📍नई दिल्ली | 5 Jan, 2026, 10:38 AM
Arihant Class Submarine S4: भारत की अरिहंत क्लास की चौथी और आखिरी न्यूक्लियर-पावर्ड बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन यानी एस4 के नाम का खुलासा हो गया है। इसका नाम आईएनएस अरिसुदन रखे जाने की चर्चा हो रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस पनडुब्बी को पिछले साल 16 अक्टूबर को लॉन्च किया था। अब इसका औपचारिक नामकरण भारतीय नौसेना की तय प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।
Arihant Class Submarine S4: शिप-नेमिंग कमिटी करेगी सिफारिश
सूत्रों के मुताबिक इस सबमरीन का औपचारिक नामकरण भारतीय नौसेना की शिप-नेमिंग कमिटी की सिफारिश के बाद होगा। इसके बाद रक्षा मंत्रालय की मंजूरी ली जाएगी और अंत में राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद नाम को औपचारिक रूप से घोषित किया जाएगा। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो यह पनडुब्बी साल 2027 में भारतीय नौसेना में शामिल हो सकती है। (Arihant Class Submarine S4)
Arihant Class Submarine S4: अरिधमन का आखिरी सी-ट्रायल
अरिहंत क्लास की तीसरी पनडुब्बी आईएनएस अरिधमन अपने आखिरी सी-ट्रायल के दौर में है और इसके 2026 के पहले हिस्से में कमीशन होने की उम्मीद है। इसके बाद एस4 यानी आईएनएस अरिसुदन के शामिल होने के बाद भारत का एसएसबीएन बेड़ा और मजबूत हो जाएगा। यह क्लास भारत की न्यूक्लियर ट्रायड का समुद्री हिस्सा है, जो जमीन, हवा और समुद्र से परमाणु हमला करने की क्षमता देता है। (Arihant Class Submarine S4)
🚢⚓ Big boost to India’s nuclear deterrence
India’s fourth Arihant-class nuclear-powered ballistic missile submarine S4* is likely to be named INS Arisudan, meaning destroyer of enemies. The move further strengthens the sea-based leg of India’s nuclear triad. 🇮🇳#IndianNavy… pic.twitter.com/wXqNjM4dmW— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) January 5, 2026
Arihant Class Submarine S4: भारत के सीक्रेट एटीवी प्रोजेक्ट का हिस्सा
यह सबमरीन भारत के बेहद सीक्रेट और लंबे समय से चल रहे एडवांस्ड टेक्नोलॉजी व्हीकल यानी एटीवी प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसका मकसद भारत को समुद्र से परमाणु जवाबी हमला करने की पूरी क्षमता देना है। इस परियोजना की शुरुआत 1990 के दशक में हुई थी, जिसका उद्देश्य भारत को स्वदेशी न्यूक्लियर पनडुब्बी तकनीक में आत्मनिर्भर बनाना था। इन पनडुब्बियों का निर्माण विशाखापत्तनम के शिपबिल्डिंग सेंटर में किया गया है। रणनीतिक भाषा में कहें तो इसे भारत की “सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी” की रीढ़ माना जाता है। (Arihant Class Submarine S4)
Arihant Class Submarine S4: नौसेना में इस तरह रखे जाते हैं नाम
नौसेना में जहाजों और पनडुब्बियों के नाम रखने की परंपरा भी काफी दिलचस्प है। जहां अरिहंत क्लास यानी एसएसबीएन पनडुब्बियों के नाम हमेशा एक खास परंपरा के तहत रखा जाता है। संस्कृत में “अरि” का मतलब दुश्मन होता है और “हंत”, “घात”, “धमन” या “सुदन” जैसे शब्द दुश्मन के विनाश से जुड़े हैं। इसी वजह से इस क्लास की पहली पनडुब्बी का नाम आईएनएस अरिहंत रखा गया, जिसका अर्थ है दुश्मनों का संहार करने वाला। इसके बाद दूसरी पनडुब्बी आईएनएस अरिघात और तीसरी आईएनएस अरिधमन के नाम इसी परंपरा में रखे गए। अब एस4 के लिए “अरिसुदन” नाम भी इसी थीम के तहत चुना गया है। (Arihant Class Submarine S4)
