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LCA Mk-1A Tejas: जुलाई-अगस्त में खत्म हो सकता है वायुसेना का 16 महीने का इंतजार! नासिक में बने पहले तेजस की जल्द होगी पहली टेस्ट फ्लाइट

LCA Mk-1A एक हल्का लड़ाकू विमान (Light Combat Aircraft) है, जिसे HAL ने डेवलप किया है। यह विमान पुराने Mk-1 वर्जन की तुलना में काफी अपग्रेडेड है और इसे 4.5 पीढ़ी का मल्टी-रोल फाइटर माना जाता है। इसमें डिजिटल रडार वार्निंग रिसीवर, जैमर, सेल्फ-प्रोटेक्शन सूट, एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलें, और वियोंड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइल क्षमता है...
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📍नई दिल्ली | 17 Jun, 2025, 1:22 PM

LCA Mk-1A Tejas: भारतीय वायुसेना के लिए अच्छी खबर है। पिछले 16 महीनों से जिस तेजस फाइटर जेट की डिलीवरी का इंतजार किया जा रहा है, वह अब खत्म होने वाला है। हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड की नई नासिक असेंबली लाइन में बना भारत का पहला स्वदेशी लाइट कॉम्बैट फाइटर जेट (LCA) तेजस Mk-1A अपनी पहली उड़ान भड़ने के लिए तैयार है। तेजस Mk-1A की पहली उड़ान जुलाई के मध्य में होने की उम्मीद जताई जा रही है। एचएएल के सूत्रों का कहना है कि जुलाई-अगस्त में ही पहले फाइटर जेट की डिलीवरी भी भारतीय वायुसेना को सौंपी जा सकती है।

इस साल के अंत तक बनेंगे 16 LCA Mk-1A Tejas

एचएएल नासिक में बनी यह नई प्रोडक्शन लाइन तेजी से काम कर रही है और इस साल के अंत तक 16 Mk-1A विमानों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। HAL के बेंगलुरु स्थित प्रोडक्शन सेंटर के साथ मिलकर नासिक यूनिट इस प्रोजेक्ट को रफ्तार दे रही है। अधिकारियों के मुताबिक, नासिक यूनिट की मदद से यह संख्या सालाना 24 जेट तक पहुंच सकती है, जिससे भविष्य में वायु सेना की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। पहली बार Mk-1A फरवरी में उड़ान भरने वाला था, लेकिन तकनीकी वजहों के चलते इसमें देरी हुई। वहीं, अब यह विमान अपनी पहली परीक्षण उड़ान भरने के लिए तैयार है।

एचएल सूत्रों का कहना है, नासिक प्रोडक्शन लाइन से इस साल चार से पांच Mk-1A लड़ाकू विमान तैयार होंगे, और अगले साल से सालाना आठ विमानों का प्रोडक्शन होगा। इसकी प्रमुख वजह अमेरिकी कंपनी GE Aerospace की F404-IN20 इंजनों की समय पर सप्लाई न हो पाने और कुछ जरूरी सर्टिफिकेशन में देरी शामिल है। अधिकारियों के अनुसार, तकनीकी चुनौतियों और सप्लाई चेन में देरी की दिक्कतों ने इस प्रोजेक्ट को प्रभावित किया। हालांकि, अब हालात नियंत्रण में हैं और उत्पादन तेजी से आगे बढ़ रहा है। Mk-1A को वायु सेना के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है, जिसमें आधुनिक हथियार और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हुआ है। यह विमान दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमले करने में सक्षम है।

तेजस है 4.5 पीढ़ी का मल्टी-रोल फाइटर

LCA Mk-1A एक हल्का लड़ाकू विमान (Light Combat Aircraft) है, जिसे HAL ने डेवलप किया है। यह विमान पुराने Mk-1 वर्जन की तुलना में काफी अपग्रेडेड है और इसे 4.5 पीढ़ी का मल्टी-रोल फाइटर माना जाता है। इसमें डिजिटल रडार वार्निंग रिसीवर, जैमर, सेल्फ-प्रोटेक्शन सूट, एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलें, और वियोंड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइल क्षमता है। यह विमान दुश्मन के एय़र डिफेंस को भेदने में सक्षम है और लंबी दूरी तक उड़ान भर सकता है। इसके अलावा, Mk-1A में पायलट के लिए आधुनिक कॉकपिट और सुरक्षा उपकरण भी दिए गए हैं, जो इसे अन्य लड़ाकू विमानों से अलग बनाते हैं।

पहले आएगा F404-IN20 इंजन से लैस फाइटर जेट

भारतीय वायुसेना पहले ही LCA Mk-1A की डिलीवरी में देरी को लेकर चिंता जता चुकी है। वायु सेना ने फरवरी 2021 में 83 Mk-1A लड़ाकू विमानों के लिए 48,000 करोड़ रुपये का ऑर्डर दिया था और 97 और Mk-1A खरीदने की योजना है, जिसकी लागत करीब 67,000 करोड़ रुपये होगी।

