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पाकिस्तान-बांग्लादेश सीधी फ्लाइट शुरू होने से आतंकियों को मिल रहा सुरक्षित रास्ता, ढाका पहुंचे लश्कर के कई खूंखार आतंकी

30 जनवरी को बिमान बांग्लादेश एयरलांइस की फ्लाइट बीजी-342 कराची के जिन्ना इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरकर ढाका के हजरत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुबह करीब 4 बजकर 20 मिनट पर उतरी...

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📍नई दिल्ली/ढाका | 2 Feb, 2026, 12:15 PM

Karachi Dhaka flight Lashkar-e-Taiba: पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच सीधी फ्लाइट क्या शरू हुई कि आतंकियों को ढाका तक पहुंचने का सीधा और सुरक्षित रास्ता मिल गया है। हाल ही में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान से बांग्लादेश आने वाली एक कमर्शियल फ्लाइट के जरिए कुख्यात आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा से जुड़े कुछ आतंकवादी ढाका पहुंचे हैं। यह उड़ान कराची–ढाका रूट पर 14 साल बाद दोबारा शुरू हुई है और इसे दोनों देशों के बीच रिश्तों में “नया भरोसा” बताया जा रहा है। (Karachi Dhaka flight Lashkar-e-Taiba)

Karachi Dhaka flight Lashkar-e-Taiba: कराची–ढाका फ्लाइट बीजी-342 से पहुंचे आतंकी

30 जनवरी को बिमान बांग्लादेश एयरलांइस की फ्लाइट बीजी-342 कराची के जिन्ना इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरकर ढाका के हजरत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुबह करीब 4 बजकर 20 मिनट पर उतरी। फ्लाइट में कुल 113 यात्री सवार थे। सूत्रों का दावा है कि इस फ्लाइट में कुछ ऐसे यात्री भी थे, जिनके संबंध लश्कर-ए-तैयबा से था। इस फ्लाइट में लगभग 28 ऐसे यात्री थे, जिनके संबंध लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों से हैं। सूत्र ने आगे बताया कि इन लश्कर आतंकवादियों में से कम से कम चार तेज शूटर हैं। इनमें से एक आतंकी शाह मुकामिल है, जिसका पासपोर्ट नंबर: DK-5144924 है, यह आतंकी लश्कर ए तैबया यूनिट का रिंगलीडर है। इसके अलावा नबी मुहताज (पासपोर्ट नंबर AP-9099953), अनवर सज्जाद (पासपोर्ट नंबर KH-1798374), मनूर घाली, खान खानावाज, कलाम नूर, इब्राहिम, रसूल मोहम्मद, खान मुकरब, सफिर उल्लाह और जान सालेह भी इसी फ्लाइट से बांग्लादेश पहुंचे हैं। (Karachi Dhaka flight Lashkar-e-Taiba)

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पासपोर्ट और ट्रैवल पैटर्न से गहराया शक

जिन यात्रियों पर शक जताया गया है, उनके ट्रैवल पैटर्न, पाकिस्तान से बार-बार आवाजाही और यात्रा के समय को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि आतंकी संगठन अक्सर नए या दोबारा खुले ट्रैवल रूट्स का इस्तेमाल करते हैं, ताकि शुरुआती दौर में सुरक्षा जांच की कमजोरियों को परखा जा सके। यही वजह है कि 14 साल बाद शुरू हुई इस फ्लाइट को लेकर अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत बताई जा रही थी। (Karachi Dhaka flight Lashkar-e-Taiba)

तबलीगी जमात की आड़ का दावा

इन संदिग्ध यात्रियों में से कुछ लोगों ने खुद को तबलीगी जमात से जुड़ा बताकर यात्रा की थी और ढाका पहुंचने के बाद वे अलग-अलग मस्जिदों और धार्मिक ठिकानों में चले गए। सूत्रों का कहना है कि इससे पहले भी आतंकी नेटवर्क धार्मिक यात्राओं और जमातों की आड़ में मूवमेंट करते रहे हैं। हालांकि, इसे लेकर बांग्लादेशी एजेंसियों की तरफ से कोई औपचारिक बयान नहीं आया है। (Karachi Dhaka flight Lashkar-e-Taiba)

