📍नई दिल्ली | 31 Jan, 2026, 11:05 AM
Indian Navy Unmanned Interceptor Craft: भारतीय नौसेना को देश में बने पहले ऑटोनॉमस हथियारबंद अनमैन्ड फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट (FIC) मिलने शुरू हो गए हैं। इन क्राफ्ट्स का पहला बैच पुणे स्थित भारतीय कंपनी सागर डिफेंस इंजीनियरिंग ने नौसेना को सौंप दिया है। पहले चरण में दो क्राफ्ट्स पश्चिमी तट पर तैनाती के लिए रवाना किए गए हैं।
अनमैन्ड फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट की डिलीवरी को भारतीय नौसेना के ऑपरेशन करने के तरीके में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इन अनमैन्ड और हथियारबंद क्राफ्ट्स के शामिल होने के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जिनके पास बोट स्वार्म तकनीक मौजूद है। (Indian Navy Unmanned Interceptor Craft)
Indian Navy Unmanned Interceptor Craft: क्या हैं अनमैन्ड फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट
अनमैन्ड फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट ऐसे हाई-स्पीड बोट्स होते हैं, जिन्हें बिना किसी चालक के समुद्र में ऑपरेट किया जा सकता है। ये क्राफ्ट ऑटोनॉमस सिस्टम पर काम करते हैं और जरूरत पड़ने पर इन्हें रिमोट कंट्रोल के जरिए भी चलाया जा सकता है। इनका मुख्य उद्देश्य समुद्र में तेजी से संदिग्ध नौकाओं को रोकना, तटीय इलाकों की निगरानी करना और विशेष अभियानों में मदद देना है।
भारतीय नौसेना को मिलने वाले ये क्राफ्ट पूरी तरह हथियारबंद हैं और आधुनिक समुद्री खतरों को ध्यान में रखकर डिजाइन किए गए हैं। (Indian Navy Unmanned Interceptor Craft)
पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन और निर्माण
इन इंटरसेप्टर क्राफ्ट्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें पूरी तरह भारत में डिजाइन, डेवलप और मैन्युफैक्चर किया गया है। यह प्रोजेक्ट सरकार के इनोवेशन्स फॉर डिफेंस एक्सीलेंस यानी आईडेक्स (iDEX) और डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन फ्रेमवर्क के तहत तैयार किया गया है।
अब तक भारतीय नौसेना कुछ हद तक विदेश में बने अनमैन्ड सरफेस वेसल्स पर निर्भर थी, लेकिन उनका इस्तेमाल मुख्य रूप से माइन काउंटर मेजर्स तक सीमित था। पहली बार नौसेना को ऐसे स्वदेशी अनमैन्ड क्राफ्ट मिल रहे हैं, जो सीधे कॉम्बैट और इंटरसेप्शन रोल निभा सकते हैं। (Indian Navy Unmanned Interceptor Craft)
12 क्राफ्ट का ऑर्डर, पहला बैच हुआ रवाना
भारतीय नौसेना ने जनवरी 2022 में कुल 12 ऐसे हथियारबंद अनमैन्ड इंटरसेप्टर क्राफ्ट्स का ऑर्डर दिया था। अब उसी डील के तहत पहला बैच तैयार होकर नौसेना को सौंपा गया है। आने वाले समय में बाकी क्राफ्ट्स भी चरणबद्ध तरीके से नौसेना के बेड़े में शामिल किए जाएंगे।
पहले बैच की दो यूनिट्स को पश्चिमी तट पर किसी संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र में तैनात किया जाएगा, जहां तटीय सुरक्षा और निगरानी की सबसे ज्यादा जरूरत रहती है। (Indian Navy Unmanned Interceptor Craft)
रेंज और क्षमता में बेहद मजबूत
