📍New Delhi | 17 May, 2026, 7:54 PM
IAF AGNI Simulator System: The Indian Air Force is going to buy new Advance Simulator System to deliver hightech training to its pilots. The Air Force for the purchase of "Air Combat, Ground Planning and Network Integrated (AGNI) Simulator System"RFP) Issued. This system will be imposed at the Air Defense College located at Memora Air Force Station in Lucknow. The special thing is that it is not just a common flight simulator, but it will be a complete network-based integrated system, with pilots, air defense controllers and ground commanders to take training together.
IAF AGNI Simulator System: What is ‘Fire’ Simulator System?
The air war in today’s time is not limited to blowing only the fighter jet. Now radars, network links, satellite data, electronic jamming and cyber systems have also become part of the war. The training of the old way was not enough in such a way. The work on the "Fire" project was started considering the same need.
‘अग्नि’ सिमुलेटर सिस्टम ऐसा डिजिटल युद्ध सिस्टम होगा, जिसमें बिना असली लड़ाकू विमान उड़ाए, बिना गोला-बारूद खर्च किए और बिना किसी जोखिम के वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों का अभ्यास किया जा सकेगा। इसमें दुश्मन के फाइटर जेट, ड्रोन, मिसाइल हमले, रडार ट्रैकिंग, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और नेटवर्क कमांड जैसे पूरे युद्ध माहौल को लाइव सिमुलेट किया जाएगा।
आखिर ‘अग्नि’ सिस्टम करेगा क्या?
‘अग्नि’ सिस्टम का मुख्य काम युद्ध जैसे हालात बनाकर अधिकारियों को ट्रेनिंग देना है। इसमें फाइटर पायलट, एयर डिफेंस कंट्रोलर और ग्राउंड वॉर प्लानर एक साथ अभ्यास करेंगे।
मान लीजिए दुश्मन का लड़ाकू विमान भारतीय सीमा की तरफ बढ़ रहा है। सिस्टम में रडार उसे पकड़ लेगा। कंट्रोलर स्क्रीन पर उसकी लोकेशन देखेगा। फिर वह फाइटर जेट को आदेश देगा। पायलट अपने कॉकपिट में बैठकर दुश्मन की तरफ जाएगा। मिसाइल लॉक होगी, Electronic Jamming शुरू होगी और नीचे बैठी ग्राउंड टीम पूरे ऑपरेशन को कंट्रोल करेगी। यह सब कुछ एक साथ नेटवर्क पर चलेगा।
चार हिस्सों में बंटा होगा पूरा सिस्टम
इस पूरे सिस्टम को चार बड़े सेक्शन में बांटा गया है। पहला हिस्सा फाइटर कंट्रोलर सेक्शन होगा। यही वह जगह होगी जहां Air Defense कंट्रोलर बैठकर दुश्मन के विमानों और मिसाइलों की निगरानी करेंगे। यहां बड़े पैनोरमिक डिस्प्ले लगाए जाएंगे जिन पर एक साथ हजार से ज्यादा ट्रैक्स दिखाई दे सकेंगे। इनमें फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर, ड्रोन, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और मिसाइल शामिल होंगी।
अधिकारियों को यह भी ट्रेनिंग दी जाएगी कि किस स्थिति में कौन सा हथियार इस्तेमाल करना है और किस विमान को इंटरसेप्ट करना है। इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के हालात भी बनाए जाएंगे ताकि जामिंग और फेक सिग्नल जैसी स्थितियों से निपटने का अभ्यास हो सके। (IAF AGNI Simulator System)
असली लड़ाकू विमान जैसा कॉकपिट
अग्नि सिस्टम का दूसरा सबसे अहम हिस्सा एयरक्राफ्ट कॉकपिट सेक्शन होगा। यहां चार हाई-फिडेलिटी कॉकपिट बनाए जाएंगे। इनमें भारतीय वायु सेना के सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000 या राफेल जैसे विमान का अनुभव मिलेगा। साथ ही विदेशी विमानों जैसे एफ-16, एफ-22 या चीन के जे-10 और जे-11 जैसे प्लेटफॉर्म भी सिमुलेट किए जाएंगे।
इन कॉकपिट में बैठने वाले पायलट को ऐसा महसूस होगा जैसे वह असली विमान उड़ा रहा हो। कंट्रोल स्टिक, थ्रॉटल, रडार, मिसाइल चेतावनी सिस्टम और हथियार नियंत्रण – सब कुछ वास्तविक विमान जैसा होगा। सीट हल्के झटकों और मूवमेंट के साथ काम करेगी ताकि टेकऑफ, मोड़ और मिसाइल लॉन्च जैसी स्थितियां असली लगें।
सबसे खास बात यह है कि इसमें वीआर और मिक्स्ड रियलिटी तकनीक भी इस्तेमाल होगी। पायलट हाई-रेजोल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी के जरिए युद्ध क्षेत्र को देख सकेंगे। उन्हें बादल, बारिश, कोहरा और रात जैसी परिस्थितियों में भी उड़ान का अभ्यास कराया जाएगा। (IAF AGNI Simulator System)
डॉगफाइट से लंबी दूरी की ट्रेनिंग
इस सिस्टम में “टू वर्सेस टू” एयर कॉम्बैट ट्रेनिंग भी होगी। मतलब दो विमान मिलकर दुश्मन के दो विमानों के खिलाफ लड़ाई का अभ्यास कर सकेंगे। इसके अलावा बियॉन्ड विजुअल रेंज यानी बीवीआर और विजुअल रेंज डॉगफाइट दोनों तरह के युद्ध अभ्यास होंगे।
