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Ran Samwad 2025 Training Reforms: भारतीय सेना में बड़े बदलाव की तैयारी, अब ट्रेनिंग में ड्रोन और साइबर वॉरफेयर होंगे शामिल

रण संवाद 2025 में सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि भविष्य के युद्ध टेक्नोलॉजी-आधारित होंगे। प्रशिक्षण में ड्रोन, साइबर सुरक्षा, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और इंफॉर्मेशन वॉरफेयर को शामिल करने की जरूरत बताई...

इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (HQ-IDS) के डिप्टी चीफ (Doctrine, Organisation & Training) लेफ्टिनेंट जनरल विपुल सिंघल ने कहा कि भविष्य के युद्धों में जीत का आधार जॉइंटनेस और ऑर्गनाइजेशन तालमेल होगा। उन्होंने कहा, “आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के बीच सामरिक एकजुटता और साझा प्रशिक्षण ही हमें भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों में बढ़त दिलाएगा।”
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📍मऊ, मध्यप्रदेश | 28 Aug, 2025, 3:36 PM

Ran Samwad 2025 Training Reforms: मध्यप्रदेश के मऊ स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में तीनों सेनाओं के संयुक्त रण संवाद 2025 सेमीनार में भारतीय सेना के टॉप अफसरों ने भविष्य के युद्ध की नई रूपरेखा पर चर्चा की। फोकस था, पारंपरिक ट्रेनिंग से आगे बढ़कर टेक्नोलॉजी-बेस्ड ट्रेनिंग मॉडल की ओर बढ़ना। रण संवाद के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 2027 तक भारतीय सेना के हर जवान को ड्रोन तकनीक की ट्रेनिंग दी जाएगी। वहीं, स्कूल ऑफ आर्टिलरी के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल एनएस सरना ने कहा कि भविष्य का युद्ध पारंपरिक नहीं बल्कि तकनीकी होगा और इसके लिए हमें सैनिकों को नए स्किल्स की ट्रेनिंग देनी होगी।

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Ran Samwad 2025 Training Reforms: बदलना होगा ट्रेनिंग स्ट्रक्चर

पिछले एक दशक में दुनिया भर में हुई हालिया जंगों में देखा गया है कि ड्रोन, साइबर हमले, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। जनरल सरना ने कहा कि यह संकेत है कि अगला युद्ध इन्हीं तकनीकों के इर्द-गिर्द लड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर हमें आने वाले संघर्षों के लिए तैयार रहना है तो हमें अपने ट्रेनिंग स्ट्रक्चर को पूरी तरह बदलना होगा।

लेफ्टिनेंट जनरल एनएस सरना ने ‘इंटीग्रेटिंग टेक्नोलॉजी फॉर वॉरफाइटिंग थ्रू ट्रेनिंग इनिशिएटिव्स’ पर बोलते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि हमारी मिलिट्री ट्रेनिंग इंस्टीट्यूशंस केवल शारीरिक क्षमता और पारंपरिक युद्ध तक सीमित न रहकर टेक्नोलॉजी वॉरफेयर के लिए भी तैयार हों।

उन्होंने कहा कि अधिकांश सैन्य अकादमियां अभी भी पारंपरिक युद्ध पर आधारित प्रशिक्षण देती हैं, जहां शारीरिक फिटनेस और बुनियादी रणनीति पर ज्यादा जोर होता है। लेकिन अब यह काफी नहीं है। नए समय की मांग है कि जवान साइबर सिक्योरिटी, ड्रोन ऑपरेशन, इंफॉर्मेशन वॉरफेयर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसे विषयों में भी एक्सपर्ट बनें।

उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धों को देखते हुए सैनिकों के लिए ऐसा ट्रेनिंग सिस्टम डेवलप करना जरूरी है, जो चुस्त और अनुकूलनशील हो और बदलती तकनीक के साथ कदम मिला सके। उनका कहना था कि सेना के प्रशिक्षण संस्थानों को तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र (Technology Training Hubs) के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने सिमुलेशन बेस्ड पाठ्यक्रम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वारगेमिंग और जॉइंट ट्रेनिंग इनिशिएटिव को पारंपरिक सैन्य शिक्षा में बड़ा परिवर्तनकारी कदम बताया। साथ ही उन्होंने एक राष्ट्रीय सैन्य डिजिटल ज्ञान भंडार (Military Digital Knowledge Repository) बनाने की सिफारिश की, ताकि आधुनिक ज्ञान और तकनीकी अनुभव को संस्थागत ढांचे में संरक्षित और साझा किया जा सके।

Ran Samwad 2025 Training Reforms: सिद्धांत, संगठन और ट्रेनिंग पर फोकस

इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (HQ-IDS) के डिप्टी चीफ (Doctrine, Organisation & Training) लेफ्टिनेंट जनरल विपुल सिंघल ने कहा कि भविष्य के युद्धों में जीत का आधार जॉइंटनेस और ऑर्गनाइजेशन तालमेल होगा। उन्होंने कहा, “आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के बीच सामरिक एकजुटता और साझा प्रशिक्षण ही हमें भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों में बढ़त दिलाएगा।”

