📍नई दिल्ली | 2 Nov, 2025, 11:36 AM
AQIS Terror India: महाराष्ट्र एंटी-टेरोरिज्म स्क्वाड ने पुणे से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को गिरफ्तार किया, जिसके पास से हथियारों और विस्फोटकों की तस्वीरें बरामद हुईं। जिसके बाद भारत की सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह चौकन्नी हो गईं। एजेंसी सूत्रों का कहना है कि अल-कायदा इन द सब-कॉन्टिनेंट यानी एक्यूआईएस देश में आतंकी हमलों की योजना बना रहा है। 37 साल का इंजीनियर जुबैर हंगरगेकर भी एक्यूआईएस के ऑनलाइन प्रोपेगैंडा से प्रभावित था।
यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग में इस्लामिक एंड मिडल ईस्ट स्टडीज डिपार्टमेंट में सीनियर रिसर्चर मोहम्मद सिनन सियेच कहते हैं कि दक्षिण एशिया में आतंकवाद के फिर से सिर उठाने की आहट मिल रही है। अल-कायदा इन द सब-कॉन्टिनेंट ने भारत में अपनी गतिविधियों को फिर से बढ़ाने की रणनीति शुरू कर दी है। एक्यूआईएस भारत के कश्मीर और पूर्वी राज्यों पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा के अलावा दक्षिण भारत में अपने नेटवर्क को मजबूत करने की योजना बना रहा है।
AQIS Terror India:2014 में बना था AQIS, भारत को बताया था ‘मुख्य निशाना’
एक्यूआईएस की स्थापना वर्ष 2014 में अल-कायदा सेंट्रल ने अफगानिस्तान में की थी। इसका उद्देश्य दक्षिण एशिया में सक्रिय छोटे-छोटे जिहादी संगठनों को एक मंच पर लाना था। यह वह समय था जब इस्लामिक स्टेट ने इराक और सीरिया में ‘खिलाफत’ का एलान कर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था। एक्यूआईएस को इस नए खतरे का जवाब देने के लिए अल-कायदा का “क्षेत्रीय चेहरा” बताया गया।
एजेंसी सूत्रों का कहना है कि संगठन ने तब यह दावा किया था कि वह जम्मू-कश्मीर को “मुक्त कराने” के लिए काम करेगा। एक्यूआईएस के पहले प्रमुख के तौर पर उत्तर प्रदेश के संभल जिले के रहने वाले असीम उमर को नियुक्त किया था। शुरुआती सालों संगठन ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली और बिहार में अपने नेटवर्क बनाने की कोशिश की, लेकिन भारतीय खुफिया एजेंसियों की सतर्कता के चलते इसके कई मॉड्यूल नाकाम रहे। इसी के चलते संगठन ने अब रणनीति बदलते हुए “लोन वुल्फ” यानी अकेले हमला करने का तरीका अपनाया है।
AQIS Terror India: भारत में पकड़ नहीं बना पाया एक्यूआईएस
मोहम्मद सिनन सियेच के मुताबिक कश्मीर एक्यूआईएस की रणनीति का मुख्य केंद्र है। साल 1996 में ओसामा बिन लादेन ने पहली बार कश्मीर का नाम लिया था। 2014 और 2016 में संगठन ने फिर से कश्मीरी युवाओं को “जिहाद” के लिए भड़काने की कोशिश की। 2017 में कश्मीर के उग्रवादी नेता जाकिर मूसा ने हिजबुल मुजाहिद्दीन छोड़कर एक्यूआईएस का दामन थाम लिया था और “अंसार गजवत-उल-हिंद” संगठन बनाया था। मई 2019 को सुरक्षा बलों ने जाकिर मूसा समेत अबू दुजाना को भी मार गिराया था।
जिसके बाद एक्यूआईएस कमजोर पड़ने लगा। 2014 से अब तक यह भारत में किसी बड़े हमले को अंजाम नहीं दे सका। हाल में संगठन ने अपनी रणनीति बदलते हुए कहा है कि केवल “बदले” की कार्रवाई करेगा। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि अल-कायदा और आईएसआईएस दोनों की भारत में सीमित पहुंच है। भारतीय मुस्लिम समुदाय की पारिवारिक और सामाजिक संरचना, प्रमुख मदरसों का चरमपंथ विरोधी रवैया और खुफिया एजेंसियों की सख्ती के चलते यह संगठन भारत में पकड़ नहीं बना पाया।
लेकिन महाराष्ट्र एटीएस ने जिस तरह से पुणे के कोंधवा इलाके से सॉफ्टवेयर इंजीनियर जुबैर हंगरगेकर को हिरासत में लिया है, उसके बाद अंदेशा लगाया जा रहा है कि यह संगठन भारत में फिर से अपनी पकड़ बनाने की तैयारियों में जुट गया है। जुबैर एक मल्टीनेशनल कंपनी में डेटाबेस डेवलपर के तौर पर काम करता था। एटीएस ने शुरुआती जांच में पाया कि संदिग्ध ने इंटरनेट पर एक्यूआईएस की सामग्री देखी और उससे प्रभावित होकर कट्टर रुख अपना लिया औऱ जिहाद के रास्ते पर चल दिया। उसके पास से मिली तस्वीरों में वह एक एक-47 राइफल पकड़े हुए है और उसके पास कुछ बम बनाने के डॉक्यूमेंट्स भी मिले हैं। साथ ही एटीएस ने मौके से कई लैपटॉप और मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच जारी है। उसकी गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या वह किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ा था या अकेले ही काम कर रहा था।
