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Surya Dronathon 2025: स्पीति घाटी में भारतीय सेना का ‘सूर्य ड्रोनाथन 2025’, अगर ड्रोन सेक्टर में कुछ करने की है काबिलियत तो आप भी ले सकते हैं हिस्सा

पहला चरण 10 से 15 अगस्त 2025 और दूसरा चरण 20 से 24 अगस्त 2025 तक आयजित होगा...

'सूर्य ड्रोनाथन 2025' हिमाचल प्रदेश के सुमदो (Sumdo) में आयोजित होगा, जो स्पीति घाटी में समुद्र तल से लगभग 10,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां देश का सबसे ऊंचाई पर बना ड्रोन बाधा कोर्स (Obstacle Course) तैयार किया गया है, जहां प्रतियोगी कम ऑक्सीजन और तेज हवाओं में अपने ड्रोन की तकनीक, सटीकता और ताकत का प्रदर्शन करेंगे...
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📍नई दिल्ली | 30 Jul, 2025, 1:10 PM

Surya Dronathon 2025: हिमाचल प्रदेश की बर्फीली और दुर्गम स्पीति घाटी देश के सबसे बड़े मिलिट्री ड्रोन कंपटीशन की मेजबानी करने जा रही है। भारतीय सेना की ‘सूर्य कमान’ (Surya Command) और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया के सहयोग से ‘सूर्य ड्रोनाथन 2025’ (Surya Dronathon 2025) का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन आत्मनिर्भर भारत अभियान और सेना की आधुनिक तकनीक अपनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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Surya Dronathon 2025: कहां और कब होगा आयोजन?

‘सूर्य ड्रोनाथन 2025’ हिमाचल प्रदेश के सुमदो (Sumdo) में आयोजित होगा, जो स्पीति घाटी में समुद्र तल से लगभग 10,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां देश का सबसे ऊंचाई पर बना ड्रोन बाधा कोर्स (Obstacle Course) तैयार किया गया है, जहां प्रतियोगी कम ऑक्सीजन और तेज हवाओं में अपने ड्रोन की तकनीक, सटीकता और ताकत का प्रदर्शन करेंगे।

इस कार्यक्रम का आयोजन दो चरणों में होगा। पहला चरण 10 से 15 अगस्त 2025 और दूसरा चरण 20 से 24 अगस्त 2025 तक आयजित होगा। प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 5 अगस्त 2025 है। इस प्रतियोगिता में सिर्फ पुरस्कार ही नहीं मिलेंगे, बल्कि विजेताओं को सेना के साथ काम करने का अवसर भी मिलेगा। उनके ड्रोन सिस्टम्स को आगे चलकर भारतीय सेना की ऑपरेशनल रणनीति में शामिल किया जा सकता है।

कौन-कौन ले सकता है हिस्सा?

इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए तीन अलग-अलग कैटेगरीज बनाई गई हैं, जिससे देश के हर कोने से जुड़ी प्रतिभाएं इसमें हिस्सा ले सकें। पहली श्रेणी उन सैन्यकर्मियों (Service Personnel) के लिए है जो भारतीय सेना में कार्यरत हैं, चाहे वे जवान हों या अधिकारी। उनके लिए विशेष श्रेणी तय की गई है, ताकि वे अपने अनुभव के आधार पर ड्रोन तकनीक को और बेहतर बनाने में योगदान दे सकें। दूसरी श्रेणी ओपन कैटेगरी की है, जिसमें टेक्नोलॉजी में रुचि रखने वाले आम नागरिक, छात्र, युवा इनोवेटर और फ्रीलांस पायलट हिस्सा ले सकते हैं। यह श्रेणी खास तौर पर उन लोगों के लिए है जो किसी संगठन से जुड़े हुए नहीं है। लेकिन उसके पास आइडियाज और स्किल्स हैं। तीसरी श्रेणी ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स यानी ओईएम के लिए रखी गई है, जिसमें ड्रोन बनाने वाली कंपनियां, स्टार्टअप्स और टेक इंडस्ट्री के अनुभवी खिलाड़ी अपने इनोवेशन के साथ हिस्सा ले सकते हैं।

प्रतियोगिता में क्या-क्या होगा?

इस प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को अपने ड्रोन की क्षमताएं केवल दिखानी ही नहीं हैं, बल्कि उन्हें चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में परखना भी होगा। ड्रोन रेस के जरिए यह देखा जाएगा कि प्रतिभागी कितनी तेजी, सटीकता और संतुलन के साथ अपने ड्रोन को कंट्रोल कर सकते हैं। इसके बाद ऑब्सटेकल ट्रायल की बारी आएगी, जहां प्रतिभागियों को अपने ड्रोन को एक जटिल और अवरोधों से भरे मार्ग में सफलतापूर्वक उड़ाना होगा। यह परीक्षण इस बात की कसौटी है कि ड्रोन जटिल ऑपरेशनल इलाकों में कितनी कुशलता से काम कर सकता है। सबसे अहम है फील्ड टेस्टिंग, जो स्पीति घाटी की असली ऊंचाई, पतली हवा और अचानक बदलते मौसम की परिस्थितियों में आयोजित किया जाएगा। यहां ड्रोन को वास्तविक युद्ध जैसी स्थितियों में जांचा जाएगा कि क्या वह ड्रोन तेज हवाओं का सामना कर सकता है, क्या उसका कम्यूनिकेशन सिस्टम इन पहाड़ियों में काम करती है, और क्या वह सैनिकों की जरूरत के अनुसार तुरंत कार्रवाई में सक्षम है। इन सभी ट्रायल्स का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कौन सा ड्रोन वाकई भारतीय सेना की जमीनी जरूरतों को पूरा कर सकता है, विशेषकर उन दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में जहां पारंपरिक तरीकों से निगरानी या सपोर्ट मुश्किल होता है।

क्या है इस आयोजन का उद्देश्य?

‘सूर्य ड्रोनाथन’ का मकसद है स्वदेशी ड्रोन तकनीक को बढ़ावा देना। यानि भारत में ही बने ड्रोन, उनके सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर को प्राथमिकता देकर आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम उठाना। साथ ही यह आयोजन इनोवेशन को भी बढ़ावा देना है। जहां कोई भी युवा या अनुभवी इनोवेटर अपनी प्रतिभा दिखा सकता है। इस ड्रोनाथन की एक खास बात यह भी है कि इसका सारा फोकस सेना की जमीनी जरूरतों को समझने और उन्हें पूरा करने वाले समाधान खोजने पर है। मतलब अब रक्षा टेक्नोलॉजी सिर्फ बड़ी कंपनियों के दायरे तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वो लोग भी इसमें हिस्सा ले सकते हैं जो सेना की चुनौतियों को करीब से समझते हैं चाहे वे स्टार्टअप हों, छात्र हों या फ्रीलांसर। यही नहीं, इस पहल के जरिए रक्षा क्षेत्र में सेना और उद्योगों के बीच सीधा संवाद और सहयोग भी बढ़ेगा।

News Desk
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