📍नई दिल्ली | 4 Feb, 2026, 10:07 PM
India US P-8I deal: भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील होते ही डिफेंस सहयोग एक बार फिर रफ्तार पकड़ता दिख रहा है। दोनों देशों के बीच करीब 3 अरब डॉलर, यानी लगभग 25 हजार करोड़ रुपये की एक बड़ी डिफेंस डील पर सहमति बन सकती है। यह डील भारतीय नौसेना के लिए पी-8आई एंटी-सबमरीन वॉरफेयर और मैरीटाइम सर्विलांस एयरक्राफ्ट की खरीद से जुड़ी है। जानकारी के मुताबिक, भारत छह अतिरिक्त पी-8आई विमान खरीदने जा रहा है।
कहा जा रहा है कि हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील के बाद दोनों देशों के रिश्तों में जो गर्मजोशी आई है, उसी का असर इस डिफेंस डील पर भी दिखाई दे रहा है। बीते कुछ सालों से यह सौदा कीमत को लेकर अटका हुआ था, लेकिन अब बातचीत फिर से पटरी पर लौटती नजर आ रही है। (India US P-8I deal)
India US P-8I deal: ट्रेड डील के बाद क्यों बढ़ी रफ्तार
पिछले कुछ समय में भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को लेकर तनाव की खबरें सामने आती रही थीं। टैरिफ और कीमतों से जुड़े मुद्दों के चलते कई डिफेंस डील्स भी लटक गई थीं। पी-8आई विमान की यह डील भी उन्हीं में से एक थी।
लेकिन फरवरी 2026 में भारत-अमेरिका के बीच जो नई ट्रेड डील फाइनल हुई, उसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के साथ व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने का साफ संदेश दिया है। इसी के बाद रक्षा सहयोग से जुड़े पुराने प्रस्तावों पर भी दोबारा गंभीरता से विचार शुरू हो गया है। पी-8आई डील उसी का नतीजा मानी जा रही है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अब यह प्रस्ताव जल्द ही रक्षा मंत्रालय के सामने रखा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद इसे कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी के पास भेजा जाएगा। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो आने वाले महीनों में इस डील पर अंतिम मुहर लग सकती है। (India US P-8I deal)
पी-8आई आखिर है क्या
पी-8आई कोई साधारण विमान नहीं है। यह एक ऐसा एयरक्राफ्ट है, जिसे खासतौर पर समुद्र के ऊपर लंबी दूरी तक निगरानी और दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे अमेरिकी कंपनी बोइंग ने तैयार किया है और यह पी-8 पोसाइडन का भारतीय वर्जन है।
सरल शब्दों में कहें तो पी-8आई भारतीय नौसेना की आंख और कान है। यह हजारों किलोमीटर तक उड़ान भरकर समुद्र के ऊपर होने वाली हर गतिविधि पर नजर रख सकता है। दुश्मन की पनडुब्बी चाहे पानी के नीचे कितनी ही गहराई में क्यों न हो, यह विमान उसे पकड़ने की क्षमता रखता है। (India US P-8I deal)
खासियत इसकी लॉन्ग रेंज और एडवांस्ड सेंसर्स
पी-8आई की सबसे बड़ी खासियत इसकी लॉन्ग रेंज और एडवांस्ड सेंसर्स हैं। यह विमान करीब 7500 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तक उड़ सकता है और कई घंटों तक समुद्र के ऊपर पेट्रोलिंग कर सकता है। इसकी रफ्तार भी काफी तेज है, जिससे जरूरत पड़ने पर यह तुरंत किसी इलाके में पहुंच सकता है।
इस विमान में लगे आधुनिक रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल कैमरे और साउंड डिटेक्शन सिस्टम समुद्र के अंदर और ऊपर दोनों जगह की गतिविधियों को पकड़ सकते हैं। पनडुब्बियों की पहचान के लिए इसमें खास तरह के सोनार बुआय लगाए जाते हैं, जो पानी के अंदर आवाजों को पकड़कर विमान तक जानकारी भेजते हैं।
