HomeIndian ArmyDESERT CYCLONE–II: अल-हमरा के रेगिस्तान में शहरी जंग की तैयारी कर रहीं...

DESERT CYCLONE–II: अल-हमरा के रेगिस्तान में शहरी जंग की तैयारी कर रहीं भारत और यूएई की सेनाएं

भारत की तरफ से मेकेनाइज्ड इन्फैंट्री रेजिमेंट से 45 जवान हिस्सा ले रहे हैं। ये बीएमपी-2 जैसे इन्फैंट्री व्हीकल्स चलाने में माहिर हैं और शहरी-रेगिस्तानी इलाकों में ऑपरेशन का अच्छा अनुभव रखते हैं...

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US

📍अल-हमरा (यूएई) | 22 Dec, 2025, 7:49 PM

DESERT CYCLONE–II: भारत और यूएई की सेनाएं इस वक्त अल-हमरा में एक्सरसाइज डेजर्ट साइक्लोन-टू के साथ शहरी जंग के लिए खुद को तैयार कर रही हैं। ये अभ्यास अब अपने सबसे अहम मोड़ पर है। दोनों देशों के जवान मिलकर बिल्ट-अप इलाकों में ऑपरेशन की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग ले रहे हैं। इस अभ्यास का असल मकसद एक-दूसरे की रणनीति को समझना, साथ काम करने का तरीका बेहतर बनाना और शहरी जंग की चुनौतियों से निपटने के लिए खुद को मजबूत करना है।

18 दिसंबर से 30 दिसंबर तक चलने वाला ये अभ्यास एक्सरसाइज डेजर्ट साइक्लोन का दूसरा एडिशन है। पहला वाला 2024 में भारत के राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में हुआ था।

DESERT CYCLONE–II

DESERT CYCLONE–II: इस बार पूरा फोकस शहरी युद्ध पर

अब युद्ध सिर्फ मैदानों तक सीमित नहीं रहा। शहर, कस्बे, भीड़-भाड़ वाले इलाके यही असली चुनौती बन गए हैं। इसी वजह से इस बार पूरा अभ्यास शहरी युद्ध यानी अर्बन कॉम्बैट पर केंद्रित है। दोनों सेनाएं इस अभ्यास में सीख रही हैं कि इमारतों को कैसे घेरना है, कमरों की तलाशी कैसे करनी है, और सबसे जरूरी कैसे बिना आम लोगों को नुकसान पहुंचाए दुश्मन को कैसे काबू में लाना है। साथ ही, आईईडी यानी इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस को पहचानना और उससे जुड़ी सुरक्षा का भी खास ध्यान रखा जा रहा है। (DESERT CYCLONE–II)

DESERT CYCLONE–II: प्लाटून लेवल पर संयुक्त ऑपरेशन

ट्रेनिंग को दो हिस्सों में बांटा गया है। शुरू में क्लासरूम में रणनीति और अनुभव शेयर किए, फिर वही बातें मैदान में उतरकर प्रैक्टिकल तौर पर आजमाई जा रही हैं। असली ट्रेनिंग में जवान बिल्डिंग में घुसने की तकनीक, पूरी इमारत को साफ करने की प्रक्रिया और प्लाटून लेवल पर संयुक्त ऑपरेशन सीख रहे हैं। दोनों सेनाएं अपने-अपने तरीके शेयर कर रही हैं, ताकि एक जैसी रणनीति और एसओपी तैयार की जा सकें। (DESERT CYCLONE–II)

यह भी पढ़ें:  Exercise Trishul 2025: थार से अरब सागर तक गरजा भारत का 'त्रिशूल', सबसे बड़े संयुक्त अभ्यास में तीनों सेनाओं ने की कई सब-एक्सरसाइज