‘स्ट्रैंडेड पाकिस्तानियों’ का एंगल

इस पूरे मामले में एक और एंगल भी देखा जा रहा है। इसी रूट के शुरू होने के दौरान बांग्लादेश से कुछ ‘स्ट्रैंडेड पाकिस्तानी’ (बांग्लादेश में फंसे पाकिस्तानी मूल के लोग) पाकिस्तान भेजे गए थे। जहां पाकिस्तान पहुंचने के बाद उन्हें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के अधिकारियों ने रिसीव किया। उन्हें पाकिस्तान में आईईडी, सुसाइड अटैक और कोवर्ट ऑपरेशंस की ट्रेनिंग दी गई। जिसका उद्देश्य बांग्लादेश में आतंकवाद को बढ़ावा देना और भारत के खिलाफ हमले की योजना बनाना हो सकता है। (Karachi Dhaka flight Lashkar-e-Taiba)

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‘ढाका सेल’ हुई एक्टिव

इन आरोपों के केंद्र में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस यानी आईएसआई का नाम भी आ रहा है। बांग्लादेश के भीतर आईएसआई से जुड़ा एक नेटवर्क, जिसे ‘ढाका सेल’ कहा जा रहा है, वह भी सक्रिय हो गया है। यह सेल एक स्पेशल यूनिट है जो पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस ने ढाका में तैयार की है।

खुफिया सूत्रों ने बताया कि पिछले साल नवंबर में आईएसआई ने ढाका में पाकिस्तान हाई कमीशन के अंदर यह खास सेल बनाई थी। यह सेल जनरल साहिर शमशाद मिर्जा (पाकिस्तान के चेयरमैन जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमिटी) की ढाका यात्रा के बाद बनाई गई थी। इस सेल को एक ब्रिगेडियर हेड कर रहा है, इसमें एक कर्नल, कई मेजर, और पाकिस्तान आर्मी, नेवी, एयर फोर्स के अधिकारी शामिल हैं। ये लोग फेक आईडेंटिटी या डिप्लोमैटिक कवर से ढाका आए हैं। हर महीने इस सेल पर करीब 20 करोड़ टका (बांग्लादेशी मुद्रा) खर्च होते है, और यह रकम जो ड्रग्स, तस्करी और काउंटरफिट इंडियन करेंसी से आती है।

बताया जाता है कि ढाका सेल ने ही इन आतंकियों के डॉक्यूमेंट्स तैयार कराए, और सुरक्षित यात्रा के अलावा शुरुआती वैरिफिकेशन और लॉजिस्टिक सपोर्ट में अहम भूमिका निभाई। (Karachi Dhaka flight Lashkar-e-Taiba)

भारत के लिए बढ़ी चिंता

वहीं आतंकियों का इस तरह सुरक्षित तरीके से ढाका तक पहुंचना भारत के लिए चिंता की बात है। अगर बांग्लादेश की जमीन का इस्तेमाल किसी भी तरह से भारत विरोधी साजिशों के लिए होता है, तो इससे पूर्वी सीमा पर नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। हालांकि भारतीय एजेंसियां बांग्लादेश सीमा पर पहले से ही हाई अलर्ट पर हैं, लेकिन कुछ इलाके अब भी संवेदनशील बने हुए हैं। (Karachi Dhaka flight Lashkar-e-Taiba)

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बांग्लादेश के सामने दोहरी चुनौती

बांग्लादेश के लिए यह मामला बेहद नाजुक है। एक तरफ उसे अपनी आंतरिक सुरक्षा और इमेज को लेकर सख्त कदम उठाने होंगे, वहीं दूसरी तरफ भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह भरोसा भी देना होगा कि उसकी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी साजिश के लिए नहीं होने दिया जाएगा।

विश्लेषकों का कहना है कि अगर इन आरोपों की अनदेखी की गई, तो बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय दबाव, डिप्लोमैटिक सवालों और यहां तक कि सुरक्षा सहयोग में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। (Karachi Dhaka flight Lashkar-e-Taiba)

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