📍नई दिल्ली | 7 Jan, 2026, 7:23 PM
Indian Navy Training Deployment: भारतीय नौसेना की पहली ट्रेनिंग स्क्वाड्रन (1TS) दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए लॉन्ग रेंज ट्रेनिंग डिप्लॉयमेंट पर रवाना हो रही है। यह डिप्लॉयमेंट 110वें इंटीग्रेटेड ऑफिसर्स ट्रेनिंग कोर्स (IOTC) का अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य नौसेना के ऑफिसर ट्रेनीज को समुद्र में वास्तविक परिस्थितियों का व्यावहारिक अनुभव देना है। इस अभियान में भारतीय नौसेना के तीन जहाज और भारतीय तटरक्षक बल का एक जहाज शामिल हैं।
इस लॉन्ग रेंज ट्रेनिंग डिप्लॉयमेंट में आईएनएस तीर, आईएनएस शार्दुल, आईएनएस सुजाता और भारतीय तटरक्षक बल का आईसीजीएस सारथी शामिल हैं। ये सभी जहाज मिलकर ऑफिसर्स ट्रेनीज को मैरीटाइम नेविगेशन, ऑपरेशनल प्लानिंग, लॉजिस्टिक्स और इंटरनेशनल मैरीटाइम कोआपरेशन से जुड़ा अनुभव प्रदान करेंगे। यह यात्रा केवल ट्रेनिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच समुद्री संबंधों को और मजबूत करना भी है।
Indian Navy Training Deployment: सिंगापुर, इंडोनेशिया और थाईलैंड में पोर्ट कॉल
स्क्वाड्रन की इस यात्रा के दौरान सिंगापुर, इंडोनेशिया और थाईलैंड में पोर्ट कॉल किए जाएंगे। इन देशों के बंदरगाहों पर रुकने के दौरान मेजबान नौसेनाओं और समुद्री एजेंसियों के साथ प्रोफेशनल बातचीत, ट्रेनिंग इंगेजमेंट और सहयोगी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों के जरिए दोनों पक्षों के बीच आपसी समझ, भरोसा और समुद्र में साथ काम करने की क्षमता को बढ़ाया जाएगा।
पोर्ट विजिट्स के दौरान ऑफिसर्स ट्रेनीज स्ट्रक्चर्ड ट्रेनिंग एक्सचेंज में हिस्सा लेंगे, जहां नेविगेशन, कम्युनिकेशन, सेफ्टी प्रोसीजर्स और ऑपरेशनल बेस्ट प्रैक्टिसेज पर अनुभव साझा किया जाएगा। इसके साथ ही क्रॉस-डेक विजिट्स के माध्यम से ट्रेनीज को अन्य देशों के जहाजों की कार्यप्रणाली को नजदीक से देखने और समझने का अवसर मिलेगा। विषय विशेषज्ञों के साथ संवाद के जरिए समुद्री सुरक्षा, सर्च एंड रेस्क्यू और मानवीय सहायता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।
इस लॉन्ग रेंज ट्रेनिंग डिप्लॉयमेंट का एक अहम पहलू जॉइंट मैरीटाइम पार्टनरशिप एक्सरसाइज हैं। इन अभ्यासों के जरिए समुद्र में सामूहिक संचालन, तालमेल और इंटरऑपरेबिलिटी को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा। ऐसे अभ्यास भविष्य में किसी भी साझा समुद्री चुनौती से निपटने में उपयोगी साबित होते हैं।
110वें इंटीग्रेटेड ऑफिसर्स ट्रेनिंग कोर्स में इस बार छह अंतरराष्ट्रीय ऑफिसर ट्रेनीज भी शामिल हैं। यह भारत की उस नीति को दर्शाता है, जिसके तहत मित्र देशों के मिलिट्री पर्सनल को ट्रेनिंग देकर उनकी क्षमता बढ़ाने में सहयोग किया जाता है। इंटरनेशनल ट्रेनीज की मौजूदगी से इस डिप्लॉयमेंट को मल्टीनेशनल डाइमेंशन्स भी मिलता है और ट्रेनीज को अलग-अलग संस्कृतियों और कार्यशैलियों को समझने का अवसर मिलता है।
इस यात्रा में भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना के कुछ कर्मियों को भी जहाजों पर तैनात किया गया है। इससे तीनों सेनाओं के बीच जॉइंटनेस और आपसी कॉर्डिनेशन को बढ़ावा मिलेगा। समुद्री अभियानों में थल और वायु की भूमिका को समझना आधुनिक सैन्य प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
यह लॉन्ग रेंज ट्रेनिंग डिप्लॉयमेंट भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का हिस्सा है, जिसके तहत दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को मजबूत किया जा रहा है। समुद्री क्षेत्र में यह सहयोग एक मुक्त, खुले और समावेशी इंडियन ओशन रीजन की भारत की सोच को भी दर्शाता है।
भारतीय नौसेना के लिए इस तरह की ट्रेनिंग डिप्लॉयमेंट नई नहीं है, लेकिन हर बार इसका स्वरूप और दायरा और अधिक व्यापक होता जा रहा है। ऑफिसर ट्रनीज के लिए यह यात्रा समुद्र में लंबे समय तक ऑपरेशन, बदलते मौसम, अंतरराष्ट्रीय नियमों और विदेशी नौसेनाओं के साथ कॉर्डिनेशन जैसे पहलुओं को समझने का अवसर देती है।





