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INS Androth Commissioning: भारतीय नौसेना में सोमवार को शामिल होगा आईएनएस अंद्रोथ, दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगा कर करेगा तबाह

आईएनएस अंद्रोथ अर्नाला क्लास की है, जिसका नाम लक्षद्वीप के अंद्रोथ द्वीप के नाम पर रख गया है। यह पुराने पुरानी अभय-क्लास कोरवेट्स की जगह लेगी। इसकी लंबाई 77.6 मीटर और चौड़ाई 10.5 मीटर की है। इसका डिस्प्लेसमेंट 900 टन और ग्रॉस टनेज 1,490 टन है...

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📍नई दिल्ली | 5 Oct, 2025, 9:46 PM

INS Androth Commissioning: नौसेना 6 अक्टूबर को विशाखापट्टनम के नेवल डॉकयार्ड में आईएनएस अंद्रोथ को कमीशन करने जा रही है। यह दूसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट होगा, जिसे नौसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा। नौसेना के ईस्टर्न नेवल कमांड के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल राजेश पेंढरकर इसे नेवी को समर्पित करेंगे।

Indian Navy Androth: समंदर में एंटी-सबमरीन वॉरफेयर को मिलेगी मजबूती, इस दिन भारतीय नौसेना में शामिल होगा अंद्रोथ 

INS Androth Commissioning होना से भारतीय नौसेना की क्षमताओं में बढ़ोतरी होगी। पिछले कुछ महीनों में नौसेना के बेड़े में कई अत्याधुनिक युद्धपोतों को शामिल किया गया है। इससे पहले इस साल 18 जून को भारतीय नौसेना को पहली एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट आईएनएस अर्नाला कमीशन की गई थी।

आईएनएस अंद्रोथ को कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने बनाया है, जिसमें में 80 फीसदी से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। वहीं, आईएनएस अंद्रोथ के शामिल होने से विशेष रूप से तटीय क्षेत्रों में भारतीय नौसेना की एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी। इससे पहले गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स ने पहली एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट आईएनएस अर्नाला को भी बनाया था।

हाल के महीनों में भारतीय नौसेना ने अर्नाला, निस्तार, उदयगिरी और नीलगिरि जैसे कई एडवांस वॉरशिप्स को अपने बेड़े में शामिल किया है। अब अंद्रोथ के जुड़ने के बाद नौसेना समुद्री अभियानों के पूरे स्पेक्ट्रम में संतुलित दिशा में आगे बढ़ रही है। आईएनएस अंद्रोथ के कमीशन होने के बाद नौसेना की ऑपरेशनल और स्ट्रैटेजिक क्षमताओं को मजबूत मिलेगी।

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INS Androth Commissioning क्लास की है, जिसका नाम लक्षद्वीप के अंद्रोथ द्वीप के नाम पर रख गया है। यह पुराने पुरानी अभय-क्लास कोरवेट्स की जगह लेगी। इसकी लंबाई 77.6 मीटर और चौड़ाई 10.5 मीटर की है। इसका डिस्प्लेसमेंट 900 टन और ग्रॉस टनेज 1,490 टन है। 57 सदस्यों (7 अधिकारी सहित) के चालक दल वाली यह वाटर क्राफ्ट डीजल इंजन-वॉटरजेट प्रोपल्जन सिस्टम से ऑपरेट होती है। इसकी अधिकतम रफ्तार 25 नॉट्स है और 14 नॉट्स की स्पीड पर 1,800 नॉटिकल मील तक ऑपरेट कर सकती है। यह शैलो वाटर यानी उथले जल में ऑपरेशन के लिए डिजाइन की गई है।

इसमें एडवांस सोनार सिस्टम लगाया गया है, जिसमें हल-माउंटेड सोनार ‘अभय’ और लो-फ्रीक्वेंसी वेरिएबल डेप्थ सोनार शामिल हैं। हथियारों में लाइटवेट टॉरपीडोज, स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर रॉकेट्स, 30 मिमी नेवल गन और दो 12.7 मिमी स्टेबलाइज्ड रिमोट कंट्रोल्ड गन शामिल हैं। साथ ही इसमें महिंद्रा डिफेंस का इंटीग्रेटेड एंटी-सबमरीन वॉरफेयर डिफेंस सूट लगा है, जो डिकॉय सिस्टम के रूप में काम करता है।

INS Androth Commissioning

यह शिप शैलो वाटर में पनडुब्बियों की डिटेक्शन, ट्रैकिंग और न्यूट्रलाइजेशन में सक्षम है। इसके अलावा यह समुद्री निगरानी, सर्च एंड रेस्क्यू, तटीय रक्षा, माइन बिछाने और लिटोरल जोन में सब-सर्फेस सर्विलांस में अहम भूमिका निभा सकती है। 13,440 करोड़ रुपये की लागत वाली 16 नावों की इस परियोजना को कोलकाता स्थित जीआरएसई और सीएसएल द्वारा बनाया जा रहा है। यह भारतीय महासागर क्षेत्र में चीनी और पाकिस्तानी पनडुब्बी खतरों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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