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Border Tourism: जल्द ही पर्यटकों के लिए खुलेगा गलवान! टूरिज्म बढ़ाने के लिए सेना खोलेगी कई सीमा से सटे इलाके

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📍नई दिल्ली | 26 Nov, 2024, 1:06 PM

Border Tourism: भारतीय सेना ने सीमा से इलाकों में पर्यटन को बढ़ावा देने और दूरस्थ क्षेत्रों के विकास के लिए एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। जल्द ही, लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पास के कुछ प्रतिबंधित क्षेत्रों को पर्यटकों के लिए खोलने की योजना है। यह कदम न केवल देश की सीमाओं को लोगों के करीब लाने का प्रयास है, बल्कि सीमावर्ती इलाकों के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी गति देगा।

Border Tourism: Galwan to Open Soon for Visitors as Army Unlocks Border Areas to Boost Tourism
Galwan War Memorial

Border Tourism: वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत पहल

सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत यह पहल की जा रही है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सीमावर्ती इलाकों में कनेक्टिविटी, पर्यटन और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।

सूत्रों के अनुसार, इस योजना में गलवान मेमोरियल को पर्यटकों के लिए खोलने पर भी विचार किया जा रहा है। बता दें कि रेजांग ला वॉर मेमोरियल पहले से ही पर्यटकों के लिए खुला है। इसके अलावा, लद्दाख के त्रिशूल और रंगला जैसे स्थानों को भी पर्यटकों के लिए खोला जाएगा। इन क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का काम तेजी से चल रहा है।

इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर जोर

भारतीय सेना और बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) ने पिछले चार वर्षों में सीमा पर बुनियादी ढांचे के विकास में उल्लेखनीय प्रगति की है।

  • 8500 किलोमीटर सड़कों का निर्माण: खासकर एलएसी के पास।
  • 400 स्थायी पुलों का निर्माण: इसमें सेला और शिंकुन ला सुरंगों जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट शामिल हैं।
  • भारत नेट कार्यक्रम के तहत हाई-स्पीड इंटरनेट: 1,500 गांवों तक इंटरनेट की सुविधा दी गई है, जिससे 7,000 से अधिक सीमावर्ती गांवों को जोड़ा गया है।

बुनियादी ढांचा में ये सुधार न केवल दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच को आसान बनाएंगे, बल्कि पर्यटन और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देंगे।

Galwan War Memorial

पर्यटकों की बढ़ती रुचि

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में बताया कि पिछले चार वर्षों में लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके पीछे बेहतर बुनियादी ढांचा और सीमाई पर्यटन के प्रति बढ़ती दिलचस्पी मुख्य कारण हैं।

स्थानीय समुदायों को मदद

सीमाई इलाकों में केवल बुनियादी ढांचे का विकास ही नहीं हो रहा, बल्कि भारतीय सेना स्थानीय समुदायों की मदद में भी अहम भूमिका निभा रही है।

  • स्वास्थ्य सेवाएं और राहत कार्य: सेना ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा सहायता और आपदा राहत सेवाएं प्रदान कर रही है।
  • जीवन स्तर सुधारने का प्रयास: सेना की यह पहल सीमावर्ती इलाकों के निवासियों के जीवन स्तर को बेहतर बना रही है।

मुख्यधारा से जोड़ने की पहल

प्रतिबंधित क्षेत्रों को पर्यटन के लिए खोलने का यह निर्णय सीमावर्ती इलाकों को राष्ट्रीय मुख्यधारा में शामिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके जरिए इन इलाकों की सांस्कृतिक और भौगोलिक पहचान को भी बढ़ावा मिलेगा भारतीय सेना और सरकार की यह पहल न केवल सीमा क्षेत्रों को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी, बल्कि देशवासियों को अपनी सीमाओं और वहां की जीवनशैली से जोड़ने में भी मदद करेगी। इस फैसले से न केवल इन क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय समुदायों का भी सशक्तिकरण होगा।

हरेंद्र चौधरीhttp://harendra@rakshasamachar.com
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवादों, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं। 📍 Location: New Delhi, in 🎯 Area of Expertise: Defence, Diplomacy, National Security
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