उन्होंने कहा कि सैन्य प्रशिक्षण को लगातार अपडेट करते रहना होगा ताकि वह तकनीकी बदलावों के साथ तालमेल बना सके। उनके अनुसार, युद्ध की तैयारी के तीन स्तंभ हैं Doctrine (सिद्धांत), Organisation (संगठन) और Training (प्रशिक्षण)। इन तीनों का तालमेल ही कॉम्बैट रेडीनेस यानी युद्ध के लिए तैयार रहने की गारंटी है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल प्रशिक्षण को तकनीकी रूप से आधुनिक बनाया जा सकेगा, बल्कि विभिन्न सेनाओं के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान भी आसान होगा।

Ran Samwad 2025 Training Reforms: तीन प्रमुख क्षेत्रों पर दे ध्यान

सेंट्रल कमांड यानी सूर्या कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल सेनगुप्ता ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुश्मन की तरफ से बड़े पैमाने पर ड्रोन का इस्तेमाल देखने के बाद भारत अब तीन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दे रहा है। पहला, काउंटर-ड्रोन सिस्टम विकसित करना ताकि दुश्मन के ड्रोन खतरों को तुरंत न्यूट्रलाइज किया जा सके। दूसरा, ज्यादा से ज्यादा सैनिकों को ड्रोन चलाने और टैक्टिकल बैटल एरिया में इस्तेमाल करने का प्रशिक्षण देना। तीसरा, ऑटोनोमस हवाई हमलों के तरीके तैयार करना, ताकि दुश्मन की रणनीतियों का प्रभावी जवाब दिया जा सके। उन्होंने कहा कि अब ड्रोन कोई विकल्प नहीं रह गए हैं, बल्कि युद्ध के मैदान में प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं।

जनरल सेनगुप्ता ने कहा, “तकनीक को केवल सेंट्रल कमांड में ही नहीं, बल्कि पूरी भारतीय सेना में अपनाया जा रहा है। हर कमांड अपने ऑपरेशनल माहौल और चुनौतियों के हिसाब से इसे लागू कर रही है।” उन्होंने आगे कहा कि रण संवाद अब भारतीय सेनाओं के लिए गहन चर्चा, जॉइंट रिसर्च और मल्टी-डोमेन चैलेंजेस की तैयारी का अहम मंच बन चुका है। उन्होंने आगे कहा कि इस सेमिनार से मिले अनुभव और निष्कर्ष भारतीय सशस्त्र बलों को मानवीय जिम्मेदारियों और युद्धक तैयारी (combat readiness) के बीच संतुलन साधने में अहम भूमिका निभाएंगे।

ड्रोन और ऑटोमेटेड वेपन सिस्टम पर जोर

आर्मी ट्रेनिंग कमांड के ब्रिगेडियर रेवती भंडारी ने अनमैन्ड ऑटोनॉमस सिस्टम्स (UAS) यानी ड्रोन और ऑटोमेटेड वेपन सिस्टम पर बोलते हुए कहा कि ह्यूमन-मशीन टीमिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम मैनेजमेंट और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट के लिए ड्रोन का इस्तेमाल आने वाले समय में युद्ध का अहम हिस्सा बनेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि कई देशों ने पहले ही सर्विलांस, टारगेटिंग और सप्लाई के लिए बड़े पैमाने पर ड्रोन और बिना चालक वाले वाहन (UAVs) को शामिल कर लिया है। भारत को भी इसी दिशा में तेज कदम उठाने होंगे।

ब्रिगेडियर भंडारी ने दुनिया भर के मिलिट्री स्ट्रक्चर का उदाहरण देते हुए कहा कि अब वॉर स्ट्रक्चर्स को चरणबद्ध तरीके से सेमी-ऑटोनॉमस से पूरी तरह ऑटोनॉमस सिस्टम्स की ओर ले जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अगर भारत को 2035 तक ऑटोनॉमस कैपेबिलिटी हासिल करनी है तो उसे अभी से अपने ट्रेनिंग, डॉक्ट्रिन और स्ट्रक्चर में बदलाव करना होगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि ऑटोनॉमस सिस्टम्स के इस्तेमाल से कई कानूनी और नैतिक प्रश्न भी उठेंगे। ऐसे में प्रशिक्षण में इन पहलुओं को भी शामिल करना होगा।

सेना प्रमुख ने कही थी ये बात

बता दे कि इसी महीने चार अगस्त को सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आईआईटी मद्रास में ‘अग्निशोध’ रिसर्च सेंटर के उद्घाटन के दौरान ‘बूट्स से बॉट्स’ की कॉन्सेप्ट पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि भारतीय सेनाएं अब पारंपरिक सैन्य शक्ति (बूट्स) से तकनीक-आधारित युद्ध (बॉट्स) की ओर बढ़ रहे हैं, जिसमें नॉन कॉन्टैक्ट वॉर, स्ट्रेजेटिज मूमेंटम और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल शामिल है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए कहा था कि यह एक शतरंज के खेल की तरह था, जहां स्ट्रेटेजिकल और टेक्टिकल प्लानिंग के साथ दुश्मन को शह और मात दी गई। ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, और अन्य तकनीकों का इस्तेमाल कर सेना ने आतंकी ठिकानों को नष्ट किया। उन्होंने यह भी कहा कि नैरेटिव मैनेजमेंट के जरिए जनता तक सही संदेश पहुंचाना महत्वपूर्ण है, और इसके लिए सोशल मीडिया का उपयोग किया गया।

हरेंद्र चौधरीhttp://harendra@rakshasamachar.com
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवादों, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं। 📍 Location: New Delhi, in 🎯 Area of Expertise: Defence, Diplomacy, National Security
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