📍नई दिल्ली | 2 Aug, 2025, 11:23 AM
Lt Gen Pushpendra Singh next Vice Chief of Army Staff: लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह भारतीय सेना में वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ यानी उप सेना प्रमुख बनाए गए हैं। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि की जगह ली, जो 39 साल की शानदार सेवा के बाद 31 जुलाई को रिटायर हो गए। अपनी ज्वॉइनिंग के पहले दिन उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और श्रीलंका में ऑपरेशन पवन के दौरान शहीद हुए सैनिकों के परिवारों को सम्मानित किया।
Lt Gen Pushpendra Singh: 35 साल का शानदार मिलिट्री कैरियर
लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह का सेना में 35 साल से भी अधिक लंबा और शानदार करियर रहा है। लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। उन्होंने लखनऊ के ला मार्टिनियर कॉलेज और लखनऊ विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद भारतीय सैन्य अकादमी (IMA), देहरादून से प्रशिक्षण लेकर दिसंबर 1987 में 4 पैरा (स्पेशल फोर्सेस) में कमीशन प्राप्त किया। उनके पास मैनेजमेंट स्टडीज में मास्टर्स डिग्री और पंजाब यूनिवर्सिटी से एम.फिल की डिग्री है। उन्होंने DSSC वेलिंगटन, CDM हैदराबाद और IIPA दिल्ली से हायर कोर्स भी कर चुके हैं।
🇮🇳 NO ONE SHALL BE LEFT BEHIND 🙏
On his first day as Vice Chief of the Army Staff, Lt Gen Pushpendra Singh paid an emotional tribute to his fallen comrades from the IPKF operations in Sri Lanka.
🔸 A decorated Special Forces officer from 4 PARA, Lt Gen Singh was grievously… pic.twitter.com/lteBdCXzmE— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) August 1, 2025
हर बड़े मिलिट्री ऑपरेशन में लिया हिस्सा
पिछले 35 सालों में लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह ने कई अहम मिलिट्ररी ऑपरेशंस में हिस्सा लिया है। इनमें श्रीलंका में ऑपरेशन पवन, सियाचिन में ऑपरेशन मेघदूत, जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन रक्षक, पूर्वोत्तर भारत में ऑपरेशन ऑर्किड और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर ऑपरेशन स्नो लेपर्ड शामिल हैं। इसके अलावा, उन्होंने श्रीलंका और लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में भी भारत का नेतृत्व किया। उनकी बहादुरी और रणनीतिक नेतृत्व के लिए उन्हें दो बार अति विशिष्ट सेवा मेडल (एवीएसएम) और सेना मेडल से सम्मानित किया गया।
श्रीलंका में पहले मिशन से शुरू हुई वीरता की कहानी
लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह का करियर श्रीलंका में भारतीय शांति सेना (आईपीकेएफ) के ऑपरेशन पवन से शुरू हुआ। इस मिशन में 4 पैरा बटालियन को अक्टूबर 1987 में श्रीलंका भेजा गया था, जहां उसे जाफना और बाद में किलिनोच्ची में तैनात किया गया। 22 जुलाई 1989 को, जब वह एक युवा अफसर के तौर पर इरानमडु से किलिनोच्ची जा रहे थे, उनकी 13 सदस्यीय क्विक रिएक्शन टीम (क्यूआरटी) पर एलटीटीई आतंकवादियों ने घात लगाकर हमला किया। इस हमले में पांच सैनिक शहीद हो गए। खुद लेफ्टिनेंट पुष्पेंद्र सिंह समेत दो अन्य सैनिक भी इस हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बाद में उन्होंने जवाबी हमला कर चार आतंकवादियों को मार गिराया और कई को घायल किया।
पहले दिन ही दी शहीद साथियों को दी श्रद्धांजलि
01 अगस्त को उप सेनाध्यक्ष का पद संभालने के पहले ही दिन, लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह ने 22 जुलाई 1989 को शहीद हुए अपने उन जांबाज साथियों को याद किया जो श्रीलंका में उस ऑपरेशन के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए थे। उन्होंने उन वीर सैनिकों के परिवारजनों और वीर नारियों को राष्ट्रीय समर स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल) पर आमंत्रित किया और उनके साथ जाकर ‘त्याग चक्र’ पर पुष्पांजलि अर्पित की, जहां इन शहीदों के नाम अमर कर दिए गए हैं।
राइजिंग स्टार कोर के थे जीओसी
लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह ने अपने लंबे करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। अप्रैल 2022 में, उन्होंने हिमाचल प्रदेश के योल छावनी में राइजिंग स्टार कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) का पद संभाला। यह कोर 2005 में स्थापित हुई थी और जम्मू डिविजन में अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती है। इसके अलावा, उन्होंने सेंट्रल कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ और सेना मुख्यालय में महानिदेशक (ऑपरेशनल लॉजिस्टिक्स एंड स्ट्रैटेजिक मूवमेंट) के रूप में भी सेवाएं दीं। उन्होंने इन्फैंट्री स्कूल, मउ और स्ट्रैटेजिक फोर्स कमांड में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
“कोई भी सैनिक पीछे नहीं छूटेगा”
लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह ने अपने पहले दिन यह संदेश दिया कि कोई भी सैनिक पीछे नहीं छूटेगा। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि और उनके परिवारों को सम्मान देकर उन्होंने यह दिखाया कि वह न केवल एक कुशल सैन्य अधिकारी हैं, बल्कि अपने सैनिकों और उनके बलिदान के प्रति गहरी संवेदनशीलता रखते हैं। उनकी यह पहल सैनिकों और उनके परिवारों के बीच विश्वास को और मजबूत करेगी।