📍नई दिल्ली / शोपियां | 6 Feb, 2026, 2:49 PM
Shopian Kashmir Peace: कश्मीर 1990 और 2000 के दशक में डर, तनाव और आतंकवाद की खबरों से जुड़ा रहता था। खासकर दक्षिण कश्मीर का शोपियां इलाका, जहां हर कदम पर खतरा और हर मोड़ पर ऑपरेशन हुआ करता था। लेकिन अब उसी शोपियां से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने लोगों को भावुक भी किया और उम्मीद से भर भी दिया।
करीब 30 साल तक भारतीय सेना में सेवा दे चुके रिटायर्ड ब्रिगेडियर दीप भगत जब हाल ही शोपियां लौटे, तो वह किसी मिलिट्री ऑपरेशन में नहीं थे। इस बार न उनके हाथों में हथियार थे, न शरीर पर बुलेटप्रूफ जैकेट और न ही साथ में कोई सुरक्षा दस्ता। वह एक आम पर्यटक की तरह बाइक पर सवार होकर शोपियां पहुंचे थे। उनका यही अनुभव अब सोशल मीडिया पर लाखों लोगों के दिल को छू रहा है। (Shopian Kashmir Peace)
Shopian Kashmir Peace: “उस दौर में यह सोचना भी नामुमकिन था”
वीडियो में ब्रिगेडियर भगत कहते हैं कि जब वे 1990 और 2000 के दशक में कश्मीर में तैनात थे, तब उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि वे जीवन में कभी शोपियां वापस आएंगे और वह भी बिना हथियार के। उस दौर में शोपियां आतंकवाद और मुठभेड़ों के लिए जाना जाता था। हर कदम पर खतरा था और हर मूवमेंट पूरी तैयारी और हथियारों के साथ होती थी।
ब्रिगेडियर भगत बताते हैं कि करीब दो दशक पहले वह शोपियां में पूरे कॉम्बैट गियर में ऑपरेट कर रहे थे। हर मूवमेंट प्लानिंग के साथ होती थी। सड़कें खाली रहती थीं, माहौल तनाव से भरा होता था और हर पल सतर्क रहना जरूरी था। आज वही इलाका उन्हें खुले दिल से स्वागत करता दिखा। वीडियो में वह कहते हैं कि जब वह सेना में सर्विस थे, तब उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि वह अपने जीवन में शोपियां दोबारा बिना हथियार के देख पाएंगे। (Shopian Kashmir Peace)
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लेकिन उनकी यह हालिया यात्रा बिल्कुल अलग थी। इस बार वह एक आम नागरिक की तरह बाइक पर शोपियां पहुंचे। खुले रास्ते थे, आसपास शांति थी और स्थानीय लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह बदलाव देखकर उन्हें गर्व और सुकून दोनों महसूस हुआ। उनका कहना है कि यह बदलाव सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए उम्मीद का संकेत है। जिन इलाकों में कभी गोलियों की आवाज सुनाई देती थी, वहां आज सैलानियों की बातें और कैमरों की क्लिक सुनाई देती हैं। (Shopian Kashmir Peace)
शोपियां: आतंक से सेबों की खुशबू तक
अपने वीडियो में ब्रिगेडियर भगत ने कहा कि “शोपियां, जो कभी तनाव का नाम था, आज शांति के साथ मेरा स्वागत करता है। यही बदलाव है। यही उम्मीद है।”
कभी आतंकवाद का गढ़ माना जाने वाला शोपियां आज धीरे-धीरे अपनी नई पहचान बना रहा है। अब यह इलाका अपने सेब के बागानों, हरियाली और प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाने लगा है।
पिछले कुछ वर्षों में शोपियां और इसके आसपास के इलाकों जैसे अहारबल और यूसमर्ग में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। यहां के झरने, पहाड़ और शांत माहौल लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।
सुरक्षा हालात में सुधार, इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिशों ने इस इलाके की तस्वीर बदल दी है। (Shopian Kashmir Peace)
सोशल मीडिया पर भावनाओं का सैलाब
उनके वीडियो को 4.4 लाख से ज्यादा लोग देख चुके थे और हजारों लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने भारतीय सेना और सुरक्षाबलों का धन्यवाद किया। कुछ लोगों ने अपने निजी अनुभव साझा किए और बताया कि उन्होंने हाल के वर्षों में कश्मीर की यात्रा की और खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस किया।
एक यूजर ने लिखा कि वह फरवरी 2024 में दोस्तों के साथ बाइक से शोपियां, अहारबल और यूसमर्ग गया था और यह जगह न सिर्फ सुरक्षित थी, बल्कि बेहद खूबसूरत भी। पर्यटन बढ़ने का मतलब है कि लोगों का भरोसा लौट रहा है। होटल, होमस्टे, टैक्सी चालक और स्थानीय दुकानदारों की आमदनी बढ़ रही है। यह बदलाव धीरे-धीरे कश्मीर की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रहा है।
एक यूजर ने लिखा कि वीडियो देखकर साफ महसूस होता है कि ब्रिगेडियर भगत उन साथियों को याद कर रहे होंगे, जिन्होंने इस धरती पर शांति के लिए अपनी जान दे दी। कई लोगों ने राष्ट्रीय रायफल्स और स्पेशल फोर्सेस यूनिट्स का खास तौर पर जिक्र किया, जिन्होंने वर्षों तक कठिन परिस्थितियों में ऑपरेशन चलाए। (Shopian Kashmir Peace)


