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Agnishodh Research Cell: आर्मी चीफ बोले- जंग के मैदान में ‘बूट्स के साथ बॉट्स’ की भी जरूरत, IIT Madrass में शुरू किया ‘अग्निशोध’ रिसर्च सेल

जनरल द्विवेदी ने बताया कि सेना ने INDIAai, Chip-to-Startup, और Project QuILA जैसे नेशनल टेक्नोलॉजी मिशनों से साझेदारी की है...

‘अग्निशोध’ दरअसल Indian Army Research Cell (IARC) है, जिसे IIT मद्रास परिसर में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य भारतीय सेना और शैक्षणिक संस्थानों के बीच ऐसा ब्रिज तैयार करना है, जिससे प्रयोगशालाओं में डेवलप हो रही तकनीकों को सीधे युद्धक्षेत्र में इस्तेमाल किया जा सके। यह कदम सेना के ‘पांच स्तंभों वाले परिवर्तन ढांचे’ (Five Pillars of Transformation) में से एक मॉर्डनाइजेशन और टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन को आगे बढ़ाने के लिए उठाया गया है...
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📍चेन्नई | 4 Aug, 2025, 8:37 PM

Agnishodh Research Cell: भारतीय सेना ने स्वदेशी रक्षा तकनीक को बढ़ावा देने के लिए ‘अग्निशोध’ रिसर्च सेल की शुरुआत की है। यह केंद्र भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास में बनाया गया है। इसका उद्घाटन भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अपनी दो दिन की चेन्नई यात्रा के दौरान किया। यह केंद्र भारतीय सेना के परिवर्तन के पांच मुख्य लक्ष्यों में से एक, यानी आधुनिकीकरण और तकनीक को अपनाने को बढ़ावा देता है। यह एकेडमिक रिसर्च को सेना की जरूरतों के साथ जोड़ने की कोशिश है।

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क्या है Agnishodh Research Cell?

‘अग्निशोध’ दरअसल Indian Army Research Cell (IARC) है, जिसे IIT मद्रास परिसर में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य भारतीय सेना और शैक्षणिक संस्थानों के बीच ऐसा ब्रिज तैयार करना है, जिससे प्रयोगशालाओं में डेवलप हो रही तकनीकों को सीधे युद्धक्षेत्र में इस्तेमाल किया जा सके। यह कदम सेना के ‘पांच स्तंभों वाले परिवर्तन ढांचे’ (Five Pillars of Transformation) में से एक मॉर्डनाइजेशन और टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन को आगे बढ़ाने के लिए उठाया गया है। यह केंद्र सैनिकों को नई तकनीकों जैसे 3D प्रिंटिंग, साइबर सुरक्षा, क्वांटम कम्प्यूटिंग, वायरलेस कम्यूनिकेशन और ड्रोन सिस्टम में ट्रेनिंग देगा। इससे सेना के जवान तकनीक में माहिर होंगे।

आतंकवाद के खिलाफ नया अध्याय

IIT मद्रास में एक समारोह में जनरल द्विवेदी ने “ऑपरेशन सिंदूर – भारत की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में नया अध्याय” पर बात की। उन्होंने बताया कि यह 88 घंटे का ऑपरेशन खुफिया जानकारी पर आधारित था और इसने भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति को नया रूप दिया। यह ऑपरेशन अपने आकार, प्रभाव और रणनीति के कारण खास था। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन कूटनीति, सूचना, सैन्य और आर्थिक (DIME) क्षेत्रों में किया गया। जनरल द्विवेदी ने बताया कि युद्ध का तरीका बदल रहा है। अब युद्ध गैर-संपर्क (बिना सीधे संपर्क), रणनीतिक गति और मनोवैज्ञानिक प्रभाव से लड़े जाएंगे। भारतीय सेना इसके लिए तैयार है।

जनरल द्विवेदी ने यह भी कहा कि आने वाले युद्ध पांचवीं पीढ़ी के संघर्ष होंगे, जहां आमने-सामने की लड़ाई नहीं बल्कि डिजिटल युद्ध, साइबर हमले, और मनोवैज्ञानिक प्रभाव हावी होंगे।

Agnishodh Research Cell: Army Chief Says'Bots Must Share Space with Boots' as Indian Army Launches Defence Tech Hub at IIT Madras
Photo: Indian Army

