📍नई दिल्ली | 28 Jan, 2026, 5:23 PM
HAL UAC Superjet 100 India: भारत के सिविल एविएशन सेक्टर के लिए अच्छी खबर है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और रूस की सरकारी एयरोस्पेस कंपनी यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (UAC) के बीच एक अहम समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत भारत में सुपरजेट-100 पैसेंजर एयरक्राफ्ट के लाइसेंस्ड प्रोडक्शन पर मिलकर काम किया जाएगा। इससे एक दिन पहले ही ब्राजील की जानी-मानी ग्लोबल एयरोस्पेस कंपनी एम्ब्रेयर और अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के बीच एक अहम एमओयू पर दस्तखत किए गए। इस समझौते का मकसद भारत में इंटीग्रेटेड रीजनल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट इकोसिस्टम तैयार करना है।
यह डील विंग्स इंडिया 2026 इवेंट के दौरान साइन हुई और इसे भारत में कमर्शियल पैसेंजर विमान निर्माण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। (HAL UAC Superjet 100 India)
HAL UAC Superjet 100 India: क्या है सुपरजेट-100
सुपरजेट-100 एक रीजनल पैसेंजर जेट है, जिसे खास तौर पर छोटे और मध्यम दूरी के रूट्स के लिए डिजाइन किया गया है। इस विमान में करीब 87 से 108 यात्री सफर कर सकते हैं और इसकी रेंज लगभग 3,500 से 4,000 किलोमीटर तक है।
भारत जैसे देश में, जहां टियर-2 और टियर-3 शहरों के बीच हवाई कनेक्टिविटी तेजी से बढ़ रही है, ऐसे रीजनल जेट की मांग आने वाले समय में और बढ़ सकती है। (HAL UAC Superjet 100 India)
सर्टिफिकेशन और वैलिडेशन में मदद करेगा एचएएल
इस समझौते के मुताबिक, एचएएल भारत में सुपरजेट-100 के प्रोडक्शन, सेल्स और मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल यानी एमआरओ से जुड़ी जिम्मेदारी संभालेगा। साथ ही, एचएएल भारत में इस विमान के लिए डीजीसीए सर्टिफिकेशन और वैलिडेशन की प्रक्रिया में भी अहम भूमिका निभाएगा।
शुरुआत में भारत में असेंबली से काम शुरू किया जा सकता है, जिसे आगे चलकर फुल प्रोडक्शन तक ले जाने की संभावना है। (HAL UAC Superjet 100 India)
UAC देगी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर
रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन इस प्रोजेक्ट में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, डिजाइन सपोर्ट, प्रोडक्शन फैसिलिटी अपग्रेड और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद उपलब्ध कराएगी। भारत में बनने वाला सुपरजेट-100 वर्जन पूरी तरह रूसी कंपोनेंट्स पर आधारित होगा, जिससे यह पश्चिमी प्रतिबंधों से प्रभावित नहीं होगा। इस विमान में पीडी-8 इंजन और रूसी एवियोनिक्स का इस्तेमाल किया जाएगा। (HAL UAC Superjet 100 India)

भारत के लिए क्यों है यह डील अहम
भारत में पिछले कई दशकों से कोई भी कमर्शियल पैसेंजर जेट नहीं बना है। 1980 के दशक में एवरो एयरक्राफ्ट के बाद यह पहला मौका होगा जब भारत दोबारा पैसेंजर जेट निर्माण की दिशा में आगे बढ़ेगा।
यह प्रोजेक्ट आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसे अभियानों को मजबूती देगा। इसके साथ ही एयरोस्पेस सेक्टर में स्किल्ड नौकरियों के नए अवसर पैदा होंगे और भारत को ग्लोबल एविएशन सप्लाई चेन में जगह मिल सकती है। (HAL UAC Superjet 100 India)
सिविल एविएशन पर एचएएल कर रहा फोकस
एचएएल के सीएमडी डॉ. डी.के. सुनील पहले ही कह चुके हैं कि आने वाले 10 सालों में कंपनी अपने कुल टर्नओवर का करीब एक-चौथाई हिस्सा सिविल एविएशन से हासिल करना चाहती है। इसी दिशा में नासिक या कानपुर यूनिट में सिविल एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। (HAL UAC Superjet 100 India)