DESERT CYCLONE–II

आईईडी, फर्स्ट एड और घायल साथियों की मदद

शहरी जंग में सबसे बड़ी टेंशन होती है कि अगर कोई साथी घायल हो जाए तो उसे सुरक्षित निकालना। इसी वजह से इस बार कैजुअल्टी इवैक्यूएशन और फर्स्ट एड पर जोर है। जवानों को सिखाया जा रहा है कि गोलियों या विस्फोट के बीच कैसे फौरन इलाज दें और साथी को सुरक्षित जगह तक पहुंचाएं। आईईडी की पहचान और उन्हें बिना नुकसान के डिएक्टिवेट करने की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। (DESERT CYCLONE–II)

DESERT CYCLONE–II: ड्रोन और काउंटर-ड्रोन की एंट्री

इस बार ड्रोन और काउंटर-ड्रोन टेक्नोलॉजी ने एक्सरसाइज में नया मोड़ ला दिया है। अब शहरी जंग में ड्रोन निगरानी, हमला और इंटेल जुटाने का बड़ा जरिया बन चुके हैं। दोनों सेनाएं मिलकर सीख रही हैं कि ड्रोन को कैसे पहचानें, जैम करें या जरूरत पड़ने पर जवाबी कार्रवाई करें। आने वाले वक्त में ये स्किल्स बेहद काम आएंगी। (DESERT CYCLONE–II)

अल-हमरा: जंग की असली प्रैक्टिस वाली जगह

अल-हमरा यूएई का सबसे मॉडर्न सैन्य ट्रेनिंग एरिया है। यहां बिलकुल असली जैसे हालात मॉक सिटी, इमारतें, टावर, सड़कें, सबकुछ बनाए गए हैं। ये जगह पहले भी कई इंटरनेशनल एक्सरसाइज का हिस्सा रही है। रेगिस्तान के बीच ये इलाका शहरी और मरुस्थलीय, दोनों तरह के ऑपरेशन के लिए परफेक्ट है। (DESERT CYCLONE–II)

DESERT CYCLONE–II

दोनों सेनाओं की बराबर भागीदारी

भारत की तरफ से मेकेनाइज्ड इन्फैंट्री रेजिमेंट से 45 जवान हिस्सा ले रहे हैं। ये बीएमपी-2 जैसे इन्फैंट्री व्हीकल्स चलाने में माहिर हैं और शहरी-रेगिस्तानी इलाकों में ऑपरेशन का अच्छा अनुभव रखते हैं। वहीं, यूएई की 53वीं मेकेनाइज्ड इन्फैंट्री बटालियन भी शामिल है।

यह भी पढ़ें:  Exercise MaruJwala: थार मरुस्थल में थल सेना और वायुसेना ने दिखाई जॉइंटनेस की ताकत, पैराट्रूपर्स ने आसमान से लगाई छलांग

पहले एडिशन से क्या अलग है?

पहला एडिशन 2024 में राजस्थान में हुआ था, जहां फोकस कॉर्डन एंड सर्च, हेलीबोर्न ऑपरेशन और ज्वाइंट सर्विलांस सेंटर्स पर था। इस बार सारा ध्यान शहरी जंग की रियल ट्रेनिंग पर है। साफ है, दोनों देश बदलती सुरक्षा चुनौतियों के हिसाब से अपनी तैयारी को भी नया रूप दे रहे हैं। (DESERT CYCLONE–II)

अभ्यास क्यों है जरूरी

भारत और यूएई के बीच डिफेंस कोऑपरेशन तेजी से बढ़ रहा है। दोनों देशों के टॉप मिलिट्री अफसरों के दौरे और बातचीत इस रिश्ते को और मजबूत कर रहे हैं। डेजर्ट साइक्लोन-टू जैसे अभ्यास सिर्फ सैन्य नहीं, रणनीतिक रिश्ते में भी भरोसा बढ़ाते हैं। ये ट्रेनिंग शांति मिशन, आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन और स्टेबिलिटी मिशन के लिए भी बहुत अहम है। दोनों सेनाएं खुद को ऐसे हालात के लिए तैयार कर रही हैं, जहां उन्हें साथ काम करना पड़ेगा। (DESERT CYCLONE–II)

Author

  • News Desk

    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
News Desk
News Desk
रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

Most Popular