📍नई दिल्ली | 29 Jan, 2026, 9:48 PM
Suryastra rocket launcher: भारतीय सेना को ‘सूर्यास्त्र’ यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम की दो यूनिट्स मिल गई हैं। अब इन सिस्टम्स के लाइव-फायर ट्रायल्स की तैयारी चल रही है, जो आने वाले महीनों में किए जाएंगे। अगर ये फायरिंग टेस्ट सफल रहते हैं, तो सेना स्तर पर बड़े ऑर्डर यानी रेजिमेंटल लेवल इंडक्शन का रास्ता साफ हो सकता है।
सूर्यास्त्र सिस्टम को इसी सप्ताह हुई गणतंत्र दिवस परेड और 15 जनवरी को जयपुर में हुई आर्मी डे परेड में पहली बार सार्वजनिक तौर पर दिखाया गया था। कार्तव्य पथ पर इसकी मौजूदगी ने साफ संकेत दिया कि भारतीय सेना अब लंबी दूरी की, सटीक और तेजी से वार करने वाली रॉकेट आर्टिलरी को प्राथमिकता दे रही है। (Suryastra rocket launcher)
Suryastra rocket launcher: ऑपरेशन सिंदूर के बाद सामने आई जरूरत
सूर्यास्त्र की जरूरत ऑपरेशन सिंदूर के बाद और ज्यादा साफ हुई। इस ऑपरेशन के दौरान सेना ने महसूस किया कि दुश्मन के इलाके के अंदर तक सटीक हमला करने के लिए डीप-स्ट्राइक रॉकेट कैपेबिलिटी बेहद जरूरी है। खासतौर पर तब, जब पड़ोसी देशों के पास लंबी दूरी के गाइडेड रॉकेट और मिसाइल सिस्टम मौजूद हैं।
रक्षा सूत्रों के मुताबिक, इसी अनुभव के आधार पर भारतीय सेना ने सूर्यास्त्र जैसे सिस्टम को इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट रूट के जरिए हासिल करने का फैसला लिया, ताकि लंबी खरीद प्रक्रिया में समय न जाए और तुरंत ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाई जा सके। (Suryastra rocket launcher)
इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट के तहत हुई डील
भारतीय सेना ने यह सौदा इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट (ईपी) नियमों के तहत किया है। इस रूट के जरिए सेना 300 करोड़ रुपये तक के हथियार और सिस्टम तुरंत खरीद सकती है, बशर्ते उनकी परफॉर्मेंस पहले से जानी-पहचानी हो।
इस मामले में सूर्यास्त्र के लिए करीब 292 करोड़ रुपये का शुरुआती कॉन्ट्रैक्ट किया गया है। इस डील में दो लॉन्चर, स्पेयर पार्ट्स, जरूरी म्यूनिशन और पूरा सपोर्ट पैकेज शामिल है। सेना को दो लॉन्चर के साथ एक रिप्लेनिशमेंट-कम-लोडर व्हीकल भी मिला है, जो फील्ड में रॉकेट्स को तेजी से लोड करने में मदद करता है। (Suryastra rocket launcher)
कौन बना रहा है सूर्यास्त्र
सूर्यास्त्र को भारत में निबे लिमिटेड (NIBE Limited) बना रही है, जो एक प्राइवेट डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कंपनी है। इसमें तकनीकी सहयोग इजरायल की मशहूर डिफेंस कंपनी एल्बिट सिस्टम्स का है।
एल्बिट सिस्टम्स के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट एक तरह से लीड प्रोग्राम है। यानी पहले छोटे पैमाने पर सिस्टम दिया गया है और लाइव-फायर डेमॉन्स्ट्रेशन के बाद इसे बड़े स्तर पर बढ़ाया जा सकता है। एल्बिट इस सिस्टम में फायर कंट्रोल, एडवांस म्यूनिशन और सिस्टम इंटीग्रेशन का काम संभाल रही है, जबकि लॉन्चर का निर्माण भारत में किया जा रहा है। (Suryastra rocket launcher)
सूर्यास्त्र क्या है और क्यों है खास