जरूरत पड़ने पर यह विमान टॉरपीडो, डेप्थ चार्ज और एंटी-शिप मिसाइल भी दाग सकता है। यानी यह सिर्फ निगरानी ही नहीं करता, बल्कि सीधे कार्रवाई भी कर सकता है। (India US P-8I deal)
भारतीय नौसेना के पास पहले से मौजूद बेड़ा
हालांकि भारतीय नौसेना के बेड़े में पहले से ही पी-8आई विमान शामिल हैं। भारत ने सबसे पहले साल 2009 में इन विमानों की खरीद का फैसला किया था। उस समय आठ पी-8आई विमान खरीदे गए थे, जिनकी डिलीवरी 2013 से शुरू हुई।
इसके बाद साल 2016 में चार और विमान खरीदे गए। इस तरह फिलहाल भारतीय नौसेना के पास कुल 12 पी-8आई विमान ऑपरेशनल स्थिति में हैं। ये विमान तमिलनाडु के अरक्कोनम और गोवा के हंसा एयरबेस से उड़ान भरते हैं और भारत के पूर्वी और पश्चिमी समुद्री इलाकों पर नजर रखते हैं।
इन विमानों ने पिछले कुछ सालों में अपनी उपयोगिता कई बार साबित की है। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों पर नजर रखने में इनकी भूमिका बेहद अहम रही है। (India US P-8I deal)
छह और विमान क्यों जरूरी
अब सवाल उठता है कि जब पहले से 12 पी-8आई मौजूद हैं, तो छह और की जरूरत क्यों पड़ी। इसका जवाब हिंद महासागर में तेजी से बदलते हालात में छुपा है।
चीन की नौसेना लगातार अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है। चीनी पनडुब्बियां और युद्धपोत अब अक्सर हिंद महासागर क्षेत्र में देखे जा रहे हैं। इसके अलावा पाकिस्तान की पनडुब्बी क्षमता भी धीरे-धीरे मजबूत हो रही है। ऐसे में भारत के लिए समुद्री निगरानी और एंटी-सबमरीन क्षमता को और मजबूत करना जरूरी हो गया है।
छह नए पी-8आई विमानों के आने से भारतीय नौसेना की पकड़ और मजबूत होगी। इससे पूर्वी अफ्रीका से लेकर मलक्का स्ट्रेट तक के विशाल समुद्री इलाके पर बेहतर नजर रखी जा सकेगी। (India US P-8I deal)
क्यों अटकी थी यह डील
इस डील की कहानी नई नहीं है। साल 2019 में ही भारतीय नौसेना ने छह अतिरिक्त पी-8आई विमानों की जरूरत बताई थी। इसके बाद 2021 में अमेरिका ने इस सौदे को मंजूरी भी दे दी थी। उस वक्त इसकी कीमत करीब 2.4 अरब डॉलर आंकी गई थी।
लेकिन इसके बाद कीमतों को लेकर बातचीत अटक गई। वैश्विक महंगाई, सप्लाई चेन की दिक्कतों और टैरिफ बढ़ने की वजह से कीमत बढ़ती चली गई। कुछ रिपोर्ट्स में यह कीमत 3.5 से 4 अरब डॉलर तक पहुंचने की बात कही गई। इसी वजह से भारत ने सौदे को आगे बढ़ाने में सावधानी बरती और मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
अब ट्रेड डील के बाद दोनों देश फिर से बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं। (India US P-8I deal)
नौसेना की ताकत में होगा बड़ा इजाफा
अगर यह डील फाइनल होती है, तो भारतीय नौसेना के लिए यह एक बड़ा बूस्ट साबित होगी। पी-8आई विमान नौसेना की एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमता की रीढ़ हैं। इनके साथ-साथ भारत आने वाले वर्षों में सी गार्डियन ड्रोन और अन्य निगरानी प्लेटफॉर्म भी शामिल कर रहा है।
मानव चालित विमानों और ड्रोन की यह जुगलबंदी समुद्री सुरक्षा को नई ऊंचाई पर ले जाएगी। दुश्मन की हर हरकत पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर तुरंत जवाब देना आसान हो जाएगा। (India US P-8I deal)


