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Scorpene MoU: भारत-ब्राजील की बड़ी साझेदारी, स्कॉर्पीन पनडुब्बियों पर हुआ ऐसा समझौता जिससे उड़ेगी चीन की नींद

एमडीएल भारत का प्रमुख शिपयार्ड है, जिसने मुंबई में सभी छह स्कॉर्पीन-क्लास पनडुब्बियों का निर्माण किया है। ब्राजील ने भी भारत की ओर से डेवलप मेंटेनेंस सिस्टम में रुचि दिखाई है...

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📍नई दिल्ली | 10 Dec, 2025, 10:51 AM

Scorpene MoU: भारत और ब्राजील ने स्कॉर्पीन-क्लास पनडुब्बियों के रखरखाव और तकनीकी सहयोग को बढ़ाने के लिए एक समझौते पर दस्तखत किए हैं। मंगलवार को दोनों देशों की नौसेनाओं और भारत के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के बीच एक महत्वपूर्ण मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर दस्तखत किए गए। यह समझौता ब्राजील की यात्रा पर गए भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी की मौजूदगी में हुआ।

भारतीय नौसेना के मुताबिक, यह एमओयू स्कॉर्पीन-क्लास सबमरीन और अन्य नौसैनिक प्लेटफॉर्म्स के मेंटेनेंस को लेकर हैं। इसके अलावा, इस समझौते में लाइफ-साइकिल सपोर्ट, तकनीकी सहयोग और ट्रेनिंग सुविधाएं भी शामिल हैं। नौसेना ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों की रक्षा कंपनियों और सरकारी एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाएगा।

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स्कॉर्पीन-क्लास पनडुब्बियां अत्याधुनिक डीजल-इलेक्ट्रिक सबमरीन हैं, जिन्हें फ्रांस की नेवल ग्रुप के साथ साझेदारी में भारत ने प्रोजेक्ट-75 के तहत डेवलप किया है। भारत के पास फिलहाल छह कलवरी-क्लास पनडुब्बियां हैं, जबकि ब्राजील भी अपनी रियाचुएलो-क्लास स्कॉर्पीन सबमरीन ऑपरेट करता है।

नौसेना ने बताया कि यह एमओयू मेंटेनेंस, लॉजिस्टिक्स और ट्रेनिंग में अनुभव साझा करने और दोनों देशों की सबमरीन सपोर्ट कैपेबिलिटी बढ़ाने में मदद करेगा। इससे लंबे समय तक सबमरीन को सुरक्षित और प्रभावी तरीके से ऑपरेट किया जा सकेगा। भारत के लिए यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भविष्य में भारत में पूरी तरह से स्वदेशी सबमरीन बनाई जा सकेंगी।

एडमिरल दिनेश त्रिपाठी 9 से 12 दिसंबर तक ब्राजील के दौरे पर हैं। इस दौरान वह ब्राजील के रक्षा मंत्री होजे मुसियो, ब्राजीलियन आर्म्ड फोर्सेज के चीफ ऑफ जॉइंट स्टाफ एडमिरल रेनेटो फ्रीरे और ब्राजीलियन नौसेना प्रमुख एडमिरल मार्कोस ओल्सेन से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में दोनों देशों के समुद्री सहयोग, ऑपरेशनल लिंक और संयुक्त ट्रेनिंग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

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नौसेना के अनुसार यह यात्रा भारत-ब्राजील सामरिक साझेदारी को मजबूत बनाएगी। दोनों देश हिंद महासागर और दक्षिण अटलांटिक क्षेत्रों में समुद्री सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर साथ मिलकर काम कर रहे हैं। स्कॉर्पीन सबमरीन इस सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, क्योंकि इनका डिजाइन और तकनीक दोनों देशों के लिए समान है।

एमडीएल भारत का प्रमुख शिपयार्ड है, जिसने मुंबई में सभी छह स्कॉर्पीन-क्लास पनडुब्बियों का निर्माण किया है। ब्राजील ने भी भारत की ओर से डेवलप मेंटेनेंस सिस्टम में रुचि दिखाई है। यह समझौता तकनीकी अनुभवों के आपसी आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा और दोनों देशों को बेहतर और अधिक सुरक्षित सबमरीन ऑपरेशन में मदद करेगा।

भारतीय नौसेना ने कहा कि यह समझौता रिसर्च एंड डेवलपमेंट में भी नए अवसर खोलेगा। खासकर स्कॉर्पीन सबमरीन के लिए नए अपग्रेड, वेपन सिस्टम और आधुनिक तकनीकों पर संयुक्त काम होने की संभावना बढ़ेगी।

भारत और ब्राजील पहले से ही रक्षा क्षेत्र में करीबी सहयोग रखते हैं। इसी साल अक्टूबर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ब्राजील के उपराष्ट्रपति जेराल्डो अल्कमिन से मुलाकात की थी। उस बैठक में दोनों देशों ने रक्षा निर्माण, को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन पर मिलकर काम करने की सहमति जताई थी।

ब्राजील के साथ यह समझौता भारत की टैगलाइन आत्मनिर्भर भारत को भी मजबूत करेगा। स्कॉर्पीन-क्लास सबमरीन का मेंटेनेंस अब भारत और ब्राजील दोनों देशों में घरेलू स्तर पर किया जा सकेगा। इससे लागत कम होगी और तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

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