📍नई दिल्ली | 8 Aug, 2025, 7:13 PM
LUH RFI: रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेनाओं के नए टोही और निगरानी हेलिकॉप्टरों (रिकॉनिसेंस एंड सर्विलांस हेलिकॉप्टर – RSH) की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए मौजूदा चेतक और चीता हेलिकॉप्टर बेड़े को बदलने की योजना के तहत रक्षा मंत्रालय ने रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन जारी की है। इसके तहत कुल लगभग 200 हेलिकॉप्टर खरीदे जाएंगे, जिनमें 120 भारतीय सेना और 80 भारतीय वायुसेना के लिए होंगे।
LUH RFI: इन कामों में होंगे इस्तेमाल
इन हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल दिन और रात में विभिन्न मिशनों के लिए किया जाएगा। इनका इस्तेमाल टोही और निगरानी, छोटे दस्ते या क्विक रिएक्शन टीम की तैनाती, ग्राउंड ऑपरेशंस में आंतरिक और बाहरी लोड ले जाना, अटैक हेलिकॉप्टर के साथ स्काउट मिशन, खोज और बचाव अभियान और सिविल एडमिनिस्ट्रशन को इमरजेंसी सपोर्ट जैसे कामों में किया जाएगा। आरएफआई में स्पष्ट किया गया है कि ये हेलीकॉप्टर ढलान वाले हेलीपैड, बर्फ, रेत और पानी से ढके क्षेत्रों में उतरने और उड़ान भरने में सक्षम होना चाहिए। इसके अलावा, इनमें आकाशीय बिजली से सुरक्षा, गोला-बारूद से बचाव और लंबे समय तक खुले में खड़े रहने की क्षमता होनी चाहिए।
LUH Vs H125M Helicopter: क्या भारतीय सेना की पसंद बनेगा HAL का लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर, या फ्रांस का H125M मार ले जाएगा बाजी? क्या होगा मेक इन इंडिया का? https://t.co/pbm8h4pCxy
LUH vs H125M Helicopter: Indian Army Choice – HAL or Airbus?#LUH #H125MHelicopter #LUHvsH125M…— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) February 27, 2025
LUH RFI: नाइट विजन गॉगल से हों लैस
वहीं, ये नए हेलिकॉप्टर सिंगल या ट्विन इंजन डिजाइन के हो सकते हैं और इनमें अधिकतम पेलोड क्षमता, ऊंचाई पर उड़ान और विभिन्न मौसम परिस्थितियों में काम करने की क्षमता होनी चाहिए। फ्यूल सिस्टम की बात करें, तो इनमें हॉट रिफ्यूलिंग और प्रेशर रिफ्यूलिंग की सुविधा, साथ ही प्रोजेक्टाइल से सुरक्षा अनिवार्य होगी। कॉकपिट नाइट विजन गॉगल (NVG) से लैस होना चाहिए और इसमें ऑटो-पायलट, आधुनिक एवियोनिक्स और एडवांस कम्यूनिकेशन सिस्टम होना चाहिए।
LUH RFI: इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के खतरों से सुरक्षा
साथ ही, नए हेलिकॉप्टर ऐसे होने चाहिए जो हथियारों और मिशन सिस्टम के साथ इंटीग्रेट किए जा सकें। इनमें रॉकेट, गन पॉड, एंटी-टैंक मिसाइल, एयर-टू-एयर मिसाइल और पिंटल माउंटेड गन लगाए जा सकें। इनके साथ सर्विलांस सिस्टम, लॉइटर म्यूनिशन और डायरेक्टेड एनर्जी वेपन जैसे एडवांस इक्विपमेंट भी जोड़े जा सकें। आरएफआई में कहा गया है कि प्लेटफॉर्म में सेल्फ-प्रोटेक्शन सूट जैसे लेजर वार्निंग रिसीवर (LWR), रडार वार्निंग रिसीवर (RWR) और मिसाइल अप्रोच वार्निंग सिस्टम (MAWS) लगाए जा सकें, ताकि इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर खतरों से भी सुरक्षा मिल सके।

‘मेक इन इंडिया’ और ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी को प्राथमिकता
सरकार ने इस खरीद प्रक्रिया में विदेशी निर्माताओं को भी मौका दिया है। सरकार ने आरएफआई में साफ किया है ‘मेक इन इंडिया’ और ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (ToT) सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। मतलब, जो भी कंपनी ये हेलिकॉप्टर बनाएगी, उसे जरूरी तकनीक भारत को देनी होगी और यहां पर ही फैक्ट्री लगाकर उत्पादन करना होगा। ToT के तहत पावर प्लांट, रोटर सिस्टम, ट्रांसमिशन सिस्टम, एवियोनिक्स और बाकी जरूरी हिस्सों की तकनीक भारत लाई जाएगी, ताकि उनका निर्माण देश में हो सके। इसके साथ ही कंपनियों को यह भी बताना होगा कि हेलिकॉप्टर में कितनी स्वदेशी सामग्री इस्तेमाल होगी, वे किन कंपनियों के साथ साझेदारी करेंगी और उनकी उत्पादन क्षमता कितनी है।
ट्रायल इवैल्यूएशन ‘नो कॉस्ट, नो कमिटमेंट’ आधार पर
आरएफआई में बताया गया है कि ट्रेनिंग के लिहाज से सप्लायर्स को यह बताना होगा कि क्या हेलिकॉप्टर बिना किसी विशेष बदलाव के ट्रेनिंग मिशन के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। पायलट और तकनीकी कर्मचारियों के लिए ट्रेनिंग कार्यक्रम, सिम्युलेटर और वर्चुअल मेंटेनेंस ट्रेनर की उपलब्धता भी स्पष्ट करनी होगी। वहीं, यह खरीद प्रक्रिया ‘सिंगल स्टेज–टू बिड सिस्टम’ के तहत पूरी होगी, जिसमें टेक्निकल और फाइनेंशियल प्रपोजल अलग-अलग लिफाफों में जमा होंगे। तकनीकी मूल्यांकन के बाद हेलिकॉप्टरों का ट्रायल इवैल्यूएशन ‘नो कॉस्ट, नो कमिटमेंट’ आधार पर किया जाएगा। वहीं, कॉन्ट्रैक्ट के सप्लायर को लाइफ टााइम स्पेयर पार्ट्स और मैंटेनेंस इक्विपमेंट्स उपलब्ध कराने होंगे।
मार्च में, भारतीय वायुसेना पहले ही काफी संख्या में यूटिलिटी हेलिकॉप्टरों और अन्य डिफेंस प्लेटफॉर्म की खरीद की योजना बना चुकी थी। संसद में पेश स्थायी रक्षा समिति की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025-26 के लिए प्रमुख प्रस्तावित खरीद में लो-लेवल रडार, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA), लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर (LUH), मल्टी-रोल हेलिकॉप्टर और किराए पर लिए जाने वाले मिड-एयर रिफ्यूलिंग विमान शामिल हैं।
इसके अलावा, कैबिनेट सिक्योरिटी कमेटी ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड से 45,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 156 लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर (LCH) खरीदने को भी मंजूरी दी है। ये 156 हेलिकॉप्टर, जो क्षमता में RSH जैसे हैं, जो भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना में बांटे जाएंगे। साथ ही, ये हेलीकॉप्टर चीन और पाकिस्तान सीमा पर मिशन में इस्तेमाल होंगे।