📍ढाका, बांग्लादेश | 20 Dec, 2025, 5:33 PM
Bangladesh Political Unrest: बांग्लादेश में चरमपंथी कार्यकर्ता शरीफ ओस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश एक बार फिर अनिश्चितता के माहौल में है। बांग्लादेश में एक बार फिर हिंसा, अराजकता और भारत-विरोधी माहौल बनता दिख रहा है। लेकिन इस बार न तो वहां शेख हसीना हैं और न ही खालिदा जिया। वहां इस समय मोहम्मद यूनुस देश के कार्यवाहक है। बस अंतर इतना है कि वहां अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने हैं और किसी चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार को सत्ता सौंपनी है।
Bangladesh Political Unrest: हादी की हत्या के बाद मचा बवाल
बांग्लादेश में फिलहाल जो हिंसा भड़की है, उसके पीछे वजह 12 दिसंबर को हुई एक हत्या मानी जा रही है। जिसमें ढाका में 32 वर्षीय शरीफ उस्मान हादी की बाइक सवार नकाबपोश हमलावरों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी। उसे इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया था, जहां 18 दिसंबर को उसकी मौत हो गई। हादी उन युवाओं में शामिल था, जिसने अगस्त 2024 में हुए आंदोलन के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ प्रदर्शन किया था। हादी एक नए राजनीतिक मंच से जुड़ा था और फरवरी में होने वाले चुनावों के लिए सक्रिय तौर पर प्रचार कर रहा था। हादी के मौत के बाद ढाका और कई अन्य शहरों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए।
इंकलाब मंच प्लेटफॉर्म के प्रवक्ता के तौर पर, हादी अपने कट्टर भाषणों और भारत विरोधी रुख के लिए जाने जाते थे, जिससे उनके कट्टर समर्थक और कट्टर दुश्मन दोनों बन गए थे।
Bangladesh Political Unrest: पुलिस का दावा, भारत भागे आरोपी
बांग्लादेश पुलिस ने दावा किया कि हादी पर हमला करने वाले दो आरोपी भारत की ओर भाग गए हैं। इसी दावे के माहौल और गरमा गया और हादी के समर्थकों और कुछ कट्टर संगठनों ने इसे आधार बनाकर भारत के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
देखते-ही-देखते प्रदर्शन भारत के राजनयिक ठिकानों तक पहुंच गए। ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग के अलावा चटगांव, राजशाही, खुलना और सिलहट में मौजूद सहायक उच्चायोगों के बाहर भी प्रदर्शन हुए। हालात इतने बिगड़े कि एक दिन के लिए बांग्लादेशियों के लिए वीजा आवेदन केंद्र बंद करना पड़ा।
भारत ने तुरंत बांग्लादेश के राजदूत को तलब किया और अपने राजनयिक मिशनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
Bangladesh Political Unrest: मीडिया को बनाया निशाना
इस पूरे घटनाक्रम में एक और बेहद गंभीर बात सामने आई। बांग्लादेश के दो सबसे बड़े और प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों पर हमला कियाा गया। ढाका में द डेली स्टार और प्रथम आलो के दफ्तरों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई।
विडंबना यह है कि यही दोनों अखबार पहले शेख हसीना सरकार की आलोचना करते रहे थे और छात्र आंदोलन को भी समर्थन दिया था। अब इन्हें “भारत समर्थक” और “पुरानी सत्ता के सहयोगी” बताकर निशाना बनाया गया। डेली स्टार ने इसे “स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए काला दिन” करार दिया।
अंतरिम सरकार की मुश्किलें
फिलहाल बांग्लादेश में मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार है। अगस्त 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बनी इस सरकार का मुख्य काम चुनाव कराना और सुधार लागू करना है। लेकिन मौजूदा हालात में यह सरकार कानून-व्यवस्था संभालने में कमजोर पड़ती दिख रही है।
सड़कों पर गुस्सा है, राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं और कट्टरपंथी संगठनों की सक्रियता बढ़ती दिख रही है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या सरकार फरवरी में तय चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से करा पाएगी?
क्या वक्त पर होंगे चुनाव?
