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Zorawar Tank: क्या सेना ने रिजेक्ट कर दिया है स्वदेशी जोरावर टैंक? ट्रायल्स को लेकर सेना प्रमुख ने दी बड़ी जानकारी

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📍नई दिल्ली | 13 Jan, 2025, 6:22 PM

Zorawar Tank: पिछले साल दिसंबर में भारतीय सेना के स्वदेशी लाइट टैंक (ILT) ने लद्दाख के न्योमा इलाके में 4200 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया था। उस समय रक्षा मंत्रालय की तरफ से कहा गया था कि इस टैंक ने विभिन्न रेंज से गोले दागे और हर बार सटीक निशाना लगाया। लेकिन अब सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने जोरावर टैंक को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा है कि सेना ने लगभग 354 टैंकों को शामिल करने की योजना बनाई है। इन टैंकों के लिए जनवरी 2023 में ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (Acceptance of Necessity – AON) दी गई थी।

Zorawar Tank: Army Plans 354 Units, Trials Underway with Improvements in Progress

354 Zorawar Tank को शामिल करने की योजना

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सेना ने लगभग 354 टैंकों को शामिल करने की योजना बनाई है। इन टैंकों के लिए जनवरी 2023 में ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (Acceptance of Necessity – AON) दी गई थी। इसके बाद अप्रैल 2023 में 17,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजना के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया गया।

उन्होंने कहा कि सेना इस परियोजना को दो चरणों में पूरा करना चाहती है। पहले चरण में 59 टैंकों का निर्माण डीआरडीओ की पहल के तहत होगा, जबकि 295 टैंक ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बनाए जाएंगे।

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‘तथाकथित जोरावर’ में कुछ सुधारों का सुझाव

जोरावर लाइट टैंक ने 4,200 मीटर से अधिक ऊंचाई पर विभिन्न रेंज पर गोले दागे और हर बार सटीक निशाना साधा।  इस टैंक ने लद्दाख की दुर्गम पहाड़ियों में सफलतापूर्वक ट्रायल्स पूरे किए हैं। सेना प्रमुख ने बताया कि इन ट्रायल्स से प्राप्त अनुभव के आधार पर ‘तथाकथित ज़ोरावर’ में कुछ सुधारों का सुझाव दिया गया है। वर्तमान में टैंक को चेन्नई वापस लाया जा रहा है, जहां इन सुधारों पर काम किया जाएगा। सुधार के बाद इसे नए चरण के परीक्षणों के लिए तैयार किया जाएगा।

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सैन्य सूत्रों के मुताबिक टैंक को चेन्नई भेजा गया है, जहां उसमें कुछ जरूरी सुधार किए जाने हैं। इसमें वक्त लग सकता है। जिसके चलते भारतीय सेना में इसे शामिल करने में अभी और देरी हो सकती है। पहले कहा जा रहा था कि अगर इसके सभी परीक्षण सफल हुए तो जोरावर को 2027 तक सेना में शामिल किया जा सकता है। लेकिन अब इसमें और देरी हो सकती है।

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क्या कहा था सेना प्रमुख ने?

जहां तक ज़ोरावर लाइट टैंक का सवाल है, हम शुरुआत में लगभग 354 टैंकों के साथ शुरुआत करना चाहते हैं और जनवरी 2023 में हमने AON (आवश्यकता की स्वीकृति) दी है, जिसके लिए अप्रैल 2023 में रुचि की अभिव्यक्ति (expression of interest) दी गई थी और यह राशि 17 हज़ार करोड़ से अधिक थी। इसलिए अब तक हम मेक-1 के हिस्से के रूप में 295 और DRDO पहल के हिस्से के रूप में 59 पर विचार कर रहे हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि कुछ वेंटरंस ने हाथ मिलाया है और हमने हल्के टैंक ‘तथाकथित ज़ोरावर’ की झलक देखी है और यह पहले से ही उच्च ऊंचाई पर परीक्षण कर रहा है और मैंने इस पर काम कर रहे महानिदेशक से बात की है और आज जब हम बात कर रहे हैं, तो इसने चेन्नई की यात्रा शुरू कर दी है और इन ट्रायल्स के दौरान जिस तरह के सुधारों का सुझाव दिया गया है, हम इसके नए वर्जन में देखेंगे। उसके बाद हम इसके और ट्रायल्स करेंगे।