AQIS Terror India: ‘लोन वुल्फ’ मॉडल क्यों है खतरनाक
अल-कायदा का यह नया तरीका इस्लामिक स्टेट की रणनीति से मिलता-जुलता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे हमले ‘इन्वेस्टमेंट-फ्री’ यानी बहुत कम संसाधनों में किए जा सकते हैं और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पकड़े जाने का खतरा भी बेहद कम होता है। एक्यूआईएस के संदेशों में कहा गया है कि भारत में रहने वाले “विचारधारा से प्रेरित लोग” अपने स्तर पर हमले करें। इन अपीलों का प्रसार एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया चैनलों के जरिए किया जा रहा है।
AQIS Terror India: बांग्लादेश में अस्थिरता से मिला मौका
रिसर्चर मोहम्मद सिनन सियेच के मुताबिक एक्यूआईएस अब पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश सीमा से लगे इलाकों में अपने पैर पसार रहा है। अंसारुल्लाह बंगला टीम, जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश और हरकत-उल-जिहाद-इस्लामी जैसे बांग्लादेशी संगठन पहले ही पश्चिम बंगाल के सीमांत जिलों में अपनी पैठ बना चुके हैं।
AQIS Terror India: लड़ाकों को दी है खास ट्रेनिंग
बेंघाजी: नो द एनीमी की लेखिका सराह एडम्स के मुताबिक एक्यूआईएस दो साल से अफगानिस्तान में अपने लड़ाकों को खास ट्रेनिंग दे रहा है। यह ट्रेनिंग इस्लामिक आर्मी नामक सहयोगी संगठन के साथ मिलकर दी गई है। उनका भी दावा है कि एक्यूआईएस भारत में एक बड़े हमले की तैयारी में है और “लोन वुल्फ” का आह्वान केवल एक स्मोकस्क्रीन (धोखे का तरीका) हो सकता है ताकि भारत की एजेंसियां छोटे मामलों में उलझी रहें।
उनका कहना है कि अमेरिकी थिंक टैंकों की रिपोर्टों में कहा गया है कि इस कथित बड़े हमले की योजना अल-कायदा के नेता हमजा बिन लादेन की मंजूरी से तैयार किया जा रहा है और इसमें दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों को निशाना बनाए जाने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने कुछ खुफिया रिपोर्ट्स के हवाले से कहा है कि अफगानिस्तान के कुछ कैंपों में अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और कुछ भारतीय नागरिकों की भर्तियां हो रही हैं।
AQIS Terror India: सुरक्षा एजेंसियों ने बढ़ाई निगरानी
खुफिया एजेंसियों और राज्य पुलिस ने देशभर में ऑनलाइन रैडिकलाइजेशन पर निगरानी बढ़ा दी है। खासकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, एन्क्रिप्टेड चैट ऐप्स और फंडिंग ट्रांजेक्शन की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है। साथ ही पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में भी निगरानी बढ़ाई है। एनएसए की निगरानी में सुरक्षा एजेंसियां इंटर-एजेंसी कॉर्डिनेशन को मजबूत कर रही हैं।
सूत्रों ने बताया कि भारत की नीति अब केवल डिफेंसिव नहीं है, बल्कि प्रोएक्टिव इंटेलिजेंस पर फोकस है, यानी संदिग्ध नेटवर्कों को पहले ही पहचानकर कार्रवाई करना। हाल के महीनों में असम, गुजरात, जम्मू-कश्मीर और केरल में कई संदिग्ध मॉड्यूलों को पकड़ा गया है।
सूत्रों का कहना है कि एक्यूआईएस का अकेले हमला करने का यह कदम बेहद खतरनाक है क्योंकि यह किसी दूसरे संगठन से बिल्कुल अलग है। अब हम एक ऐसे खतरे का सामना कर रहे हैं जिसमें एक व्यक्ति भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।” उन्होंने कहा कि लोन वुल्फ मॉडल का इस्तेमाल कई देशों में हुआ है और इसका असर रोकने के लिए साइबर निगरानी ही सबसे बड़ा हथियार है।
डिजिटल युग में आतंकवाद का रूप भी लगातार बदल रहा है। एक्यूआईएस जैसे संगठन अब सोशल मीडिया, डार्क वेब और गेमिंग प्लेटफॉर्म तक का इस्तेमाल कर रहे हैं। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, एक्यूआईएस के कई प्रचारक उर्दू और हिंदी भाषा में ऑनलाइन लेक्चर पोस्ट कर रहे हैं, जिनका निशाना युवा हैं और उन्हें ‘वीडियो प्रोपेगैंडा’ के जरिए उकसाया जा रहा है। सरकारी एजेंसियों ने अब कंटेंट मॉनिटरिंग यूनिट्स को सक्रिय किया है, जो 24 घंटे ऐसे चैनलों पर नजर रख रही हैं।


