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ओवरलोडेड डंपर से टूटा अहम रणनीतिक पुल, BRO ने 14 घंटे में जोड़ी चिनाब घाटी की लाइफलाइन

खासतौर पर सर्दियों के मौसम में, जब भारी बर्फबारी के कारण अन्य संपर्क मार्ग बंद हो जाते हैं, तब यही सड़क किश्तवाड़ के कई दूरदराज और बर्फ से ढके इलाकों के लिए एकमात्र ऑल-वेदर लाइफलाइन बन जाती है...

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📍किश्तवाड़, जम्मू | 20 Jan, 2026, 11:31 PM

BRO Ghalar Sansari road restoration: जम्मू-कश्मीर के दुर्गम पहाड़ी जिले किश्तवाड़ में एक बार फिर सीमा सड़क संगठन यानी बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) ने अपनी तेज कार्यशैली और इंजीनियरिंग क्षमता का शानदार उदाहरण पेश किया है। गलहर-संसारी मार्ग पर अचानक एक बेली ब्रिज के ढह जाने के बाद बीआरओ ने रिकॉर्ड समय में इस रणनीतिक मार्ग पर यातायात दोबारा बहाल कर दिया। यह पूरा काम 14 घंटे से भी कम समय में पूरा कर लिया गया, जबकि मौसम बेहद खराब और हालात चुनौतीपूर्ण थे।

BRO Ghalar Sansari road restoration: चिनाब घाटी को हिमाचल प्रदेश से जोड़ता है यह रास्ता

यह घटना उस समय हुई, जब एक ओवरलोडेड डंपर गलहर-संसारी सड़क पर बने बेली ब्रिज से गुजर रहा था। अधिक वजन के कारण पुल अचानक ढह गया, जिससे इस मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। यह मार्ग चिनाब घाटी को हिमाचल प्रदेश से जोड़ने वाला एक बेहद अहम और रणनीतिक रास्ता है। खासतौर पर सर्दियों के मौसम में, जब भारी बर्फबारी के कारण अन्य संपर्क मार्ग बंद हो जाते हैं, तब यही सड़क किश्तवाड़ के कई दूरदराज और बर्फ से ढके इलाकों के लिए एकमात्र ऑल-वेदर लाइफलाइन बन जाती है। (BRO Ghalar Sansari road restoration)

पुल के ढहने की सूचना मिलते ही बीआरओ की टीम बिना समय गंवाए मौके पर पहुंच गई। प्रोजेक्ट संपर्क के तहत काम कर रही 35 बॉर्डर रोड्स टास्क फोर्स (बीआरटीएफ) की 118 रोड कंस्ट्रक्शन कंपनी (आरसीसी) के इंजीनियरों और जवानों ने तुरंत रेस्क्यू और बहाली का काम शुरू कर दिया। उस समय इलाके में कड़ाके की ठंड, तेज हवाएं और बेहद कम तापमान था, लेकिन इसके बावजूद टीम ने पूरी रात काम किया। (BRO Ghalar Sansari road restoration)

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इस ऑपरेशन का नेतृत्व 118 आरसीसी के ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट कर्नल जिवितेश रजोरा ने किया। सबसे पहले मौके पर पहुंचकर पुल की जांच की। इसके बाद भारी इंजीनियरिंग मशीनरी को युद्ध स्तर पर तैनात किया गया। बीआरओ की टीम ने रातों-रात एक अस्थायी डायवर्शन तैयार किया, ताकि यातायात को जल्द से जल्द दोबारा शुरू किया जा सके। इसके साथ-साथ एक अतिरिक्त सुरक्षित डायवर्शन की तैयारी का काम भी समानांतर रूप से शुरू कर दिया गया। (BRO Ghalar Sansari road restoration)

BRO Ghalar Sansari road restoration

बीआरओ की इस तेज कार्रवाई का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि गुलाबगढ़, संसारी और आसपास के गांवों का संपर्क पूरी तरह से कटने से बच गया। अगर समय रहते यह रास्ता नहीं खोला जाता, तो इन इलाकों में रहने वाले लोगों को जरूरी राशन, दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता। साथ ही सैन्य और प्रशासनिक आवाजाही भी प्रभावित होती। (BRO Ghalar Sansari road restoration)

इस बहाली अभियान के दौरान बीआरओ ने मानवीय पहलू का भी पूरा ध्यान रखा। रास्ते में फंसे यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए मौके पर ही रिफ्रेशमेंट और जरूरी मदद उपलब्ध कराई गईं। स्थानीय निवासियों और यात्रियों ने बीआरओ के जवानों की तारीफ करते हुए कहा कि इतनी कठिन परिस्थितियों में इतनी तेजी से काम होना अपने-आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

बीआरओ का कहना है कि पुल ढहने की इस घटना के लिए ओवरलोडिंग जिम्मेदार है। ऐसे में भविष्य में निर्धारित लोड लिमिट और ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल अस्थायी डायवर्शन के जरिए नियंत्रित तरीके से यातायात चलाया जा रहा है, जबकि पुल की स्थायी मरम्मत और मजबूत संरचना के निर्माण का काम भी साथ-साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। (BRO Ghalar Sansari road restoration)

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पूरे ऑपरेशन की निगरानी 35 बीआरटीएफ (उधमपुर) के कमांडर एसके सिंह ने की। उनकी देखरेख में यह सुनिश्चित किया गया कि सुरक्षा, गुणवत्ता और समय – तीनों पर कोई समझौता न हो।

बीआरओ का आदर्श वाक्य “श्रमेण सर्वं साध्यम”, यानी मेहनत से सब कुछ संभव है, इस पूरे ऑपरेशन में पूरी तरह साकार होता दिखाई दिया। गलहर-संसारी एक्सिस की बहाली एक बार फिर यह साबित करती है कि बीआरओ देश के सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण इलाकों में भी संपर्क बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। ऊंचे पहाड़, खराब मौसम और सीमित संसाधनों के बावजूद बीआरओ लगातार यह दिखाता आया है कि उसके लिए कोई भी काम असंभव नहीं है। (BRO Ghalar Sansari road restoration)

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