📍मऊ, मध्य प्रदेश | 26 Aug, 2025, 11:46 PM
IAF Chief AP Singh On Theatre Command: भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा है कि थिएटर कमांड (Theaterisation) की प्रक्रिया को जल्दबाजी में लागू करना सही कदम नहीं होगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत को किसी दूसरे देश का मॉडल नहीं अपनाना चाहिए बल्कि अपनी जरूरतों के हिसाब से फैसला लेना होगा।
अपनी बेबाक और सीधे-सपाट शब्दों में अपनी बाात कहने के लिए मशहूर एयर चीफ मार्शल एपी सिंह मंगलवार को मध्यप्रदेश के डॉ. भीमराव अंबेडकर नगर (मऊ) स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित रण संवाद 2025 कार्यक्रम के फायर साइट चैट कार्यक्रम में बोल रहे थे। यह ट्राई सर्विसेज (थलसेना, नौसेना और वायुसेना) का जॉइंट सेमिनार है, जिसमें वॉर, वॉर फाइटिंग और भविष्य की सैन्य चुनौतियों पर चर्चा की जा रही है।
IAF Chief AP Singh On Theatre Command: सामने बैठे थे जनरल अनिल चौहान
वर्तमान में सेना के सात, वायुसेना के सात और नौसेना के तीन कमांड अलग-अलग काम करते हैं, लेकिन इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड से सभी सेवाओं के संसाधनों को एक ही कमांडर के अधीन इंटीग्रेट किया जाएगा। यह सुधार 2019 में सैन्य मामलों के विभाग के गठन और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की नियुक्ति से शुरू हुआ था।
मध्यप्रदेश के डॉ. अंबेडकर नगर (मऊ) में आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित रण संवाद 2025 के दौरान भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने थिएटर कमांड पर बोलते हुए उन्होंने मौजूदा मिलिट्री फॉरमेशंस में जल्दबाजी से बदलाव न करने की बीत कही। उनका कहना था कि सेनाओं के कोर स्किल्स को बनाए रखते हुए ही कोई फैसला लिया जाना चाहिए।
🚨 IAF Chief cautions against rushing into Theatre Commands
Air Chief Marshal A P Singh, speaking at the Army War College, urged caution on rolling out the #Theaterisation plan in haste.
👉 He proposed setting up a Joint Planning & Coordination Centre in Delhi, under the Chiefs… pic.twitter.com/UvIG0mBm74— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) August 26, 2025
खास बात यह है कि जब एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने यह खरा-खरा बयान दिया तो दर्शक दीर्घा में सीडीएस जनरल अनिल चौहान भी बैठे हुए उन्हें सुन रहे थे और उनके बयान पर वे सिर्फ मुस्कुरा कर रह गए और कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। बता दें कि रण संवाद कार्यक्रम को सीडीएस अनिल चौहान की पहल के बाद बाद ही आयोजित किया गया है।
IAF Chief AP Singh On Theatre Command: अतिरिक्त लेयर्स न जोड़ी जाएं
वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने जोर दिया कि कंबाइंड स्ट्रक्चर्स में फैसला लेने की प्रक्रिया में अतिरिक्त लेयर्स न जोड़ी जाएं, क्योंकि इससे कमांडर स्तर पर जल्दी फैसला लेना मुश्किल हो जाता है। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि थिएटर कमांड का उद्देश्य फटाफट फैसला लेना है, लेकिन इसके लिए मौजूदा व्यवस्था को बिना सोचे-समझे बदलना ठीक नहीं।
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए कहा कि इस अभियान में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने चार वरिष्ठ अधिकारियों – सीडीएस और तीनों सेवाओं के प्रमुखों के बीच कॉर्डिनेशन का बड़ा काम किया। सिंह ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान केवल चार लोगों की जॉइंट प्लानिंग से कोई कमी नहीं आई। सब कुछ व्यवस्थित तरीके से हो गया। इस ऑपरेशन के दौरान चारों शीर्ष सैन्य अधिकारी सीडीएस जनरल अनिल चौहान और तीनों सेवा प्रमुख—साथ मिलकर काम कर रहे थे। इसलिए, उन्होंने टॉप लेवल पर जॉइंट प्लानिंग और क्रियान्वयनपर जोर दिया।
