📍इस्लामाबाद/क्वेटा | 7 Oct, 2025, 1:15 PM
Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में आतंक एक बड़ा खुलासा सामने आया है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) ने मीर शफीक-उर-रहमान मेंगल नाम के एक कुख्यात कबायली नेता को आईएसआईएस (इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड सीरिया) और आईएसकेजेपी (इस्लामिक स्टेट खोरासान प्रोविंस) के लिए हथियारों और लॉजिस्टिक सप्लाई का कॉर्डिनेटर नियुक्त किया है।
मीर शफीक खुजदारजिले का एक प्रभावशाली कबायली नेता है, जो लंबे समय से पाकिस्तानी आईएसआई का नजदीकी माना जाता है। खुफिया सूत्रों ने बताया कि उसे लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, आईएसआईएस और दाएश यानी “अल-दौला अल-इस्लामिया फिल-इराक वाल-शाम” जैसे संगठनों को बलूचिस्तान में एक साथ लाने की गुप्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह नियुक्ति उस समय की गई जब बलूचिस्तान में पााकिस्तान की सेना लगातार हिंसा कर रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, शफीक को आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने, भर्ती अभियान चलाने, सुरक्षित ठिकानों की व्यवस्था करने और लॉजिस्टिक सप्लाई चैन को संभालने का काम सौंपा गया है।
मीर शफीक का नाम पहले भी हिंसा, गुमशुदगियों और कथित डेथ स्क्वाड्स से भी जुड़ा रहा है। 2008 में जब पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान में ‘किल एंड डंप’ नीति लागू की, तब आईएसआई ने स्थानीय मिलिशिया गठित की। इन्हीं दिनों शफीक को खुजदारमें एक ब्रिगेडियर ने भर्ती किया और उसे “एसेट” घोषित किया गया। उन्होंने बलूच मुसल्लाह डिफ़ा तंजीम नामक मिलिशिया बनाई, जिसने अपहरण, यातनाएं और सामूहिक हत्याओं को अंजाम दिया। 2011 में तोटक गांव में सेना के ऑपरेशन के बाद उसे वहां का कंट्रोल भी सौंपा गया। इसी दौरान 82 वर्षीय मोहम्मद राहिम खान कलंदरानी और उनके परिवार के 16 सदस्यों का अपहरण हुआ और बाद में कई शव सामूहिक कब्रों में पाए गए।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान के जनरल हेडक्वार्टर ने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और दूसरे जिहादी संगठनों को बलूचिस्तान में एक साझा प्लेटफॉर्म पर लाकर संगठित किया है। इन संगठनों को न केवल बलूचिस्तान में स्वतंत्रता आंदोलन को दबाने के लिए बल्कि अफगानिस्तान, भारत और अन्य पड़ोसी क्षेत्रों में अस्थिरता फैलाने के लिए तैयार किया जा रहा है।
Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan
Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan मीर शफीक का आईएसआईएस से जुड़ाव भी नया नहीं है। 2016 में सिंध के शिकारपुर में पकड़े गए एक आत्मघाती हमलावर उस्मान ब्रोही ने कबूल किया कि उसे शफीक के शिविर में आईएसआईएस के लिए ट्रेनिंग दी गई गई थी। उसी साल आईएसआईएस ने बलूचिस्तान में अपनी मौजूदगी का ऐलान किया और शफीक को अपना खासमखास बताया। 2017 में रॉयटर्स को दिए एक साक्षात्कार में एक पाकिस्तानी लड़के ने बताया कि वह वाध इलाके में शफीक के ट्रेनिंग कैंप में प्रशिक्षण ले रहा था। सितंबर 2025 में क्वेटा के शाहवानी स्टेडियम में हुए आईएसकेजेपी आत्मघाती हमले में 15 लोगों की मौत हुई। इस हमले के पीछे भी शफीक का नेटवर्क सक्रिय था।
खुफिया रिपोर्टों का दावा है कि पाकिस्तान बलूचिस्तान को एक “कंट्रोल्ड कॉन्फ्लिक्ट जोन” में तब्दील कर रहा है। उद्देश्य यह है कि इस क्षेत्र में स्थायी सैन्य उपस्थिति बनाए रखी जाए, पश्चिमी देशों से आतंकवाद-रोधी मदद ली जाए और सारी हिंसा का दोष आईएसआईएस पर डालकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “डिनाएबिलिटी” बरकरार रखी जाए। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की खुफिया Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan एजेंसियों की योजनाा है कि निकट भविष्य में होने वाले कुछ धमाकों को आईएसआईएस के नाम पर किया जाए।
बलूच वॉयस फॉर जस्टिस जैसे संगठनों ने आरोप लगाया है कि मीर शफीक पिछले दो दशकों से आईएसआई के संरक्षण में इस क्षेत्र में चरमपंथी नेटवर्क चला रहे हैं। सरदार अख्तर मेंगल ने भी जुलाई 2023 में उन पर अपने घर पर मोर्टार हमला करने का आरोप लगाया था।
मीर शफीक के पिता नसीर मेंगल बलूचिस्तान के अंतरिम मुख्यमंत्री रहे थे, जबकि उनके भाई अत्ता-उर-रहमान मेंगल को जून 2025 में बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने मार गिराया। बीएलए ने इसे “राज्य-प्रायोजित डेथ स्क्वाड” के खिलाफ कार्रवाई बताया। जुलाई 2023 में वाध में उसके समर्थकों और बीएनपी-एम के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प में चार लोग मारे गए थे।
शफीक की नियुक्ति को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। सोशल मीडिया एक्स पर अफगान और भारतीय यूजर्स का कहना है कि यह पाकिस्तान की “हाइब्रिड वॉरफेयर” रणनीति है। उनका कहना है कि आईएसआई ईरान और अफगानिस्तान को अस्थिर करने के लिए ऐसे संगठनों को औजार के तौर पर इस्तेमाल कर रही है। यूरेशिया रिव्यू की रिपोर्ट में कहा गया कि आईएसकेजेपी अब बलूच राष्ट्रवादियों को निशाना बना रहा है और इसमें आईएसआई का सीधा हाथ है।
मीर शफीक ने लाहौर के एलीट एचिसन कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने एक दाओबंदी मदरसे में दाखिला लिया, जहां वह लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा। 2020 में उसे इस्लामाबाद बुलाकर नई जिम्मेदारी दी गई। इसके कुछ ही महीनों बाद उसने क्वेटा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसने स्थानीय राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। जेम्सटाउन फाउंडेशन ने अपनी रिपोर्ट में उसे “पाकिस्तान का सबसे घातक मर्सनरी लीडर” बताया।
अमेरिका, यूएई और अन्य देशों ने आईएसआईएस की पाकिस्तान में गतिविधियों पर और Mir Shafiq ISIS Logistics Pakistan चिंता जताई है। बलूचिस्तान पोस्ट ने शफीक को “राज्य का घातक हथियार” करार दिया। क्षेत्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि आईएसआई के संरक्षण में पनप रहा यह नेटवर्क न केवल बलूचिस्तान बल्कि पूरे ईरान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान त्रिकोण क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।



