📍नई दिल्ली | 13 Jan, 2026, 6:29 PM
Shaksgam Valley Dispute: शक्सगाम घाटी को लेकर भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने चीन के दावे को सिरे से खारिज करते हुए साफ कहा है कि शक्सगाम घाटी भारत का हिस्सा है और पाकिस्तान तथा चीन के बीच साल 1963 में हुआ सीमा समझौता पूरी तरह गलत और अवैध है। सेना प्रमुख ने कहा कि भारत इस क्षेत्र में चीन या पाकिस्तान की किसी भी गतिविधि को स्वीकार नहीं करता है।
सेना प्रमुख का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब चीन ने सार्वजनिक तौर पर यह दावा किया है कि शक्सगाम घाटी उसकी जमीन है और वहां सड़क, पुल और अन्य निर्माण परियोजनाएं पूरी तरह वैध हैं। भारत ने चीन के इस दावे को सीधे तौर पर चुनौती दी है। (Shaksgam Valley Dispute)
Shaksgam Valley Dispute: क्या कहा सेना प्रमुख ने
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि भारत की नीति बिल्कुल स्पष्ट है। शक्सगाम घाटी भारत की संप्रभु भूमि है और वहां किसी भी तरह की बाहरी गतिविधि को मान्यता नहीं दी जा सकती। उन्होंने दोहराया कि 1963 में पाकिस्तान और चीन के बीच हुआ सीमा समझौता भारत के लिए कभी भी स्वीकार्य नहीं रहा है।
General #UpendraDwivedi, Chief of the Army Staff, will brief the media on the Indian Army’s key achievements in 2025 and outline priorities for 2026.
Stay tuned for all the latest updates. @adgpi pic.twitter.com/viZlDfBMtR— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) January 13, 2026
सेना प्रमुख ने यह भी कहा कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी सीपीईसी और उसका नया चरण सीपीईसी 2.0 भी भारत की नजर में अवैध है। भारत इस परियोजना को इसलिए नहीं मानता क्योंकि इसका एक हिस्सा भारत की उस जमीन से होकर गुजरता है, जिस पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा कर रखा है। (Shaksgam Valley Dispute)
चीन जताता है अपना दावा
इससे पहले चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा था कि शक्सगाम घाटी चीन का हिस्सा है और वहां इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण करना चीन का अधिकार है। चीन का कहना है कि यह इलाका उसे पाकिस्तान के साथ 1960 के दशक में हुए सीमा समझौते के तहत मिला था।
चीन ने भारत की आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि यह दो संप्रभु देशों के बीच किया गया समझौता है। साथ ही चीन ने सीपीईसी परियोजना का भी बचाव किया और कहा कि इसका उद्देश्य क्षेत्र में विकास और कनेक्टिविटी बढ़ाना है।
भारत ने चीन के इन सभी दावों को स्पष्ट रूप से नकार दिया है। (Shaksgam Valley Dispute)
शक्सगाम घाटी को लेकर ये है भारत का कहना
भारत का कहना है कि साल 1947 में जम्मू-कश्मीर कानूनी रूप से भारत में शामिल हुआ था। इसके बाद पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के एक हिस्से पर जबरन कब्जा कर लिया। शक्सगाम घाटी उसी क्षेत्र का हिस्सा है।
भारत के अनुसार पाकिस्तान को इस क्षेत्र पर कोई कानूनी अधिकार नहीं था, इसलिए वह इसे किसी तीसरे देश को सौंप ही नहीं सकता था। इसी वजह से भारत ने 1963 के तथाकथित पाकिस्तान-चीन सीमा समझौते को कभी स्वीकार नहीं किया।
भारत आज भी शक्सगाम घाटी को अपने क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा मानता है और वहां चीन या पाकिस्तान द्वारा की जा रही किसी भी गतिविधि का लगातार विरोध करता रहा है। (Shaksgam Valley Dispute)
विदेश मंत्रालय ने भी दोहराया रुख
इस विवाद पर भारत के विदेश मंत्रालय ने भी सख्त रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि शक्सगाम घाटी भारत का हिस्सा है और भारत ने 1963 के तथाकथित सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं दी है।
उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के सभी क्षेत्र भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं। यह बात चीन और पाकिस्तान को कई बार आधिकारिक रूप से बताई जा चुकी है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत शक्सगाम घाटी में ज़मीनी हालात बदलने की किसी भी कोशिश का विरोध करता है और अपने हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।
शक्सगाम घाटी एक संवेदनशील इलाका है। इसके उत्तर में चीन का शिनजियांग क्षेत्र है, दक्षिण और पश्चिम में पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर और पूर्व में सियाचिन ग्लेशियर का क्षेत्र पड़ता है। यह इलाका सामरिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है।
भारत का कहना है कि इस इलाके में किसी भी तरह का इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण या सैन्य गतिविधि सीधे तौर पर उसकी सुरक्षा से जुड़ा मामला है। यही कारण है कि भारत सीपीईसी और उससे जुड़ी परियोजनाओं का लगातार विरोध करता रहा है। (Shaksgam Valley Dispute)
सीपीईसी को लेकर भारत की आपत्ति
भारत ने पहले भी साफ कहा है कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर एक अवैध परियोजना है। भारत का तर्क है कि यह परियोजना भारत की उस जमीन से होकर गुजरती है, जिस पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है।
भारत ने 9 जनवरी को भी शक्सगाम घाटी में सीपीईसी के तहत हो रहे निर्माण कार्यों को अवैध और अमान्य करार दिया था। (Shaksgam Valley Dispute)



