📍नई दिल्ली | 24 Jan, 2026, 7:25 PM
Made in India C-295 aircraft: भारतीय वायु सेना के लिए तैयार किया जा रहा पहला ‘मेक इन इंडिया’ सी-295 मिलिटरी ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। उम्मीद जताई जा रही है कि यह विमान सितंबर 2026 तक गुजरात के वडोदरा स्थित टाटा-एयरबस प्लांट से रोलआउट कर दिया जाएगा।
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 21 जनवरी को नई दिल्ली में यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि भारत-स्पेन रक्षा औद्योगिक सहयोग अब सिर्फ तकनीक लेने-देने तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि भारत अब खरीदार से सह-निर्माता की स्थिति में पहुंच रहा है। (Made in India C-295 aircraft)
Made in India C-295 aircraft: 2021 की डील से 2026 तक का सफर
सी-295 एक मीडियम-रेंज, ट्विन-इंजन टर्बोप्रॉप टैक्टिकल ट्रांसपोर्ट विमान है, जो मूल रूप से स्पेन की एयरबस डिफेंस एंड स्पेस ने डेवलप किया था। सी-295 एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट की शुरुआत साल 2021 में हुई थी, जब भारत सरकार और एयरबस डिफेंस एंड स्पेस के बीच करीब 21,935 करोड़ रुपये का समझौता हुआ था। इस डील के तहत भारतीय वायु सेना के लिए कुल 56 सी-295 विमान खरीदे जाने हैं। इनमें से शुरुआती 16 विमान स्पेन के सेविल प्लांट से पूरी तरह तैयार हालत में भारत लाए गए, जबकि शेष 40 विमानों का निर्माण और असेंबली भारत में की जानी है।
इन 40 विमानों की जिम्मेदारी टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड को सौंपी गई है। वडोदरा में बनी फाइनल असेंबली लाइन का उद्घाटन अक्टूबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्पेन के प्रधानमंत्री ने संयुक्त रूप से किया था। (Made in India C-295 aircraft)
पुराने एवरो विमानों की जगह लेगा सी-295
सी-295 विमान भारतीय वायु सेना के पुराने और उम्र पूरी कर चुके एवरो-748 विमानों की जगह लेगा। एवरो विमान दशकों से सेवा में थे, लेकिन आधुनिक युद्ध और लॉजिस्टिक्स की जरूरतों के हिसाब से अब वे पर्याप्त नहीं रह गए थे। सी-295 को खास तौर पर सैनिकों की तुरंत तैनाती, कार्गो ट्रांसपोर्ट, मेडिकल इवैकुएशन और आपदा राहत अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है।
यह विमान कम रनवे से उड़ान भरने और उतरने में सक्षम है, जिससे पहाड़ी इलाकों, द्वीपों और सीमावर्ती क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता काफी बढ़ जाती है। (Made in India C-295 aircraft)
भारत में कितना स्वदेशी, कितना विदेशी?
