📍New Delhi | 26 May, 2025, 12:29 pm
Book Review: ‘On the other hand of Everest’ is a book of R Veddra Kumar, which gives readers the world’s highest peak Mount Everest as well as the motivation to win life challenges. Rabindra Kumar is an IAS officer who is also fond of mountaineering. In this book, he has interestingly described his Everest climb and Tibet’s cultural-study journey. In particular, Jokhang Math makes this book more special.
Book Review: Arrive from North direction to the peak of Everest
Rabindra Kumar comes from a simple family. Hard work and diligently they first became the IAS officer and then dreamed of catastrophic mountains like Everest. At the beginning of the book they tell how they tried to climb Everest in 2013, but failed. This failure was not defeated for them. In 2017 after several years of hard work, physical and mental preparation, they arrived at the peak of Everest from the northern direction of Tibet. In Tibet, Everest is called Chomolangma, it is called Sagarmatha in Nepal. It is extremely difficult to climb from Tibet as compared to Nepal, and the highly selected people are able to meet Tibet’s side.
From Kullu to Kanchenjunga!
Havildar Sushil Kumar from the village of Padhei in Himachal Pradesh has made the nation proud by scaling Mt. Kanchenjunga (8,586m) – the world’s 3rd peak highest
‘Har Shikhar Tiranga’ pic.twitter.com/o6vOWJvZAT— Raksha Samachar | 🇮🇳 (@RakshaSamachar) May 25, 2019
The name of the book "On the other hand of Everest" does not just show the second direction of the mountain, but it speaks of the aspects of life, where the human beings gain something bigger by defeating their weaknesses. "Everest is not just a mountain, it symbolizes every great challenge of life. ""
The magic of Tibet and Jokhang Monastery
इस किताब का एक खास हिस्सा तिब्बत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक झलक है। जब लेखक ल्हासा, जो तिब्बत की राजधानी है, पहुंचे, तो वे जोखांग मठ गए। यह मठ तिब्बती बौद्ध धर्म का बहुत महत्वपूर्ण केंद्र है। लेखक इसे “शांति और ऊर्जा का स्थान” कहते हैं। उनके शब्दों में, मठ में कदम रखते ही उन्हें एक अनोखी शांति मिली, जैसे सारी चिंताएं गायब हो गईं।
जोखांग मठ का निर्माण 7वीं सदी में राजा सोंगत्सेन गम्पो ने करवाया था। यह तिब्बती कला और वास्तुकला का शानदार नमूना है। लेखक बताते हैं कि 1966 में सांस्कृतिक क्रांति के दौरान इस मठ को काफी नुकसान हुआ था, लेकिन 1972 से 1980 तक इसे फिर से बनाया गया। आज यह मठ तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
लेखक लिखते हैं, “मठ के आसपास तीर्थयात्रियों की भीड़ और उनकी आस्था को देखकर मुझे अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ने की प्रेरणा मिली। यह अनुभव किसी ध्यान साधना जैसा था।” यह वर्णन पाठकों को तिब्बत की संस्कृति और आध्यात्मिकता के करीब ले जाता है। यह किताब को सिर्फ पर्वतारोहण की कहानी से कहीं ज्यादा बनाता है।
दिल को छू लेती है किताब
रवींद्र कुमार की लेखन शैली बहुत आसान और दिल को छूने वाली है। पर्वतारोहण जैसे जटिल विषय को भी उन्होंने इतने सरल तरीके से लिखा है कि कोई भी आम पाठक इसे समझ सकता है। उनकी लेखनी में हिमालय की बर्फीली चोटियां, ठंडी हवाएं और मुश्किल रास्ते जैसे जीवंत हो उठते हैं। पाठक को ऐसा लगता है जैसे वह खुद एवरेस्ट की चढ़ाई कर रहा हो।
लेखक ने सिर्फ पर्वतारोहण की बातें ही नहीं लिखीं, बल्कि अपने डर, अकेलापन और आत्मविश्वास की कमी जैसे मानसिक संघर्षों को भी खुलकर बताया है। वे लिखते हैं कि कैसे उन्होंने इन कमजोरियों को हराकर खुद को मजबूत किया। यह किताब सिर्फ शारीरिक मेहनत की कहानी नहीं, बल्कि मन की ताकत और आत्मविश्वास की जीत की कहानी है।
‘एवरेस्ट की दूसरी ओर’ एक ऐसी किताब है, जो हर पाठक को प्रेरित करती है। लेखक का मानना है कि असफलता कोई अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। उनकी 2013 की नाकाम कोशिश और फिर 2017 में मिली सफलता इस बात का सबूत है। वे कहते हैं कि अगर आपके पास साहस, मेहनत और धैर्य है, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।
यह किताब खास तौर पर उन युवाओं के लिए है, जो असफलता से डरकर अपने सपने छोड़ देते हैं। लेखक का यह अनुभव बताता है कि मेहनत और लगन से हर शिखर को छुआ जा सकता है। चाहे वह एवरेस्ट की चोटी हो या जीवन का कोई और बड़ा लक्ष्य। लेखक का यह संदेश है कि अगर आपने ठान लिया, तो कोई भी मुश्किल आपको रोक नहीं सकती।
किताब का हर पन्ना देता है नई प्रेरणा और उत्साह
यह किताब हर तरह के पाठकों के लिए है। जो लोग साहसिक कहानियां पसंद करते हैं, उनके लिए इसमें एवरेस्ट की चढ़ाई का रोमांच है। जो लोग संस्कृति और आध्यात्मिकता में रुचि रखते हैं, उनके लिए तिब्बत और जोखांग मठ का वर्णन एक अनमोल अनुभव है। और जो लोग जीवन में प्रेरणा ढूंढ रहे हैं, उनके लिए यह किताब एक मार्गदर्शक है। लेखक ने अपनी कहानी को इतने रोचक तरीके से लिखा है कि पाठक इसे एक बार शुरू करने के बाद खत्म किए बिना नहीं रह सकता। किताब का हर पन्ना नई प्रेरणा और उत्साह देता है।
‘एवरेस्ट की दूसरी ओर’ एक ऐसी किताब है, जो रोमांच, आध्यात्मिकता और प्रेरणा का मिश्रण है। रवींद्र कुमार ने अपनी इस किताब में न सिर्फ अपनी एवरेस्ट यात्रा को साझा किया, बल्कि तिब्बत की संस्कृति और जोखांग मठ की आध्यात्मिकता को भी खूबसूरती से पेश किया। यह किताब सिर्फ एक पर्वतारोही की कहानी नहीं, बल्कि हर उस इंसान की कहानी है, जो अपने सपनों को सच करना चाहता है।
Book On Brigadier LS Lidder: Army Heads Bole- Today Are Alive In Hearts The memories of the Brigadier Lidder, from General to Hwaldar were loved
यह किताब हर उस व्यक्ति को पढ़नी चाहिए, जो अपने जीवन में कुछ बड़ा करना चाहता है। यह न केवल एक यात्रा की कहानी है, बल्कि आत्म-खोज और आत्मविश्वास की एक प्रेरक गाथा है। रवींद्र कुमार की यह किताब हमें सिखाती है कि अगर मन में ठान लिया जाए, तो कोई भी शिखर दूर नहीं।
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