सिंह ने यह भी कहा कि कुछ छोटी-मोटी चुनौतियां जरूर सामने आईं, लेकिन उन्हें तुरंत हल कर लिया गया। इसका सबसे बड़ा सबक यह था कि दिल्ली में एक ज्वॉइंट प्लानिंग और कोऑर्डिनेशन सेंटर स्थापित होना चाहिए, जिसे सीडीएस और चीफ़्स ऑफ़ स्टाफ कमिटी के अधीन रखा जाए।
IAF Chief AP Singh On Theatre Command: गंभीर समस्याएं खड़ी होंगी
सिंह ने कहा कि “कोई भी नया स्ट्रक्चर निर्णय प्रक्रिया को लंबा नहीं करे। ओओडीए लूप (OODA Loop – Observe, Orient, Decide, Act) जितना छोटा रहेगा, युद्धक निर्णय उतने तेज होंगे।” उन्होंने यह भी जोर दिया कि हर सेवा की मुख्य क्षमता (Core Competence) बरकरार रहनी चाहिए। अगर थलसेना का कार्य वायुसेना को सौंपा जाएगा या नौसेना का कार्य किसी अन्य सेवा को, तो इससे गंभीर समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।
“नए स्ट्रक्चर की अभी जरूरत नहीं”
एयर चीफ ने दोहराया कि भारत को अमेरिका या चीन के मॉडल की नकल नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “हर देश की अपनी जरूरतें होती हैं। चीन ने अपने हिसाब से थिएटर कमांड बनाए, अमेरिका ने अपने हिसाब से। लेकिन भारत को वही करना चाहिए जो हमारी स्थिति और जरूरत के अनुसार सही हो। सिर्फ दबाव में आकर अभी तुरंत इसे लागू करना ठीक नहीं है।”
उन्होंने यह भी कहा कि अगर थिएटर कमांडर कहीं और बैठकर केवल फोन पर आदेश देंगे, तो यह व्यवस्था कारगर नहीं होगी। युद्ध के दौरान वास्तविक समय (Real-time) पर कॉर्डिनेशन होना जरूरी है।
कल के युद्ध की आज करनी होगी तैयारी
रण संवाद में एयर चीफ ने कहा कि भारत को कल के युद्ध की तैयारी आज करनी होगी। आधुनिक तकनीकें जैसे साइबर युद्ध, अंतरिक्ष निगरानी (Space Surveillance), इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भविष्य की लड़ाई का अहम हिस्सा होंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को स्टार्टअप्स और स्वदेशी टेक्नोलॉजी में निवेश करना चाहिए ताकि रक्षा क्षेत्र में इनोवेशंस को बढ़ावा मिले।
भारत में थिएटर कमांड की बहस 2019 के बाद तेज हुई, जब सरकार ने डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स (DMA) बनाया और सीडीएस का पद सृजित किया। वर्तमान में भारतीय थलसेना और वायुसेना की सात-सात कमांड हैं जबकि नौसेना की तीन कमांड हैं। योजना यह है कि इन्हें मिलाकर इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड बनाए जाएं।
चीन की तर्ज पर थिएटर कमांड
चीन ने 2016 में अपनी सात सैन्य क्षेत्रों को पांच थिएटर कमांड में बदला था, जिसमें भारत से लगती सीमा का दायित्व वेस्टर्न थिएटर कमांड को सौंपा गया।
लेकिन भारत में इस स्ट्रक्चर को लागू करने पर कई बार सवाल उठते रहे हैं। खासकर वायुसेना ने चिंता जताई है कि उसकी सीमित स्क्वॉड्रन, एयरबोर्न वार्निंग सिस्टम (AWACS) और मिड-एयर रीफ्यूलर को विभिन्न थिएटरों में बांटने से फ्लेक्सिबिलिटी घट सकती है।
वायुसेना का तर्क है कि उसके पास पूरे देश में 48 घंटे के भीतर रिसोर्सेस को कहीं भी तैनात करने की क्षमता है। अगर इन्हें थिएटरों में बांट दिया गया तो यह रणनीतिक लाभ कम हो जाएगा।
दुनियाभर में हो रहे संघर्षों पर हुई चर्चा
रण संवाद में सिर्फ ऑपरेशन सिंदूर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय युद्धों जैसे रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया की लड़ाइयों के अनुभवों पर भी चर्चा हुई।
एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि युद्ध की प्रकृति बदल रही है। आज प्लेटफॉर्म महत्वपूर्ण हैं लेकिन उससे भी ज्यादा अहम है उनका रैप-अराउंड इकोसिस्टम जैसे साइबर, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और स्पेस टेक्नोलॉजी। उन्होंने स्वीकार किया कि भारत इन क्षेत्रों में पर्याप्त तेजी से आगे नहीं बढ़ रहा है और जरूरत है कि इन्हें प्राथमिकता दी जाए।