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IAF chief on Op Sindoor: भारतीय वायुसेना प्रमुख का बड़ा खुलासा; ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के 6 फाइटर जेट बने निशाना, राजनीतिक नेतृत्व ने खुल कर दिया था साथ

वायुसेना प्रमुख के अनुसार, गिराए गए सभी पांच लड़ाकू विमान चीनी थे और कोई भी एफ-16 हवा में निशाना नहीं बनाया गया था...

एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा, पाकिस्तान का शाहबाज जैकबाबाद एयरफील्ड इस ऑपरेशन के दौरान प्रमुख निशानों में शामिल था। यहां पाकिस्तान को अमेरिका से मिले एफ-16 फाइटर जेट्स का का हैंगर आधा तबाह हो गया। इसके अलावा अंदर मौजूद कुछ जेट्स को भी नुकसान पहुंचा। जानकारी के अनुसार, जैकबाबाद एयरफील्ड के एईडब्ल्यू एंड सी (एयरबॉर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल) हैंगर में भी एक विमान था और कुछ एफ-16 उस समय मरम्मत में थे...
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📍बेंगलुरु/नई दिल्ली | 9 Aug, 2025, 7:27 PM

IAF chief on Op Sindoor: भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने साफ किया कि इस अभियान में राजनीतिक नेतृत्व ने कोई पाबंदी नहीं लगाई थी और वायुसेना को कार्रवाई की पूरी आजादी दी गई थी। एयर चीफ मार्शल ने यह बात शनिवार को बेंगलुरु में 16वें एयर चीफ मार्शल एलएम कात्रे मेमोरियल लेक्चर के दौरान कही। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने छह पाकिस्तानी फाइटर जेट मार गिराए और कई को जमीन पर ही नष्ट कर दिया। वहीं, इस ऑपरेशन में पहली बार इस्तेमाल की गई एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने भी पूरे ऑपरेशन में गेम-चेंजर की भूमिका निभाई।

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IAF chief on Op Sindoor: एफ-16 फाइटर जेट्स का हैंगर आधा तबाह

एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा, पाकिस्तान का शाहबाज जैकबाबाद एयरफील्ड इस ऑपरेशन के दौरान प्रमुख निशानों में शामिल था। यहां पाकिस्तान को अमेरिका से मिले एफ-16 फाइटर जेट्स का का हैंगर आधा तबाह हो गया। इसके अलावा अंदर मौजूद कुछ जेट्स को भी नुकसान पहुंचा। जानकारी के अनुसार, जैकबाबाद एयरफील्ड के एईडब्ल्यू एंड सी (एयरबॉर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल) हैंगर में भी एक विमान था और कुछ एफ-16 उस समय मरम्मत में थे। इसके अलावा, मुरिद और चकलाला में कम से कम दो कमांड और कंट्रोल सेंटर और कुछ बड़े और कुछ छोटे छह रडार नष्ट किए गए।

8 मई को ऑपरेशन सिंदूर में पहली बार एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल हुआ था। लेकिन उस समय तकनीकी जानकारी के विश्लेषण के चलते विमानों की संख्या को सार्वजनिक नहीं किया गया था। बाद में यह स्पष्ट हुआ कि 7 मई को पांच लड़ाकू विमान और एक बड़ा एईडब्ल्यू एंड सी/ईएलआईएनटी विमान मार गिराया गया। वायुसेना प्रमुख के अनुसार, गिराए गए सभी पांच लड़ाकू विमान चीनी थे और कोई भी एफ-16 हवा में निशाना नहीं बनाया गया था। नष्ट किए गए फाइटर जेट्स की पहचान उनके सिग्नेचर के आधार पर की गई थी, जो चीन से खरीदे गए थे।

IAF chief on Op Sindoor: पूरे संघर्ष को बताया “हाई-टेक युद्ध”

वायुसेना प्रमुख ने बताया, लगभग 300 किलोमीटर दूर से एक धीमी रफ्तार से उड़ने वाला बड़ा जहाज मार गिराया गया, जो कि या तो स्वीडन निर्मित साब एरीआई एईडब्ल्यू एंड सी हो सकता था या फिर चीन निर्मित इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस एवं इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर विमान। एयर चीफ मार्शल सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को एक हाई-टेक युद्ध बताया। उन्होंने इस पूरे संघर्ष को “हाई-टेक युद्ध” बताया। उन्होंने कहा कि 80 से 90 घंटों के इस युद्ध में वायुसेना ने इतना नुकसान पहुंचाया कि पाकिस्तान को लगने लगा कि अगर वे आगे बढ़े तो उन्हें और भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसके बाद, पाकिस्तान ने भारत के डीजीएमओ को संदेश भेजा कि वे बातचीत करना चाहते हैं, जिसे भारत ने स्वीकार कर लिया।