जनरल जोरावर सिंह के सम्मान में रखा नाम

जोरावर लाइट टैंक को खास तौर पर ऊंचाई वाले क्षेत्रों और कठिन इलाकों के लिए डिजाइन किया गया है। यह टैंक न केवल हल्का है, बल्कि ऊंचाई पर भी सटीकता और दमखम के साथ काम करने में सक्षम है।

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इस टैंक का नाम जनरल जोरावर सिंह के सम्मान में रखा गया है, जिन्होंने 19वीं सदी में लद्दाख, तिब्बत और गिलगित-बाल्टिस्तान में अद्भुत सैन्य विजय हासिल की थी। यह टैंक आधुनिक युद्ध के मानकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिसमें गतिशीलता, मारक क्षमता और सुरक्षा का संतुलन शामिल है।

जोरावर लाइट टैंक का पहला प्रोटोटाइप जुलाई 2024 में एलएंडटी के हजीरा मैन्युफैक्चरिंग डिवीजन में पेश किया गया था। यह प्रोटोटाइप जोरावर टैंक प्रोजेक्ट को स्वीकृति मिलने के केवल 19 महीनों के भीतर तैयार किया गया। पहले प्रोटोटाइप ने लद्दाख की बर्फीली चोटियों और राजस्थान के बीकानेर के पास महाजन फील्ड फायरिंग रेंज रेगिस्तान में फायरिंग टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। इसके अलावा, दूसरे प्रोटोटाइप का निर्माण जारी है ताकि सेना के फीडबैक के आधार पर बदलाव किए जा सकें।

वहीं, इसके दूसरे प्रोटोटाइप का निर्माण वर्तमान में प्रगति पर है, जो इस परियोजना की विकास प्रक्रिया को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे भारतीय सेना को टैंक के डिजाइन में सुधार करने और पहले प्रोटोटाइप से प्राप्त फीडबैक के आधार पर आवश्यक बदलाव लागू करने का अवसर मिलेगा।

चीन ने तैनात किया हल्का टैंक ZTQ-15

2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हुई झड़प के बाद से भारत ने अपनी सीमा पर सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने का काम तेज कर दिया है। चीन ने एलएसी (वास्तविक नियंत्रण रेखा) पर अपने हल्के टैंक ZTQ-15 तैनात किए हैं। जोरावर टैंक को इन्हीं चीनी टैंकों का मुकाबला करने के लिए डिजाइन किया गया है।

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जोरावर टैंक को लद्दाख, सियाचिन और अन्य दुर्गम क्षेत्रों में तैनात करने की योजना है, ताकि भारत की सीमाएं अधिक सुरक्षित हो सकें।

Zorawar Tank की खासियतें

जोरावर टैंक को हल्के वजन और दमदार प्रदर्शन के लिए तैयार किया गया है।

  • लगभग 25 टन, जो इसे ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात करने के लिए आदर्श बनाता है।
  • 105 मिमी की गन, एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल और मॉड्यूलर एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर।
  • ड्रोन इंटीग्रेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एंटी-एयरक्राफ्ट गन से लैस।
  • इसे एयरक्राफ्ट, रेल और सड़क मार्ग से आसानी से तैनात किया जा सकता है।
  • डीआरडीओ ने तैयार किया है माउंटेन टैंक ‘जोरावर’
  • इसे चलाने के लिए सिर्फ तीन लोगों की जरूरत होती है.

जोरावर लाइट टैंक को लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) और डीआरडीओ ने “मेक इन इंडिया” पहल के तहत तैयार किया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी सक्रिय सुरक्षा प्रणाली (Active Protection System) है, जो इसे एंटी-टैंक मिसाइलों और अन्य खतरों से बचाने में सक्षम बनाती है।

इसके अलावा, जोरावर टैंक अम्फीबियस क्षमता से लैस है, यानी यह पानी और जमीन दोनों पर काम कर सकता है। यह विशेषता इसे पैंगोंग झील जैसे जलक्षेत्रों में तैनात करने के लिए आदर्श बनाती है। टैंक की इस अनूठी विशेषता से सेना को बहुस्तरीय लड़ाई के लिए बेहतर तैयारी मिलती है।

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  • Zorawar Tank: क्या सेना ने रिजेक्ट कर दिया है स्वदेशी जोरावर टैंक? ट्रायल्स को लेकर सेना प्रमुख ने दी बड़ी जानकारी

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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