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97 LCA Mark 1A fighter jets: वायुसेना को मिलेंगे 97 स्वदेशी एलसीए मार्क 1ए फाइटर जेट्स, भारत ने 62,000 करोड़ रुपये की डील पर लगाई मुहर

सरकार पहले ही दे चुकी है 48,000 करोड़ रुपये में 83 एलसीए मार्क 1ए विमानों का ऑर्डर...

नए एलसीए मार्क 1ए विमानों में शुरुआती 40 एलसीए की तुलना में ज्यादा एडवांस रडार और एवियोनिक्स (फ्लाइट और कंट्रोल इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम) लगाए जाएंगे। इन विमानों में 65 प्रतिशत से ज्यादा उपकरण और पुर्जे भारत में ही बनाए जाएंगे। यह कार्यक्रम आत्मनिर्भर भारत और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का प्रतीक है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सौदा भारत की एयरोस्पेस इंडस्ट्री को और मजबूत करेगा और विदेशी आयात पर निर्भरता कम करेगा...
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📍नई दिल्ली | 19 Aug, 2025, 11:16 PM

97 LCA Mark 1A fighter jets: भारत ने मंगलवार को 62,000 करोड़ रुपये की बड़ी रक्षा डील को मंजूरी दी, जिसके तहत भारतीय वायुसेना को 97 स्वदेशी एलसीए (लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) मार्क 1ए लड़ाकू विमान मिलेंगे। यह निर्णय एक उच्च-स्तरीय बैठक में लिया गया। रक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों ने बताया कि यह सौदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ योजना के तहत आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम है।

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सरकार पहले ही 83 एलसीए मार्क 1ए विमानों का ऑर्डर 48,000 करोड़ रुपये में दे चुकी है। यह नया सौदा वायुसेना के पुराने मिग-21 विमानों की जगह लेगा, जिन्हें आने वाले हफ्तों में चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है।

एलसीए तेजस कार्यक्रम लंबे समय से भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादन की रीढ़ माना जाता रहा है। इससे न केवल वायुसेना की क्षमताएं बढ़ेंगी, बल्कि छोटे और मध्यम स्तर के उद्योगों को भी बड़ा फायदा होगा, जो देशभर में रक्षा क्षेत्र से जुड़े उपकरण और पुर्जे सप्लाई करते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार HAL और स्वदेशी रक्षा उद्योग को मजबूत करने पर जोर देते रहे हैं। उन्होंने खुद तेजस ट्रेनर विमान में उड़ान भरकर यह संदेश दिया था कि भारत अब अपने दम पर आधुनिक लड़ाकू विमान बना सकता है। यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली उड़ान थी किसी कॉम्बैट एयरक्राफ्ट में।

नए एलसीए मार्क 1ए विमानों में शुरुआती 40 एलसीए की तुलना में ज्यादा एडवांस रडार और एवियोनिक्स (फ्लाइट और कंट्रोल इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम) लगाए जाएंगे। इन विमानों में 65 प्रतिशत से ज्यादा उपकरण और पुर्जे भारत में ही बनाए जाएंगे।

यह कार्यक्रम आत्मनिर्भर भारत और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का प्रतीक है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सौदा भारत की एयरोस्पेस इंडस्ट्री को और मजबूत करेगा और विदेशी आयात पर निर्भरता कम करेगा।

पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने स्पेन में पहली बार इस योजना की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि भारत अब अपने स्वदेशी विमान कार्यक्रम को और बड़े पैमाने पर आगे ले जाने की तैयारी कर रहा है।

इसके अलावा, HAL को भविष्य में 200 से अधिक एलसीए मार्क 2 और पांचवीं पीढ़ी के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के सौदे भी मिलने की संभावना है।

बता दें कि कई दशकों से भारतीय वायुसेना की रीढ़ रहे मिग-21 विमानों को आखिरकार हटाने का फैसला हो चुका है। इन विमानों को ‘फ्लाइंग कॉफिन’ भी कहा जाता रहा है क्योंकि इनमें कई हादसे हुए। नए एलसीए विमान इनकी जगह लेंगे और वायुसेना को आधुनिक और सुरक्षित बेड़ा देंगे।

News Desk
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