बांग्लादेश चुनाव आयोग ने 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव कराने की घोषणा की है। लेकिन भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर है कि क्या यह चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होंगे। भारत बार-बार कह चुका है कि वह बांग्लादेश में “फ्री, फेयर, इनक्लूसिव और क्रेडिबल” चुनाव चाहता है। यहां “इनक्लूसिव” शब्द खास तौर पर अहम है, क्योंकि इसका मतलब है कि शेख हसीना की अवामी लीग को भी चुनाव में हिस्सा लेने का मौका मिले।
हालांकि बांग्लादेश सरकार और उसके सलाहकार इस शब्द से बचते नजर आते हैं। उनका कहना है कि चुनाव का स्तर ऊंचा होना चाहिए, न कि किसी खास पार्टी की भागीदारी पर जोर दिया जाए।
चुनाव टालने की साजिश के आरोप
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने मौजूदा हालात को लेकर चिंता जताई है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि हिंसा और अराजकता चुनाव प्रक्रिया को पटरी से उतार सकती है। वहीं, शेख हसीना सरकार में मंत्री रह चुके कुछ नेताओं ने आरोप लगाया है कि अंतरिम सरकार जानबूझकर हालात बिगड़ने दे रही है, ताकि चुनाव टाले जा सकें। उनके मुताबिक भारत-विरोधी माहौल बनाकर अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचने की कोशिश भी की जा रही है।
भारत के लिए क्यों है चिंता की बात
भारत के लिए यह सिर्फ बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति का सवाल नहीं है। भारत को डर है कि अगर वहां हालात और बिगड़े, तो इसका असर सीमा पार भी पड़ सकता है। कट्टरपंथ, अवैध घुसपैठ और हिंसा का असर भारत के पूर्वी राज्यों, खासकर पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर पर पड़ सकता है।
इसके अलावा, अप्रैल-मई 2026 में पश्चिम बंगाल में भी चुनाव होने हैं। भारत सरकार नहीं चाहती कि बांग्लादेश की अशांति का कोई “स्पिलओवर” भारतीय राजनीति या सुरक्षा व्यवस्था पर पड़े।
रिटायर्ड मेजर जनरल सुधाकर जी ने इस हिंसा को एक बड़ी रणनीति का हिस्सा बताया हैं। उन्होंने कहा, “बांग्लादेश में हो रही घटनाओं का मूल मकसद भारत को उकसाना और उसे एक लंबे संघर्ष में खींचना है।”
उन्होंने संयम बरतने की अपील करते हुए तैयारी पर जोर दिया और भारत को जल्दबाजी में कोई कदम उठाने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “इंतजार करें और देखें, अपनी जासूसी, निगरानी, खुफिया संसाधनों को तैनात रखें ताकि पहले से कदम उठाने के विकल्प तैयार किए जा सकें और किसी भी अप्रत्याशित घटना को रोका जा सके।
मेजर जनरल सुधाकर जी का कहना है कि भारत को हर कीमत पर लंबे संघर्ष से बचना चाहिए।
हसीना के सत्ता छोड़ने के बाद भी जारी है हिंसा
साउथ एशियन यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर धनंजय त्रिपाठी ने कहा कि ये घटनाएं बहुत चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा, “चिंता होनी चाहिए क्योंकि पड़ोस में जो कुछ भी होता है तो वह हमेशा चिंता का वजह होता है और खासकर पिछले एक साल में बांग्लादेश में जिस तरह की घटनाएं हो रही हैं, वे काफी खतरनाक हैं।”
उन्होंने हिंसा के एक पैटर्न की ओर इशारा किया जो शेख हसीना के सत्ता छोड़ने के बाद भी जारी है। प्रोफेसर त्रिपाठी ने कहा, “जिस तरह की हिंसा हमने शेख हसीना के सत्ता छोड़ने के बाद भी देखी है। हसीना के कार्यकर्ताओं और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने की कोशिश की गई।”
हादी की मौत के बाद हुई हिंदा पर उन्होंने कहा, “यह भारत के लिए चिंताजनक स्थिति है क्योंकि भारत बांग्लादेश के साथ एक लंबी सीमा साझा करता है। शरीफ ओसामा की मौत के मामले में, बांग्लादेश के लोगों के एक वर्ग का आरोप है कि जो लोग जिम्मेदार पदों पर हैं, उनका कहना है कि ओसामा को मारने वाला व्यक्ति असल में भारत भाग गया है।”
हिंसा भारत के लिए अच्छा संकेत नहीं
त्रिपाठी ने कहा कि बीते दिन कुछ मीडिया हाउसों पर हमला हुआ, सिर्फ इसलिए कि उन्हें भारत समर्थक माना गया। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय उच्चायोग के आसपास हुए विरोध प्रदर्शन और इस तरह की घटनाएं बेहद चिंता पैदा करने वाली हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि यह सब ऐसे समय हो रहा है, जब बांग्लादेश में चुनाव नजदीक हैं। फरवरी में होने वाले चुनावों से पहले इस तरह की हिंसा देश के लिए ठीक संकेत नहीं है। उनके मुताबिक, मौजूदा हालात पर बहुत सतर्क नजर रखने की जरूरत है।
त्रिपाठी ने कहा कि भले ही यह घटनाक्रम बांग्लादेश के भीतर का मामला हो, लेकिन इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है। भारत का बांग्लादेश में निवेश है और दोनों देशों के बीच लंबी सीमा साझा होती है। ऐसे में वहां की अस्थिरता भारत के हितों को प्रभावित कर सकती है।
त्रिपाठी ने आशंका जताई कि ये हिंसक तत्व सिर्फ बांग्लादेश तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि अपने प्रॉक्सी नेटवर्क के जरिए भारत में भी परेशानी खड़ी करने की कोशिश कर सकते हैं।