वहीं डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक सबमरीन अपने पुराने डी-कमीशंड पूर्वजों के नाम पर रखी जाती हैं। कलवरी क्लास की सभी सबमरीन पुराने रूसी फॉक्सट्रॉट क्लास के नाम पर हैं। जबकि गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयरों के नाम भारतीय शहरों पर रखे जाते हैं। फ्रिगेट जहाजों के नाम नदियों और पर्वतों पर आधारित होते हैं। (Arihant Class Submarine S4)
Arihant Class Submarine S4: के-15 सागरिका मिसाइलों से लैस
इस समय भारतीय नौसेना के पास दो न्यूक्लियर-पावर्ड बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन पूरी तरह ऑपरेशनल हैं। आईएनएस अरिहंत को 2016 में कमीशन किया गया था और और उसने 2018 में अपनी पहली डिटरेंट पेट्रोल पूरी की थी। यह के-15 सागरिका मिसाइलों से लैस है, जिनकी मारक क्षमता लगभग 750 किलोमीटर है। इसके बाद आने वाली सभी पनडुब्बियां साइज में बड़ी हैं और इनमें लंबी दूरी की के-4 बैलिस्टिक मिसाइलें तैनात की जाएंगी। के-4 मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 3,500 किलोमीटर है और इसके ट्रायल डीआरडीओ और स्ट्रैटेजिक फोर्स कमांड कर रहे हैं। (Arihant Class Submarine S4)
एस4 “अरिसुदन” है सबसे पावरफुल
वहीं, तकनीकी तौर पर एस4 अरिहंत क्लास की अब तक की सबसे ताकतवर पनडुब्बी मानी जा रही है। इसका वजन करीब 7,000 टन बताया जा रहा है, जो पहली दो पनडुब्बियों से लगभग 1,000 टन ज्यादा है। इस बड़े साइज का फायदा यह है कि इसमें ज्यादा मिसाइलें और ज्यादा एडवांस सिस्टम लगाए जा सकते हैं। इसमें आठ के-4 मिसाइलें तैनात की जा सकती हैं। लंबी रेंज की वजह से अब भारतीय सबमरीन को दुश्मन के तट के करीब जाने की जरूरत नहीं होगी और वे सुरक्षित इलाकों से ही अपने टारगेट को तबाह कर सकती हैं। यह पनडुब्बी न्यूक्लियर रिएक्टर से चलती है, इसलिए इसकी रेंज अनलिमिटेड मानी जाती है। यानी जब तक खाने-पीने का सामान है, यह महीनों तक समुद्र में छिपकर रह सकती है। (Arihant Class Submarine S4)
Arihant Class Submarine S4: भारत की पॉलिसी ‘नो फर्स्ट यूज’
न्यूक्लियर पनडुब्बियां भारत की सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी का सबसे मजबूत हिस्सा मानी जाती हैं। भारत की न्यूक्लियर नीति ‘नो फर्स्ट यूज’ पर आधारित है, यानी भारत पहले परमाणु हमला नहीं करेगा। ऐसे में अगर किसी स्थिति में देश पर परमाणु हमला होता है, तो समुद्र में तैनात पनडुब्बियां सुरक्षित रहते हुए जवाबी हमला कर सकती हैं।
चीन भी भले ही “नो फर्स्ट यूज” की बात करता हो, लेकिन पाकिस्तान की नीति इससे अलग है और वह पहले इस्तेमाल की बात कहता रहा है। ऐसे में भारत के लिए मजबूत सेकंड स्ट्राइक क्षमता बेहद जरूरी हो जाती है।
अरिहंत क्लास के बाद भारत दो स्वदेशी न्यूक्लियर-पावर्ड अटैक सबमरीन यानी एसएसएन पर भी काम कर रहा है। इस परियोजना को पी-77 नाम दिया गया है, जिसे अक्टूबर 2024 में सरकार की मंजूरी मिली थी। इसके अलावा रूस से अकुला क्लास की एक न्यूक्लियर अटैक सबमरीन को लीज पर लेने की योजना भी है, जो 2028 तक भारत को मिल सकती है। खबर यह भी है कि रूस ने एक और ब्लू-वॉटर सबमरीन लीज पर देने का ऑफर दिया है। (Arihant Class Submarine S4)