आत्मनिर्भर भारत में सेना की भूमिका

जनरल द्विवेदी ने ‘स्वदेशीकरण से सशक्तिकरण’ (Swadeshikaran Se Sashaktikaran) की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए बताया कि सेना ने INDIAai, Chip-to-Startup, और Project QuILA जैसे नेशनल टेक्नोलॉजी मिशनों से साझेदारी की है। इन परियोजनाओं में MCTE मऊ जैसे संस्थानों की भूमिका प्रमुख रही है।

उन्होंने बताया कि IIT दिल्ली, IIT कानपुर और IISc बेंगलुरु में सेना के रिसर्च सेंटरों ने पहले ही कई एडवांस रक्षा तकनीकों पर कामकिया है। IIT मद्रास की तारीफ करते हुए उन्होंने Project SAMBHAV और Army Base Workshops के साथ चल रही एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (3D प्रिंटिंग आधारित उत्पादन) प्रोजेक्ट्स का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ‘अग्निशोध’ शैक्षणिक ज्ञान को युद्ध के मैदान की जरूरतों में बदलेगा और भारत को 2047 तक विकसित बनाने में मदद करेगा।

IIT मद्रास रिसर्च पार्क से होगा विस्तार

‘अग्निशोध’ केंद्र IIT मद्रास रिसर्च पार्क के माध्यम से भी अपना विस्तार करेगा। यह रिसर्च पार्क भारत के अग्रणी इनोवेंशंस सेंटर्स में से एक है, जहां पर एडवांस मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी सेंटर (AMTDC) और प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज फाउंडेशन जैसे संगठन कार्यरत हैं। यह प्लेटफॉर्म प्रयोगशाला में विकसित तकनीकों को मैदान में उपयोग के योग्य तकनीकों में बदलने का अवसर देगा।

सेना के जवानों को मिलेगी तकनीकी ट्रेनिंग

उन्होंने बताया कि अग्निशोध’ सैनिकों को नई तकनीकों में भी प्रशिक्षण देगा। यह साइबर सुरक्षा, क्वांटम कम्प्यूटिंग और ड्रोन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता बढ़ाएगा। साथ ही, यह युद्ध के लिए तैयार तकनीकी समाधान विकसित करेगा। ‘अग्निशोध’ केवल अनुसंधान केंद्र ही नहीं बल्कि तकनीकी मानव संसाधन (tech-enabled human resource) को विकसित करने का माध्यम भी बनेगा। यहां सेना के जवानों को एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (3D प्रिंटिंग), साइबर सुरक्षा (Cybersecurity), क्वांटम कंप्यूटिंग, वायरलेस कम्यूनिकेशन, मानव रहित हवाई प्रणाली (Unmanned Aerial Systems) जैसे क्षेत्रों में एडवांस ट्रेनिंग दी जाएगी। इससे सेना में एक ऐसा तकनीकी कौशलयुक्त बल विकसित होगा, जो भविष्य की चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सके।

“सैनिकों को रोबोट के साथ करना होगा काम।”

अपनी चेन्नई यात्रा के दौरान जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) का भी दौरा किया। वहां उन्हें अकादमी के ढांचे, आधुनिक प्रशिक्षण और युवा सैन्य अधिकारियों को तैयार करने की योजनाओं के बारे में बताया गया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय सेना एक परिवर्तन के दशक (Decade of Transformation) में प्रवेश कर चुकी है। युद्ध की प्रकृति बदल रही है। अब ग्रे जोन संघर्ष और तकनीकी बदलावों का दौर है।

ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि इस ट्राई सर्विसेज (सेना, नौसेना, वायुसेना) कार्रवाई ने भारत की ताकत दिखाई, जिसने पाकिस्तान को 88 घंटों में युद्धविराम के लिए मजबूर किया। उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध में पारंपरिक और आधुनिक तकनीकों का मिश्रण होगा, जहां “सैनिकों को रोबोट के साथ काम करना होगा।” उन्होंने कहा कि अब युद्ध के मैदान में सिर्फ ‘बूट्स’ (सैनिकों की मौजूदगी) नहीं, बल्कि ‘बॉट्स’ (मशीनें और स्वचालित प्रणालियां) की भी जरूरत होगी। उन्होंने सेना के डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन के लक्ष्य को दोहराया।

News Desk
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