सी-295 को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इस बात पर हो रही है कि यह कितना स्वदेशी है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस विमान के 85 फीसदी से ज्यादा स्ट्रक्चरल वर्क भारत में हो रहा है। इसके अलावा विमान के लिए इस्तेमाल होने वाले करीब 13 हजार डिटेल पार्ट्स भारतीय कंपनियां बना रही हैं।
हालांकि, इंजन और कुछ प्रमुख सिस्टम अभी भी स्पेन से आते हैं, लेकिन इनके साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी हो रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया में आज कोई भी आधुनिक मिलिटरी एयराक्रफ्ट नहीं है जो पूरी तरह एक ही देश में बनता हो। अहम बात यह है कि भारत अब ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बन रहा है, सिर्फ असेंबली नहीं कर रहा। (Made in India C-295 aircraft)
क्या है सी-295 की ताकत
सी-295 का इस्तेमाल भारतीय वायु सेना द्वारा जल्दी तैनाती, सैनिकों के परिवहन, भारी सामान ढोने और आपदा राहत अभियानों में किया जा सकता है। यह लगभग 9 टन पेलोड ले जाने की क्षमता रखता है। इसमें लगभग 71 जवानों या पैराट्रूपर्स को एक साथ ले जाया जा सकता है। साथ ही, यह शॉर्ट टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (STOL) क्षमता से लैस है, जिससे यह छोटे रनवे से भी उड़ान भर सकता है। (Made in India C-295 aircraft)
“स्वदेशी या विदेशी” के संकरे नजरिये से देखना सही नहीं
रक्षा और एयरोस्पेस मामलों के जानकार मानते हैं कि सी-295 को लेकर चल रही बहस को सिर्फ “स्वदेशी या विदेशी” के संकरे नजरिये से देखना सही नहीं है। पूर्व डीआरडीओ वैज्ञानिक और रक्षा मामलों के लेखक रवि कुमार गुप्ता का कहना है कि आज के दौर में कोई भी आधुनिक सैन्य विमान ऐसा नहीं है, जिसके सभी पुर्जे एक ही देश में बनते हों। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि चाहे सी-295 हो या राफेल, इनके कॉम्पोनेंट्स भी कई देशों में तैयार होते हैं। ऐसे में किसी एक प्रोजेक्ट को निशाना बनाकर स्वदेशीकरण पर सवाल उठाना व्यावहारिक सोच नहीं है। (Made in India C-295 aircraft)
रवि कुमार गुप्ता ने यह भी याद दिलाया कि तेजस लड़ाकू विमान का मूल उद्देश्य 1950 के दशक के आयातित मिग-21 विमानों को बदलना था, जिन्हें लंबे समय तक “फ्लाइंग कॉफिन” कहा गया। उनके मुताबिक, आज का तेजस एमके-1 उन पुराने मिग-21 विमानों से कई गुना बेहतर, ज्यादा ताकतवर और कहीं ज्यादा सुरक्षित है। उनका कहना है कि अगर रक्षा मंत्रालय ने जनवरी 2001 में तेजस की पहली उड़ान के बाद ही 600 से 1000 विमानों का बड़ा ऑर्डर दे दिया होता, तो न केवल कई कीमती जानें बचाई जा सकती थीं, बल्कि भारत की एयरोस्पेस इंडस्ट्री भी कहीं ज्यादा मजबूत स्थिति में होती। इससे भारतीय वायु सेना को स्क्वॉड्रन की कमी जैसी समस्याओं का भी सामना नहीं करना पड़ता। (Made in India C-295 aircraft)
इसी संदर्भ में विशेषज्ञ मानते हैं कि मेड-इन-इंडिया सी-295 सिर्फ एक नया विमान शामिल करने का मामला नहीं है। यह भारत को वैश्विक एयरोस्पेस इकोसिस्टम के भीतर मजबूती से स्थापित करता है और उसे सप्लायर्स के दबाव या आपूर्ति रोकने जैसी रणनीतियों से बाहर निकालता है। यह बदलाव भारत की रणनीतिक सोच और रक्षा आत्मनिर्भरता दोनों के लिए अहम माना जा रहा है। (Made in India C-295 aircraft)
खरीदार से भागीदार बनने की दिशा में भारत
सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी, इस पूरे घटनाक्रम को “इंडस्ट्रियल जियोपॉलिटिक्स ऐट स्केल” बताते हैं। उनके अनुसार, सी-295 परियोजना भारत की भूमिका को खरीदार से आगे बढ़ाकर डिफेंस पार्टनर में बदल रही है। उन्होंने कहा कि वडोदरा से सितंबर 2026 तक पहले मेड-इन-इंडिया सी-295 का रोलआउट होना इसी बदलाव का प्रतीक है।
रक्षा जानकारों का कहना है कि यह पहली बार है जब भारत में किसी सैन्य परिवहन विमान का बड़े पैमाने पर निर्माण हो रहा है। दशकों तक भारत ऐसे विमानों के लिए आयात पर निर्भर रहा, वह भी बिना तकनीक हस्तांतरण और स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग के। सी-295 इस परंपरा को तोड़ता है और देश को डिजाइन, निर्माण और रखरखाव की दिशा में आत्मनिर्भर बनाता है। (Made in India C-295 aircraft)
आज के समय में जब पहाड़ों, द्वीपों और समुद्री क्षेत्रों में तेजी से सैनिक और संसाधन पहुंचाना बेहद जरूरी हो गया है, तब एयर मोबिलिटी की भूमिका और भी अहम हो जाती है। ऐसे में भारत की यह क्षमता कि वह अपने परिवहन विमानों को खुद बना सके और उन्हें लंबे समय तक ऑपरेट व मेंटेन कर सके, देश की डिटरेंस क्रेडिबिलिटी को मजबूत करती है। खासकर ऐसे पड़ोसियों के बीच, जहां आपूर्ति बाधित करना भी एक रणनीति के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है।
कुल मिलाकर, सी-295 परियोजना को सिर्फ असेंबली लाइन तक सीमित करके देखना सही नहीं होगा। यह भारत के लिए डिपेंडेंस से लीवरेज की ओर बढ़ने का संकेत है। रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम भारत को धीरे-धीरे असेंबली से आगे ले जाकर सॉवरेन कैपेबिलिटी की दिशा में स्थापित करता है, जहां देश न केवल अपनी जरूरतें पूरी करता है, बल्कि भविष्य में वैश्विक रक्षा बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी भी बन सकता है। (Made in India C-295 aircraft)
एयरोस्पेस हब बनने की ओर भारत
‘मेक इन इंडिया’ के तहत, 2040 तक भारत का एयरोस्पेस सेक्टर 100 बिलियन डॉलर का हो सकता है, जिसमें सी-295 जैसे प्रोजेक्ट निर्यात को 20-30% बढ़ा देंगे। वहीं, सी-295 प्रोजेक्ट अकेला नहीं है। इसके साथ-साथ भारत में एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग को लेकर काफी काम हो रहा है। अडानी ग्रुप और एम्ब्राएर मिलकर 70 से 146 सीट वाले कमर्शियल विमानों के लिए असेंबली लाइन लगाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए गुजरात और आंध्र प्रदेश को चुना जा सकता है। इसके अलावा टाटा और एयरबस की साझेदारी पहले से ही एयरबस ए320 के लिए दो फाइनल असेंबली लाइन भी बना रहे हैं।
सरकार भी छोटे विमानों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक नई पीएलआई स्कीम पर विचार कर रही है, जिसमें अगले छह सालों के लिए हजारों करोड़ रुपये के इंसेंटिव दिए जा सकते हैं। मकसद यह है कि भारत सिर्फ स्क्रू-ड्राइवर असेंबली नहीं, बल्कि पूरा मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम खड़ा करे। (Made in India C-295 aircraft)
रोजगार, स्किल और सप्लाई चेन पर असर
सी-295 परियोजना से भारत में हजारों नई नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है। इससे 18,000 से ज्यादा नौकरियां पैदा होंगी और लोकल सप्लाई चेन मजबूत होगी। इसके साथ ही लोकल सप्लाई चेन, इंजीनियरिंग स्किल्स और मेंटेनेंस कैपेबिलिटी को भी मजबूती मिलेगी। आने वाले वर्षों में भारत न सिर्फ इन विमानों का निर्माण करेगा, बल्कि उनके मेंटेनेंस और अपग्रेड का काम भी खुद कर सकेगा। रक्षा जानकारों का मानना है कि यह मॉडल भविष्य में दूसरे सैन्य विमानों और हेलीकॉप्टर प्रोजेक्ट्स के लिए भी रास्ता खोल सकता है। (Made in India C-295 aircraft)



