📍नई दिल्ली | 10 Dec, 2025, 12:05 PM
P-8I Deal Stalled: भारत ने अमेरिका से छह और पी-8आई पोसिडियन मैरीटाइम सर्विलांस विमान डील फिलहाल रोक दी है। इसकी पीछे वजह राजनीतिक और आर्थिक के साथ-साथ विमान की कीमतों में हुई बढ़ोतरी और टैरिफ वॉर बताई जा रही है। सरकार ने डील को निष्पक्ष तरीके से फिर से देखने के निर्देश दिए हैं, लेकिन अभी तक इसे पूरी तरह रद्द नहीं किया गया है।
पिछले सालों में भारतीय नौसेना ने मिलाकर 12 पी-8आई विमान खरीदे थे और इन्हें हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी, एंटी-सबमरीन और मैरीटाइम सर्विलांस के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। 2009 में भारत ने आठ विमान 2.2 बिलियन डॉलर में खरीदे थे और 2016 में चार और जहाज खरीदे। इसके बाद 2021 में छह अतिरिक्त विमानों के लिए अमेरिक ने अनुमति दी थी, लेकिन पिछले कुछ सालों में इनकी कीमतें बढ़कर 3.6 बिलियन डॉलर तक पहुंच गईं, जो 2021 के प्रस्तावित मूल्य से लगभग 50 फीसदी ज्यादा है। (P-8I Deal Stalled)
सरकारी सूत्रों का कहना है कि अमेरिका ने सप्लाई चेन में दिक्कतों और प्रोडक्शन कॉस्ट में बढ़ोतरी को वजह बताते हुए कीमत घटाने से इंकार किया है। इसी बीच अमेरिका ने कुछ ट्रेड स्लिप और टैरिफ मुद्दों को लेकर दबाव भी डाला, जिनमें हाल का 25 फीसदी का टैरिफ निर्णय शामिल है, जिसके चलते द्विपक्षीय व्यापार माहौल पर भी असर पड़ा। इसे देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने खरीद पर रोक लगाकर स्पेशल रिव्यू का आदेश दिया है। (P-8I Deal Stalled)
नौसेना की तकनीकी टीम अब मौजूदा 12 पी-8आई विमानों के जरिए इंडियन ओशन रीजन की निगरानी जारी रखेगी। अधिकारियों के अनुसार पी-8आई की क्षमताओं को देखते हुए नौसेना को नए विमानों की जरूरत थी, ताकि फ्लाइट आवर्स और कवरेज में सुधार हो सके। लेकिन लागत बढ़ने के चलते बजट और प्राथमिकताओं की समीक्षा जरूरी हो गई है। बढ़ी कीमत का असर रक्षा बजट पर होगा और इसलिए रक्षा मंत्रालय ने वैकल्पिक घरेलू विकल्पों पर भी ध्यान देने का फैसला किया है। इसके तहत हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड और डीआरडीओ के प्लेटफॉर्म पर जोर दिया जा रहा है, साथ ही अनमैन्ड एयर सिस्टम्स जैसे एमक्यू-9बी ड्रोंस को विकल्प माना जा रहा है। (P-8I Deal Stalled)
भारतीय नौसेना के पी-8आई पोसीडन विमान पिछले दस साल में कई बड़े सैन्य अभियानों में बेहद कारगर साबित हुए हैं। यह विमान न सिर्फ लंबी दूरी तक समुद्री निगरानी करते हैं, बल्कि इनमें वही हथियार लगे हैं जो दुनिया के सबसे ताकतवर मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट में लगे होते हैं। ये विमान हवा में 10-12 घंटे तक रह सकते हैं, रडार, सोनार और सेंसर से रियल-टाइम डेटा शेयर करते हैं। (P-8I Deal Stalled)
भारत के पी-8आई उन चुनिंदा देशों के वर्जन में शामिल हैं जिन्हें अमेरिका ने पूरी कॉम्बैट क्षमता के साथ मंजूरी दी थी। इनमें एजीएम-84एल हार्पून मिसाइल और एमके-54 टॉरपीडो लगाए गए हैं, जो दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों को निशाना बनाने में सक्षम हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी आईएनएस विक्रांत के कैरियर ग्रुप के साथ पी-8आई ने पाक नेवी को अपने तटों तक सीमित रखा, जिससे वो डिफेंसिव मोड में रह गई। ये विमान अरब सागर और इंडियन ओशन रीजन में तैनात थे, जहां से उन्होंने पाकिस्तानी नौसेना की मूवमेंट को लगातार ट्रैक किया। (P-8I Deal Stalled)
साल 2017 के डोकलाम संकट में इन विमानों ने बेहद अहम भूमिका निभाई थी। उस दौरान पी-8आई ने पूर्वी सेक्टर में लगातार उड़ानें भरीं और सिक्किम-भूटान-चीन वाले त्रिकोणीय क्षेत्र के साथ बंगाल की खाड़ी में भी लंबे मिशन किए। इन विमानों ने चीन की नौसेना की गतिविधियों, खासकर उनकी पनडुब्बियों और सर्वे जहाजों की मूवमेंट को भी करीब से ट्रैक किया। अंडमान-निकोबार से उड़ान भरकर पी-8आई ने हिंद महासागर में मौजूद चीनी जहाजों पर भी कड़ी नजर रखी और यह सारी जानकारी नौसेना और भारतीय वायुसेना के साथ रियल-टाइम में साझा की गई। यह पहला मौका था जब भारत ने किसी एक्टिव कॉन्फ्रंटेशन की स्थिति में इन विमानों का इतने बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया था। उस समय के नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि पी-8आई ने चीन की हर गतिविधि का पहले से पता लगाने में मदद की। (P-8I Deal Stalled)
इसके बाद कई मौकों पर इन विमानों ने भारत के रणनीतिक अभियानों को मजबूती दी। बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद पी-8आई ने अरब सागर में पाकिस्तान की पनडुब्बी को ट्रैक करके उसे सतह पर आने के लिए मजबूर किया। लद्दाख तनाव के दौरान रोजाना लंबी दूरी के मिशन उड़ाकर पी-8आई ने चीनी सेना की सप्लाई और मूवमेंट की निगरानी की। हिंद महासागर में चीन के “रिसर्च वेसल” के नाम पर काम कर रहे जहाजों पर भी इन विमानों ने लगातार नजर रखी। कुछ महीनों पहले ऑपरेशन सिंदूर में भी मालदीव के पास हुए ड्रोन बोट हमले के दौरान पी-8आई ने रियल-टाइम निगरानी साझा की। (P-8I Deal Stalled)
भारतीय नौसेना के पास अभी 12 पी-8आई विमान हैं और वे अब तक 45,000 से ज्यादा फ्लाइट ऑवर्स पूरे कर चुके हैं। नौसेना इन्हें अपनी “आंख और कान” कहती है, क्योंकि ये पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में दुश्मन की हर छोटी-बड़ी गतिविधि को पकड़ लेते हैं। यही वजह है कि नौसेना इस फ्लीट को 18 तक बढ़ाने की योजना पर लंबे समय से काम कर रही है। (P-8I Deal Stalled)


