जब फ्रांस के बाहर राफेल का फ्यूजलाज तैयार किया जाएगा। इस यूनिट की सालाना उत्पादन क्षमता लगभग 24 फ्यूजलाज होगी और पहली डिलीवरी वित्त वर्ष 2027-28 से शुरू होने की उम्मीद है। (114 Rafale Fighter Jet Deal)

इसके अलावा, राफेल से जुड़े अन्य बड़े प्रोजेक्ट भी भारत में चल रहे हैं। हैदराबाद में ही एक इंजन प्रोडक्शन प्लांट लगाने की योजना है। वहीं, उत्तर प्रदेश के जेवर में एक बड़ा एमआरओ हब यानी मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल सेंटर बनाया जा जा रहा है। इन सभी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद राफेल जेट की कुल वैल्यू का करीब 60 फीसदी हिस्सा भारत में ही तैयार होगा। (114 Rafale Fighter Jet Deal)

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रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस डील से भारत को केवल फाइटर जेट ही नहीं मिलेंगे, बल्कि कई क्रिटिकल टेक्नोलॉजी भी देश में आएंगी। इससे भारतीय रक्षा उद्योग को मजबूती मिलेगी, हजारों रोजगार पैदा होंगे और देश की एविएशन सप्लाई चेन मजबूत होगी।

राफेल डील का एक और अहम पहलू इसकी लागत है। यह सौदा कई दसियों अरब यूरो का हो सकता है। हालांकि, भारत के पास पहले से 36 राफेल जेट्स की कीमत का एक बेंचमार्क मौजूद है। इसके अलावा, हाल ही में भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल-मरीन विमानों का कॉन्ट्रैक्ट भी साइन किया गया है। इससे कीमत और शर्तों को तय करने में सरकार को सुविधा मिलेगी। (114 Rafale Fighter Jet Deal)

प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए सबसे पहले इसे डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल से मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद लागत पर बातचीत होगी और अंत में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी से अंतिम स्वीकृति जरूरी होगी। साथ ही, इस बड़े सौदे के लिए सालाना डिफेंस बजट में पर्याप्त प्रावधान भी करना होगा।

राफेल को लेकर वायु सेना का भरोसा हाल के ऑपरेशनल अनुभवों से भी जुड़ा है। हालिया अभियानों और अभ्यासों में राफेल ने अपनी एडवांस्ड एवियोनिक्स, लॉन्ग-रेंज हथियारों और नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर क्षमताओं से अच्छा प्रदर्शन किया है। दो-फ्रंट थ्रेट यानी चीन और पाकिस्तान दोनों को एक साथ ध्यान में रखते हुए वायु सेना ऐसे प्लेटफॉर्म चाहती है, जो तुरंत तैनाती और लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के साथ आएं। (114 Rafale Fighter Jet Deal)

अगर यह डील आगे बढ़ती है, तो भारत फ्रांस के बाद राफेल का सबसे बड़ा ऑपरेटर बन सकता है। पहले से मौजूद 36 राफेल, नौसेना के लिए ऑर्डर किए गए 26 राफेल-मरीन और प्रस्तावित नए विमानों को मिलाकर भारत के पास राफेल का बड़ा बेड़ा होगा। इससे ट्रेनिंग, स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस में भी आसानी होगी। (114 Rafale Fighter Jet Deal)

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