सूत्रों ने बताया, “एचएएल ने अभी तक बेंगलुरु में 83 विमानों के ऑर्डर को पूरा करने के लिए छह LCA Mk-1A बनाए हैं। इनमें से एक, जो GE के F404-IN20 इंजन से लैस है, जुलाई-अगस्त में IAF को सौंपा जाएगा। जीई एयरोस्पेस ने मार्च में 99 F404-IN20 इंजनों में से पहला इंजन एचएएल को सौंपा। दूसरा इंजन जुलाई में आएगा, इसके बाद दिसंबर तक हर महीने दो इंजन दिए जाएंगे। वहीं अगले साल से डिलीवरी में तेजी आएगी। जीई कंपनी ने एचएएल को भरोसा दिया है कि प्रोडक्शन बढ़ाया जा रहा है, ताकि भारतीय ऑर्डर पूरा हो सके।

2004 में, F404-IN20 इंजन को पुराने LCA Mk-1 के लिए चुना गया था, जिसे भारतीय वायुसेना ने शामिल किया था। 2016 तक, जीई एरोस्पेस ने Mk-1 विमान के लिए कुछ ही F404-IN20 इंजन डिलीवर किए थे। लेकिन अतिरिक्त इंजन ऑर्डर न होने के चलते, अमेरिका में F404-IN20 के लिए प्रोडक्शन लाइन बंद कर दी गई थी। हालांकि, 2021 में एएचएल ने LCA Mk-1A के लिए 99 अतिरिक्त इंजन ऑर्डर दिए, जिसके बाद अमेरिकी कंपनी ने पांच साल से ठप पड़ी प्रोडक्शन लाइन को फिर से शुरू करने और ग्लोबल सप्लाई चेन से जुड़ने कोशिशें शुरू कीं।

देरी पर वायु सेना जता चुकी है नाराजगी

इसी साल मई में एयरफोर्स चीफ ने तेजस प्रोजक्ट में देरी को लेकर अपनी नाराजगी जताई थी। वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने सीआईआई की सालाना बिजनेस समिट 2025 में कहा था कि वायु सेना को लड़ाकू विमानों की कमी का सामना करना पड़ रहा है और उसके पास 30 स्क्वाड्रन हैं, जबकि 42 की जरूरत है। पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी और एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित ने इस मुद्दे को विभिन्न मंचों पर उठा चुके हैं। उनका कहना है कि जब देश में ही इतना बड़ा ऑर्डर है, तब HAL जैसी संस्थाएं इसे समय पर क्यों नहीं पूरा कर पा रही हैं? उन्होंने साफ कहा कि अगर HAL समय पर डिलीवरी नहीं कर पाती है तो फिर डिफेंस सेक्टर में प्राइवेट प्लेयर्स को भी मौका मिलना चाहिए।

ऑपरेशन सिंदूर ने बदले हालात

हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने प्रिसिशन गाइडेड मिसाइलों जैसे ब्रह्मोस और स्कैल्प का उपयोग कर यह दिखा दिया कि दूरी अब युद्ध में बाधा नहीं रही। भारतीय वायुसेना के एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित के अनुसार, आज की तकनीक ने “दूरी और खतरे” (distance and vulnerability) के बीच के रिश्ते को ही बदल दिया है। उन्होंने कहा कि अब दुश्मन की सीमा के अंदर सटीक हमले करना आम बात हो गई है।

AMCA की तैयारी

भारत अब अपने 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) को तेज़ी से विकसित कर रहा है। इसके लिए अब एक प्रतिस्पर्धी मॉडल अपनाया जाएगा, जिसमें HAL के अलावा टाटा, लार्सन एंड टुब्रो, महिंद्रा और अडानी जैसे प्राइवेट प्लेयर्स भी भाग ले सकेंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे एक “क्रिटिकल मोमेंट” कहा है, क्योंकि अब भारत में फाइटर जेट्स बनाने की क्षमता सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्र मिलकर तैयार करेंगे।

LCA Tejas Delay: क्या भारत में अब निजी कंपनियां बनाएंगी फाइटर जेट? राजनाथ सिंह को सौंपी रिपोर्ट, क्या होगा HAL का रोल?

डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

तेजस Mk-1A की डिलीवरी भले देरी से हो रही हो, लेकिन यह भारत के स्वदेशी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग अभियान “आत्मनिर्भर भारत” के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। यह विमान न केवल फोर्थ जनरेशन फाइटर जेट्स का आधुनिक रूप है, बल्कि भारत को ग्लोबल फाइटर जेट मार्केट में मजबूत दावेदार बनाने की दिशा में भी एक ठोस कदम है।

News Desk
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