वायुसेना प्रमुख ने 2019 के बालाकोट हमले का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय वायुसेना अपनी उपलब्धियों को साबित करने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाई थी। उस समय मिली सफलता को देशवासियों को समझाना मुश्किल हुआ था क्योंकि अंदरूनी नुकसान के स्पष्ट सबूत सार्वजनिक नहीं हो सके थे। लेकिन इस बार, स्थानीय मीडिया कवरेज और सैटेलाइट तस्वीरों ने वायुसेना की कार्रवाई का असर दुनिया के सामने स्पष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि सैटेलाइट तस्वीरों में केवल छोटे-छोटे छेद दिखते हैं, जहां से मिसाइलें भीरत घुसीं, जैसा कि बालाकोट में हुआ था। लेकिन इस बार स्थानीय मीडिया के जरिए आंतरिक नुकसान को दिखाया जा सका। इससे वायुसेना को अपनी कार्रवाइयों को साबित करने में मदद मिली।

IAF chief on Op Sindoor: एयर डिफेंस सिस्टम ने किया शानदार प्रदर्शन

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बताया कि भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का कोई भी फाइटर जेट आकाश या मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (MRSAM) की सीमा के पास नहीं आ सका। सभी जहाज लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (LRSAM) ने मार गिराए। हालांकि वे भारत की सीमा से दूर थे, लेकिन फिर भी वे हमारी रेंज में थे। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य किसी एक एयर बेस को पूरी तरह नष्ट करना नहीं था, बल्कि यह संदेश देना था कि हम कहीं भी, कभी भी अंदर तक मार कर सकते हैं। वायुसेना प्रमुख ने एस-400 सिस्टम को ‘गेम-चेंजर’ बताया। उन्होंने कहा कि इसकी 300 किमी की रेंज ने पाकिस्तानी जहाजों को भारतीय सीमा से दूर रखा और उन्हें लंबी दूरी के ग्लाइड बमों का इस्तेमाल करने का मौका ही नहीं दिया।

वायुसेना ने उस दिन भोलारी एयर बेस पर मौजूद एईडब्ल्यू एंड सी हैंगर को भी निशाना बनाया। एयर चीफ मार्शल सिंह ने बताया कि इस हमले के दौरान वहां एक विमान मौजूद होने के स्पष्ट संकेत मिले। इसके अलावा, सरगोधा एयर बेस पर भी हमला किया गया। सरगोधा का जिक्र करते हुए एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि यह बेस हमेशा से भारतीय वायुसेना के पायलटों के लिए ‘सपना’ रहा है कि उन्हें अपने रिटायरमेंट से पहले एक बार उसे निशाना बनाने का मौका मिला।

राजनीतिक नेतृत्व से कोई रोक-टोक नहीं

वायुसेना प्रमुख ने कहा कि ऑपरेशन की सफलता की एक बड़ी वजह राजनीतिक इच्छाशक्ति थी। उन्होंने बताया कि उन्हें राजनीतिक नेतृत्व से स्पष्ट दिशा-निर्देश मिले और किसी प्रकार की रोक-टोक नहीं हुई। उनका यह बयान उस समय आया है जब कुछ दिन पहले भारत के इंडोनेशिया में डिफेंस अटैच, कैप्टन शिव कुमार ने दावा किया था कि 7 मई की सुबह ऑपरेशन के दौरान कुछ विमान राजनीतिक नेतृत्व की रोकटोक के चलते गंवाने पड़े। उनका दावा था कि यह नुकसान राजनीतिक प्रतिबंधों के कारण हुआ, जिसमें मिलिट्री ठिकानों और एयर डिफेंस सिस्टम्स को निशाना बनाने की अनुमति नहीं थी। हालांकि, वायुसेना प्रमुख ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि सेना ने खुद अपनी अपनी रणनीति बनाई और बाहर से कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले थे।

तीन दिनों तक चली कार्रवाई

वायुसेना प्रमुख ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह केवल कपड़े बदलने के लिए घर जाते थे और अपने दफ्तर में ही आराम करने की जगह बना ली थी। पहले दिन, यानी 6-7 मई की रात के बाद, उन्होंने दो दिनों तक अपने उड़ान वर्दी (फ्लाइंग ओवरऑल) में ही काम किया। इस दौरान तीनों सेनाओं के प्रमुखों, रक्षा स्टाफ प्रमुख और संभवतया पीएमओ के बीच गहन योजना और चर्चाएं हुईं। एयर चीफ मार्शल सिंह ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान ज्यादा चर्चाएं नहीं हो रही थीं। वह केवल यह सूचित करने के लिए फोन करते थे कि हम क्या कर रहे हैं। इस ऑपरेशन में वायुसेना ने सटीक और प्रभावी हमले किए, जिससे दुश्मन को भारी नुकसान हुआ।

हरेंद्र चौधरीhttp://harendra@rakshasamachar.com
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवादों, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं। 📍 Location: New Delhi, in 🎯 Area of Expertise: Defence, Diplomacy, National Security
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