सूर्यास्त्र असल में एक यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम है, जो इजरायल के पीयूएलएस (PULS – प्रिसाइज एंड यूनिवर्सल लॉन्चिंग सिस्टम) पर आधारित है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक ही प्लेटफॉर्म से अलग-अलग रेंज और अलग-अलग कैलिबर के रॉकेट और मिसाइल फायर किए जा सकते हैं।
इस सिस्टम को ट्रक पर लगाया गया है, जिससे इसकी मोबिलिटी बहुत ज्यादा है। फायर करने के बाद यह तुरंत अपनी जगह बदल सकता है। इसे ही “शूट-एंड-स्कूट” क्षमता कहा जाता है, जो दुश्मन के काउंटर-फायर से बचने में बेहद अहम होती है। (Suryastra rocket launcher)
150 से 300 किलोमीटर तक मार
सूर्यास्त्र की मारक क्षमता इसे बेहद खतरनाक बनाती है। एक लॉन्चर में दो तरह के म्यूनिशन लगाए जा सकते हैं।
पहला है 306 मिलीमीटर ‘एक्स्ट्रा’ प्रिसिजन-गाइडेड रॉकेट, जिसकी रेंज करीब 150 किलोमीटर है और इसमें लगभग 120 किलो का वारहेड होता है। दूसरा है 370 मिलीमीटर ‘प्रेडेटर हॉक’ टैक्टिकल मिसाइल, जो 300 किलोमीटर तक के टारगेट को मार सकती है और इसमें करीब 140 किलो का वारहेड लगा होता है।
इन दोनों म्यूनिशन की सटीकता बहुत ज्यादा है। इनका सीईपी (सर्कुलर एरर प्रोबेबलिटी) करीब 10 मीटर बताया जाता है, यानी टारगेट से बहुत कम दूरी पर वार कर सकती है।
सूर्यास्त्र की एक और बड़ी ताकत डिजिटल फायर ऑर्डर के साथ काम करने की क्षमता है। टारगेट की जानकारी मिलते ही सिस्टम बहुत कम समय में फायर कर सकता है। इससे दुश्मन को प्रतिक्रिया देने का मौका कम मिलता है।
सूत्र बताते हैं कि यह सिस्टम खासतौर पर कमांड सेंटर्स, एयरफील्ड्स, एयर डिफेंस साइट्स और आर्टिलरी पोजिशन जैसे हाई-वैल्यू टारगेट्स के लिए बनाया गया है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने फतह-2 गाइडेड रॉकेट दागने की कोशिश की थी, जिसे भारतीय सेना ने सिरसा के पास इंटरसेप्ट कर लिया था। पाकिस्तान दावा करता है कि इस रॉकेट की रेंज 400 किलोमीटर तक है।
वहीं चीन और पाकिस्तान दोनों के पास अलग-अलग रॉकेट और मिसाइल फोर्स हैं। इसी को देखते हुए सेना प्रमुख पहले ही कह चुके हैं कि भारत भी एक मजबूत रॉकेट-कम-मिसाइल फोर्स तैयार कर रहा है, जो बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और मल्टी-बैरेल रॉकेट लॉन्चर को एक साथ मैनेज कर सके।
सूर्यास्त्र उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। (Suryastra rocket launcher)
पिनाका और ब्रह्मोस के साथ तालमेल
भारतीय सेना के पास पहले से पिनाका जैसे मल्टी-बैरेल रॉकेट लॉन्चर हैं, जिनकी रेंज 70 से 120 किलोमीटर तक है। वहीं ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की रेंज अलग भूमिका निभाती है। सूर्यास्त्र इन दोनों के बीच का गैप भरता है। यह पिनाका से ज्यादा दूर मार कर सकता है और ब्रह्मोस की तुलना में कम खर्चीला है।
अब सबकी नजरें आने वाले लाइव-फायर ट्रायल्स पर टिकी हैं। अगर ये टेस्ट सफल रहते हैं, तो भारतीय सेना सूर्यास्त्र को बड़े पैमाने पर शामिल कर सकती है। इससे न सिर्फ सेना की डीप-स्ट्राइक क्षमता बढ़ेगी, बल्कि मेक इन इंडिया के तहत भारत में रॉकेट आर्टिलरी के उत्पादन को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। (Suryastra rocket launcher)