इन अनमैन्ड इंटरसेप्टर क्राफ्ट्स की ऑपरेशनल रेंज 400 नॉटिकल माइल्स से ज्यादा है, यानी ये करीब 800 किलोमीटर तक समुद्र में ऑपरेशन कर सकती हैं। इसका मतलब यह है कि ये क्राफ्ट लंबी दूरी तक पेट्रोलिंग कर सकती हैं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत प्रतिक्रिया दे सकते हैं। वहीं इनकी रफ्तार भी लगभग 90 किमी/घंटा से ज्यादा है और इनकी एंड्यूरेंस कैपेसिटी 2 से ज्यादा दिन की है, जिससे ये समुद्र में लगातार ऑपरेशन कर सकते हैं।
जरूरत पड़ने पर ये क्राफ्ट विशेष मिशनों के लिए 14 से ज्यादा जवानों को भी ले जाने में सक्षम हैं। इससे इनका इस्तेमाल रैपिड इंसर्शन और इवैक्यूएशन जैसे मिशनों में भी किया जा सकता है।
ऑपरेशनल रोल्स के लिहाज से यह सिस्टम बेहद मल्टी-रोल है। इसे हाई-स्पीड इंटरडिक्शन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, यानी संदिग्ध या दुश्मन बोट्स का पीछा कर उन्हें रोकने में। यह सर्विलांस और आईएसआर (इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रेकॉनिसेंस) मिशनों में भी अहम भूमिका निभा सकता है, जहां समुद्री इलाकों की लगातार निगरानी जरूरी होती है। इसके साथ ही यह सी4आईएसआर फ्रेमवर्क का हिस्सा बनकर कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन और इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत करता है। (Indian Navy Unmanned Interceptor Craft)
जीपीएस सिग्नल जाम होने पर भी करेगा काम
इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसका एडवांस्ड ऑटोनॉमस आर्किटेक्चर है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह जीपीएस-डिनाइड एनवायरनमेंट में भी प्रभावी तरीके से काम कर सके। यानी अगर दुश्मन इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के जरिए जीपीएस सिग्नल जाम करने की कोशिश करे, तब भी यह प्लेटफॉर्म अपना रास्ता नहीं भटकेगा। इसमें पूरी तरह स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम और कोलिजन अवॉइडेंस सॉफ्टवेयर लगाया गया है, जो आसपास मौजूद अन्य जहाजों, बाधाओं और समुद्री हालात को पहचानकर अपने आप सुरक्षित मूवमेंट सुनिश्चित करता है। (Indian Navy Unmanned Interceptor Craft)
सेल्फ-राइटिंग कैपेबिलिटी
इसके अलावा इस प्लेटफॉर्म में कई ऐसे फीचर्स जोड़े गए हैं, जो इसे मुश्किल समुद्री हालात में भी भरोसेमंद बनाते हैं। अगर ऊंची लहरों या खराब मौसम के कारण यह क्राफ्ट पलट भी जाए, तो इसमें सेल्फ-राइटिंग कैपेबिलिटी है, यानी यह अपने आप फिर से सीधा हो सकता है। यह दिन और रात, दोनों समय ऑपरेशन करने में सक्षम है और तेज लहरों तथा रफ सी-कंडीशंस को झेलने की क्षमता रखता है। यही वजह है कि इसे लंबी अवधि के समुद्री मिशनों के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। (Indian Navy Unmanned Interceptor Craft)
क्राफ्ट्स में लेयर्ड वेपन आर्किटेक्चर
