📍नई दिल्ली | 17 Nov, 2025, 12:09 PM
Chanakya Defence Dialogue: सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर एक ट्रेलर की तरह था, जो 88 घंटे में खत्म हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी तरह के स्टेट-स्पॉन्सर्ड आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा और आतंकियों को सहयोग देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
Chanakya Defence Dialogue: बातचीत और आतंक साथ नहीं चल सकते
नई दिल्ली में आयोजित चाणक्य डिफेंस डायलॉग के फायरसाइड चैट में सेना प्रमुख ने कहा कि जब कोई देश किसी तरह के आतंकवाद को बढ़ावा देता है तो यह भारत के लिए चिंता का विषय बन जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत विकास की राह पर है और यदि कोई हमारे रास्ते में बाधा खड़ी करता है तो कार्रवाई करना पड़ेगी। जनरल द्विवेदी ने दोहराया कि बातचीत और आतंक साथ नहीं चल सकते और शांतिपूर्ण प्रक्रिया अपनाने तक आतंकवादियों और उनके समर्थन करने वालों को समान रूप से देखा जाएगा। उनके शब्दों में, आज भारत इतना सशक्त है कि किसी भी तरह की ब्लैकमेल की कोशिश से डरता नहीं है।
ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन 88 घंटे में खत्म हुआ और इस अवधि में जरूरी कार्रवाई पूरी की गई। उन्होंने कहा कि मूवी शुरू भी नहीं हुई थी। सिर्फ एक ट्रेलर दिखाया गया था और ट्रेलर के बाद 88 घंटे में वो ट्रेलर खत्म हो गया था। उन्होंने कहा कि सेना किसी भी परिस्थितियों के लिए हमेशा तैयार रहती है और यदि पाकिस्तान ने दोबारा कोई मौका दिया तो उसे यह सिखाया जाएगा कि पड़ोसी देशों के साथ किस तरह व्यवहार करना चाहिए। जनरल द्विवेदी ने यह बात स्पष्ट की कि सीमापार हिंसा और अशांति का जवाब देना जरूरी हुआ तो वह दिया जाएगा।
भारत-चीन के बीच 1,100 बार बातचीत
सीमा पर भारत-चीन संबंधों पर चर्चा करते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि अक्टूबर 2024 के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार दिखा है। उन्होंने जिक्र किया कि 21 अक्टूबर को पूर्वी लद्दाख में हुए समझौते और 24 अक्टूबर को प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक ने माहौल सामान्य बनाने में मदद की। जनरल द्विवेदी ने बताया कि पिछले एक साल में जमीन-स्तर पर करीब 1,100 बातचीत हुई हैं, यानी औसतन रोज तीन इंटरैक्शन हुए हैं। उनके अनुसार यह बातचीत अब कोर कमांडर स्तर से नीचे आकर बटालियन और कंपनी कमांडर स्तर तक पहुंच गई है, जिससे छोटे विवाद वहीं हल होने लगे हैं और मामले फाइलों में फंसकर नहीं रुकते।

डिफेंस डिप्लोमेसी को लेकर कही ये बात
डिफेंस डिप्लोमेसी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि हार्ड पावर और सॉफ्ट पावर के मेल से जो ‘स्मार्ट पावर’ बनती है, वही असली कूटनीति और भरोसा जगाती है। जब सैन्य और कूटनीतिक संपर्क बढ़ते हैं तो ट्रेनिंग, तकनीकी आदान-प्रदान और संयुक्त अभ्यास जैसे क्षेत्रों में सहयोग संभव होता है। जनरल द्विवेदी ने यह भी कहा कि संगीत और सेना दोनों भाषा की बाधा को पार कर देते हैं और इसी तरह सैन्य संपर्क से भी पारस्परिक भरोसा बढ़ता है।
बताया थियेटराइजेशन क्यों है जरूरी