पायलटों का सीधा संपर्क फाइटर कंट्रोलर से रहेगा। कंट्रोलर उन्हें रडार पर दिख रहे दुश्मन की जानकारी देंगे और पायलट उसी आधार पर कार्रवाई करेंगे। इससे टीमवर्क और रियल टाइम कोऑर्डिनेशन बेहतर होगा। (IAF AGNI Simulator System)
जमीन से लेकर समुद्र तक पूरा बैटलफील्ड होगा सिमुलेट
एजीएनआई सिस्टम का सबसे जटिल हिस्सा ग्राउंड एनवायरनमेंट सेक्शन माना जा रहा है। यहां थल सेना, नौसेना और वायु सेना तीनों से जुड़े प्लेटफॉर्म्स को एक साथ जोड़ा जाएगा।
आरएफपी डॉक्यूमेंट के मुताबिक इसमें टैंक, मिसाइल सिस्टम, रडार, ड्रोन, युद्धपोत, एयरक्राफ्ट कैरियर, सबमरीन और बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम तक को सिमुलेट किया जाएगा। 3डी इंटरैक्टिव स्क्रीन पर पूरा युद्धक्षेत्र दिखाई देगा। कौन सा रडार कितना क्षेत्र कवर कर रहा है, किस मिसाइल की रेंज कितनी है और कहां से हमला हो सकता है – सब कुछ लाइव दिखेगा।
यही नहीं, सिस्टम में धुआं, विस्फोट, मिसाइल ट्रेल और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग जैसे स्पेशल इफेक्ट्स भी होंगे ताकि अभ्यास बिल्कुल वास्तविक लगे। साथ ही, खराब मौसम और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर भी सिमुलेट किया जाएगा।
यानी बारिश, तूफान, धुंध, रडार जैमिंग, फर्जी सिग्नल और इलेक्ट्रॉनिक हमले जैसी स्थितियां भी बनाई जाएंगी। इससे अधिकारियों को वास्तविक युद्ध की कठिन परिस्थितियों की ट्रेनिंग मिलेगी। (IAF AGNI Simulator System)
इंस्ट्रक्टर पूरे युद्ध को करेंगे कंट्रोल
सिस्टम में अलग से सुपरवाइजर सेक्शन भी होगा। यहां बैठे इंस्ट्रक्टर किसी भी समय युद्ध की स्थिति बदल सकेंगे। वे अचानक दुश्मन के नए विमान जोड़ सकते हैं, नेटवर्क जामिंग कर सकते हैं या मौसम खराब कर सकते हैं।
पूरे अभ्यास की रिकॉर्डिंग भी होगी। बाद में वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग देखकर पायलटों और कंट्रोलरों की गलतियों का विश्लेषण किया जाएगा। (IAF AGNI Simulator System)
तीनों सेनाओं की संयुक्त ट्रेनिंग
इस सिस्टम की एक बड़ी खासियत यह भी होगी कि इसमें केवल वायु सेना ही नहीं, बल्कि थल सेना और नौसेना के अधिकारी भी ट्रेनिंग ले सकेंगे।
यानी भविष्य में तीनों सेनाएं एक साथ मल्टी डोमेन वॉरफेयर का अभ्यास कर सकेंगी। यह थिएटराइजेशन और जॉइंटनेस मॉडल के लिए भी अहम माना जा रहा है। (IAF AGNI Simulator System)
देना होगा मैलिशियस कोड न होने का प्रूफ
अग्नि के वेंडर को यह साबित करना होगा कि सिस्टम में कोई मैलिशियस कोड या साइबर खतरा नहीं है। सभी सॉफ्टवेयर और नेटवर्क पूरी तरह सुरक्षित होने चाहिए। कंपनियों को ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर यानी ओईएम सपोर्ट सर्टिफिकेट भी देना होगा। इसके लिए विशेष सुरक्षा जांच और सर्टिफिकेट जरूरी होंगे।
वायु सेना ने पूरे प्रोजेक्ट के लिए 365 दिन की समय सीमा तय की है। पहले चरण में फाइटर कंट्रोलर सेक्शन तैयार होगा। उसके बाद कॉकपिट सेक्शन लगाया जाएगा। सबसे आखिर में ग्राउंड एनवायरनमेंट सेक्शन को ऑपरेशनल किया जाएगा क्योंकि यह सबसे जटिल हिस्सा है।
अगर कोई कंपनी तय समय पर सिस्टम तैयार नहीं कर पाती तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है। कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने का अधिकार भी वायु सेना के पास रहेगा।
इसमें भविष्य में नए कॉकपिट, अतिरिक्त कंसोल और नए युद्ध परिदृश्य जोड़ने की सुविधा रखी गई है। सिस्टम को 20 साल तक अपग्रेड करने लायक बनाया जाएगा।
साथ ही ऑपरेटर और मेंटेनेंस ट्रेनिंग भी दी जाएगी ताकि लंबे समय तक इसका ऑपरेशन भारत में ही किया जा सके। यही वजह है कि इसे आत्मनिर्भर भारत अभियान से जोड़कर भी देखा जा रहा है। (IAF AGNI Simulator System)
Author
Harendra Chaudhary is active in defence journalism and is associated with RakshaSamachar.com. They have long been covering strategic news, defence policies and national security related issues involving Indian Army, Navy and Air Force. In his career of journalism, Harendra has written detailed articles on Parliament’s activities, military campaigns, India-Pak and India-China border dispute, defence procurement and ‘Make in India’ defence projects. They are known for deep understanding and analytical approach of defense cases.