इन क्राफ्ट्स में लेयर्ड वेपन आर्किटेक्चर दिया गया है। यानी ये अलग-अलग तरह के समुद्री खतरों से निपटने में सक्षम हैं। छोटे और तेज रफ्तार बोट्स, असिमेट्रिक हमले, या अचानक सामने आने वाले खतरे इन सबके लिए ये क्राफ्ट तैयार किए गए हैं। इसके फ्रंट में 12.7 मिलीमीटर एसआरसीजी (स्टेबलाइज्ड रिमोट कंट्रोल गन) लगाई गई है, जो क्लोज-रेंज फायरपावर देती है। इसके जरिए तेज रफ्तार से आने वाली छोटी बोट्स या संदिग्ध टारगेट्स पर सटीक फायर किया जा सकता है। इसके अलावा यह प्लेटफॉर्म शॉर्ट-रेंज मिसाइल्स और लॉइटरिंग अम्युनिशन भी डिप्लॉय कर सकता है, जिन्हें ड्रोन जैसे स्मार्ट हथियारों की श्रेणी में रखा जाता है। इससे यह न सिर्फ असिमेट्रिक थ्रेट्स, बल्कि हाई-इंटेंसिटी कॉम्बैट सिचुएशंस में भी असरदार है।
इनमें रिमोट कंट्रोल गन, शॉर्ट-रेंज हथियार और आधुनिक सेंसर सिस्टम लगे हैं, जिससे ये दिन और रात दोनों समय ऑपरेशन कर सकते हैं। ऑटोनॉमस नेविगेशन सिस्टम की मदद से ये इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में भी बखूबी काम कर सकते हैं। (Indian Navy Unmanned Interceptor Craft)
बोट स्वार्म तकनीक क्यों है खास
इन अनमैन्ड इंटरसेप्टर क्राफ्ट्स की एक बड़ी ताकत बोट स्वार्म कैपेबिलिटी है। इसका मतलब यह है कि एक साथ कई क्राफ्ट्स को नेटवर्क के जरिए कंट्रोल किया जा सकता है। इससे यह एक तरह का फोर्स मल्टीप्लायर बन जाता है और ह्यूमन ऑपरेटर्स का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है। ये सभी क्राफ्ट्स मिलकर किसी बड़े इलाके की निगरानी कर सकते हैं या किसी लक्ष्य को चारों तरफ से घेर सकते हैं।
इसके अलावा लो-इंटेंसिटी मेरिटाइम ऑपरेशन्स, जैसे कोस्टल पैट्रोलिंग, समुद्री सीमाओं की निगरानी और चोक पॉइंट्स जैसे स्ट्रेट्स या संकरे समुद्री रास्तों पर हॉट पर्स्यूट ऑपरेशन्स में भी यह प्लेटफॉर्म काफी उपयोगी है।
सबसे अहम बात यह है कि यह प्लेटफॉर्म रिकॉन्फिगरेबल है। यानी जरूरत के मुताबिक इसे सिर्फ आईएसआर मिशन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है या फिर इसे पूरी तरह कॉम्बैट रोल में ढाला जा सकता है।
इस तकनीक से समुद्र में नौसैनिक उतारने की जरूरत नहीं पड़ती, और कम समय में ज्यादा क्षेत्र को सुरक्षित किया जा सकता है। भविष्य की नेवल बैटल्स में स्वार्म टेक्नोलॉजी को बेहद अहम माना जा रहा है। (Indian Navy Unmanned Interceptor Craft)
भारतीय नौसेना को क्या मिलेगा फायदा
अब तक भारतीय नौसेना कुछ हद तक इजरायल में बने अनमैन्ड सरफेस वेसल्स पर निर्भर रही है, लेकिन वे मुख्य रूप से माइन काउंटर मेजर्स के लिए इस्तेमाल होते थे। पहली बार नौसेना को पूरी तरह हथियारबंद और स्वदेशी अनमैन्ड इंटरसेप्टर क्राफ्ट मिल रहे हैं।
इन अनमैन्ड इंटरसेप्टर क्राफ्ट्स के शामिल होने से भारतीय नौसेना की तटीय सुरक्षा और रैपिड रिस्पॉन्स क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। ये क्राफ्ट बंदरगाहों, समुद्री चोक पॉइंट्स और संवेदनशील इलाकों में चौबीसों घंटे निगरानी रख सकते हैं।
इसके अलावा, इंडियन ओशन रीजन में बढ़ती विदेशी नौसैनिक गतिविधियों के बीच ये प्लेटफॉर्म नौसेना के लिए एक मजबूत फोर्स मल्टीप्लायर साबित हो सकते हैं।
इस प्रोजेक्ट से आत्मनिर्भर भारत को मजबूती मिली है। इसकी वजह है कि इस टेक्नोलॉजी को देश में ही डेवलप किया गया है, साथ ही स्टार्ट-अप्स को भी बढ़ावा मिला है और विदेशी निर्भरता भी कम हुई है। (Indian Navy Unmanned Interceptor Craft)