थियेटराइजेशन पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भौगोलिक आधार पर है और हमारी दो तरफ सीमाएं हैं। और उसके ऊपर हमारी आंतरिक चुनौतियां हैं, उनसे डील करता है। उन्होंने कहा कि अब युद्ध केवल जमीन-हवा-समुद्र तक सीमित नहीं रह गया। साइबर, स्पेस, इन्फोर्मेशन वॉरफेयर और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम जैसे नए डोमेन भी युद्ध के हिस्से बन गए हैं। इसलिए सेना ने अपनी स्ट्रक्चर में बदलाव किए हैं और रुद्र ब्रिगेड जैसे इंटीग्रेटेड सभी हथियारों वाले ब्रिगेड बनाए जा रहे हैं। जनरल द्विवेदी ने बताया कि रुद्र ब्रिगेड में इंफैंट्री, मेकैनाइज्ड यूनिट, टैंक्स, आर्टिलरी, एयर-डिफेंस, इंजीनियर्स और ड्रोन यूनिट सब एक साथ हैं ताकि संयुक्त तौर पर तेज और प्रभावी कार्रवाई हो सके।
उन्होंने कहा कि इंटीग्रेशन का मतलब है कि आर्मी, नेवी, एयरफोर्स, सीएपीएफ, साइबर, स्पेस। जितनी जल्दी इंटीग्रेशन करेंगे उतना हम इस लड़ाई को बड़े साझे ढंग से लड़ सकेंगे क्योंकि आज की लड़ाई जो है वह मल्टी डोमेन है। अगर मैं बोलूं सिर्फ आर्मी अकेले लड़ सकती है, तो नहीं, बल्कि हम सबको मिलकर लड़ना पड़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य की लड़ाई में समय की अहमियत बढ़ गई है और यदि कोई अभियान 88 घंटे के भीतर पूरा करना हो, तो देश की सारी ताकत उस थिएटर कमांडर के पास होगी। जनरल द्विवेदी ने बताया कि थिएटर कमांडरों को पूरा दायित्व और संसाधन दिए जाएंगे ताकि निर्णय-निर्माण और क्रियान्वयन में देरी न हो। उनका कहना था कि पहले ऐसे फैसले दिन-रात के बाद लिए जाते थे, अब समय कम है और हर स्तर पर स्वतन्त्रता व जवाबदेही जरूरी है।
मणिपुर में लौट रहा लोगों का भरोसा
मणिपुर की स्थिति पर बात करते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि वहां स्थिति में सुधार हुआ है और लोगों का भरोसा लौट रहा है। जो 2023 में जो मापदंड थे, जो आज के मापदंड हैं बिल्कुल बदले हो गए हैं। उन्होंने बताया कि 2023 के मुकाबले घटनाओं की संख्या कम हुई है, हथियारों की रिकवरी बढ़ी है और स्थानीय उत्सवों तथा खेल आयोजनों के माध्यम से सामान्य जीवन लौट रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि रेल संपर्क और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से स्थिति और बेहतर होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि मणिपुर में जो हिंसा के मामले लगातार घटते हुए सात से आठ इंसिडेंट पर माह रह गए हैं। उन्होंने कहा बदलाव अभी और भी आएंगे जब आप देखेंगे जब हमारी ट्रेन इंफाल तक आएगी तो वह बदलाव धीरे-धीरे और बढ़ते जाएंगे। उन्होंने कहा, मुझे लग रहा है कि आगे आने वाले दिनों में अगर वहां पर समुदाय के लोग आपस में बैठे और खुद एक सॉल्यूशन निकालना चाहेंगे तो बदलाव जल्दी आएगा।
नेटवर्किंग और डेटा-सेंट्रिसिटी पर काम जारी
जनरल द्विवेदी ने बताया कि सेना ने ‘टेक्नोलॉजी एब्जॉर्प्शन’ का वर्ष घोषित किया और अब नेटवर्किंग व डेटा-सेंट्रिसिटी की ओर काम जारी है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम, ड्रोन व इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसे क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी और मानव संसाधन को साथ जोड़ना प्राथमिकता है। इसके साथ ही आपातकालीन खरीद-प्रक्रियाओं के जरिये जरूरी तकनीक जल्दी लाई जा रही है ताकि ऑपरेशनल गैप्स भरे जा सकें।



