
📍New Delhi | 28 Apr, 2025, 12:46 PM
India-Taliban Talks: India has taken a significant diplomatic step between the rising tension between India and Pakistan after the initiativegam panic attack. Anand Prakash, headed by Pakistan, Afghanistan and Iran Division in the Indian Ministry of External Affairs, met the acting Foreign Minister Rich Khan Mutki in Kabull. In this meeting, the two sides discussed the opportunities for India- Afghanistan relations, trade, and investment. The visit has taken place at the time when Kashmir terror attack has raised concerns about regional security.

India-Taliban Talks: What happened in Kabull?
According to Afghan Media House Tolo News, the rich Khan Mutki at this meeting in Kabull emphasized strengthening political and economic relations with India. He appealed to take advantage of investment opportunities in Afghanistan from Indian investors. "The trade and diplomatic relationship between India and Afghanistan needs to be increased," Mutki said. Several sectors are open for investments in Afghanistan, and Indian companies can avail them. ""
Anand Prakash clarified the status of India in this meeting. However, it’s not clear whether the issue of the Initiative’s terror attack picked up in this discussion. According to the sources, India emphasized humanitarian assistance and stability in Afghanistan. India has always said that the land of Afghanistan should not be used for terror activities against any country.
India-Taliban Talks: Taliban Don’t Have Formal Recognition
काबुल में हुई इस बातचीत का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि अब तक भारत ने तालिबान शासन को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं दी है। भारत लगातार यह मांग करता रहा है कि अफगानिस्तान में सभी वर्गों को शामिल करने वाली एक समावेशी सरकार का गठन हो, और यह सुनिश्चित किया जाए कि अफगान धरती का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ आतंकवाद फैलाने के लिए न हो।
These Pakistani YouTube channels have been banned by MHA for deciminating anti India content. 👇Attack #PahalgamTerrorAttack https://t.co/zr8E9GkCVr pic.twitter.com/HmpCYL1apm
— Raksha Samachar | 🇮🇳 (@RakshaSamachar) April 24, 2019
तालिबान द्वारा भारत के साथ संबंध सुधारने की कोशिशें यह संकेत देती हैं कि काबुल अब नई दिल्ली के साथ अपने रिश्तों को फिर से पटरी पर लाना चाहता है। मुत्ताकी का यह बयान कि भारत के निवेशकों को अफगानिस्तान में अवसरों का लाभ उठाना चाहिए, तालिबान के भारत के प्रति नजरिए में बदलाव का इशारा है।
India-Taliban Talks: अफगानिस्तान के विकास में भारत का हाथ
भारत हमेशा से अफगानिस्तान के साथ मजबूत दोस्ती का पक्षधर रहा है। तालिबान के सत्ता में आने से पहले भारत ने वहां बड़े स्तर पर विकास परियोजनाएं चलाई थीं, जैसे सलमा डैम, अफगान संसद भवन, और कई सड़क निर्माण परियोजनाएं।
लेकिन अगस्त 2021 में जब तालिबान ने सत्ता पर कब्जा किया, तो भारत ने अपनी सुरक्षा चिंताओं के चलते काबुल से अपने राजनयिकों को वापस बुला लिया था। बाद में, जून 2022 में भारत ने एक “तकनीकी टीम” के माध्यम से फिर से काबुल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, ताकि मानवीय सहायता और सीमित राजनयिक कार्यों को संभाला जा सके।
इससे पहले भारत ने अफगानिस्तान में जारी मानवीय संकट को देखते हुए वहां खाद्यान्न, दवाइयां और अन्य राहत सामग्री भेजने का काम लगातार जारी रखा है। भारत का रुख साफ रहा है, चाहे जो भी सरकार सत्ता में हो, अफगान जनता के लिए सहायता अवश्य दी जाएगी।
भारत बार-बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इस बात की वकालत करता रहा है कि अफगानिस्तान को बिना किसी बाधा के मानवीय सहायता मिलनी चाहिए। काबुल में हुई हालिया बातचीत में भी आर्थिक सहयोग के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया।
अब आनंद प्रकाश की इस मुलाकात के बाद यह संकेत मिल रहे हैं कि भारत एक बार फिर से अफगानिस्तान में अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों को सुरक्षित करने के प्रयास कर रहा है, भले ही तालिबान को आधिकारिक मान्यता न दी गई हो।
पहलगाम हमले पर तालिबान ने दी थी ये प्रतिक्रिया
तालिबान ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की थी। तालिबान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल कहार बल्खी ने कहा था, “हम पर्यटकों पर इस हमले की निंदा करते हैं। यह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए खतरा है।” तालिबान ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। यह बयान उस समय आया, जब भारत ने हमले के बाद सिंधु जल समझौता निलंबित कर दिया और पाकिस्तान आतंकी लिंक को उजागर किया।
विश्लेषकों का मानना है कि तालिबान का बयान भारत के साथ आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। आनंद प्रकाश की काबुल यात्रा और तालिबान के कार्यवाहक विदेश मंत्री के साथ उनकी मुलाकात इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Taliban-India Relations: Will Afghanistan reopen the Indian Embassy? How to try or force a relationship with talisman?
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत अफगानिस्तान में अपना प्रभाव बनाए रखना चाहता है, ताकि पाकिस्तान और चीन जैसे देशों को वहां पूरी तरह हावी होने से रोका जा सके। अफगानिस्तान का भू-राजनीतिक महत्व, विशेषकर मध्य एशिया तक पहुंच के लिहाज से, भारत के लिए बेहद अहम है। जून 2022 में भारत ने काबुल में अपनी तकनीकी टीम तैनात कर दूतावास को फिर से शुरू किया था। यह कदम अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारतीय अधिकारियों की वापसी के बाद उठाया गया था।
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