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Pakistan Terror Funding: डिजिटल वॉलेट्स के जरिए दुनिया की आंखों में धूल झोंक रहे आतंकी, जैश-ए-मोहम्मद ने शुरू किया 3.91 अरब रुपये का फंडरेजिंग नेटवर्क

जैश-ए-मोहम्मद ने डिजिटल हवाला से जुटाए 391 करोड़, FATF को दिया धोखा...

Pakistan Terror Funding: पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद ने डिजिटल वॉलेट्स ईजीपैसा और सादापे के जरिए 391 करोड़ रुपये जुटाए। ऑपरेशन सिंदूर के बाद 313 नए मरकज बनाने की साजिश। जानें कैसे FATF की नजरों से बच रहा है यह आतंकी नेटवर्क...
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📍नई दिल्ली/इस्लामाबाद | 20 Aug, 2025, 11:08 PM

Pakistan Terror Funding: पाकिस्तान में आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने एक बार फिर दुनिया की आंखों में धूल झोंकने की तैयारी कर रहा है। इस बार उसने वैश्विक निगरानी से बचने के लिए डिजिटल हवाला का सहारा लिया है। भारतीय खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, जैश ने आतंकियों के लिए डिजिटल वॉलेट्स ईजी पैसा (Easy Paisa) और सादापे (Sadapay) के जरिए 391 करोड़ रुपये (3.91 अरब पाकिस्तानी रुपये) जुटाने का अभियान शुरू किया है। यह अभियान भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद शुरू हुआ, जिसमें जैश के मुख्यालय मारकज सुभानअल्लाह सहित आतंकियों के चार अन्य ट्रेनिंग कैंप नष्ट किए थे। इनमें मरकज बिलाल, मरकज अब्बास, महमोना जया और सरगल ट्रेनिंग कैंप शामिल थे।

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खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, 2019 में, पाकिस्तान ने FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने के लिए दावा किया था कि उसने जैश-ए-मोहम्मद (Pakistan Terror Funding) की गतिविधियों पर रोक लगाई है। उसने जैश के मारकज को सरकारी नियंत्रण में लेने, संगठन के प्रमुख मसूद अजहर, उनके भाई रऊफ असगर और सबसे छोटे भाई तल्हा अल सैफ के बैंक खातों की निगरानी करने का वादा किया था। साथ ही, नकद लेनदेन, जानवरों की खाल से होने वाली आय और अन्य फंड जुटाने के तरीकों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। जिसके बाद 2022 में FATF ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से हटा दिया। लेकिन अब पाकिस्तान ने इन प्रतिबंधों को चकमा देने के लिए एक नया तरीका अपनाया है।

Pakistan Terror Funding: ईजीपैसा और सादापे का इस्तेमाल

खुफिया सूत्रों ने बताया कि जैश ने अब पारंपरिक बैंक खातों के बजाय डिजिटल वॉलेट्स (Pakistan Terror Funding) जैसे ईजीपैसा और सादापे का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। ये डिजिटल वॉलेट्स मसूद अजहर के परिवार के सदस्यों के नाम पर ऑपरेट किए जा रहे हैं। इस तरह, पाकिस्तान ने केवल बैंक खातों का विवरण दिखाकर FATF को यह झूठा दावा किया कि जैश का फंडिंग नेटवर्क खत्म हो गया है। भारतीय खुफिया एजेंसियों के अनुसार, जैश ने इस डिजिटल हवाला नेटवर्क के जरिए हर साल 80-90 करोड़ रुपये (PKR 800-900 मिलियन) जुटाए हैं, जिनमें से 80 फीसदी फंड डिजिटल वॉलेट्स के माध्यम से आता है।

7 मई 2025 को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसमें जैश के मुख्यालय मारकज सुभानअल्लाह को भी निशाना बनाया गया। इसके साथ ही चार अन्य प्रशिक्षण शिविर – मारकज बिलाल, मारकज अब्बास, महमूना जोया और सरगल प्रशिक्षण शिविरों पर मिसाइलें गिराई गईं। इस हमले में 14 आतंकवादी मारे गए, जिनमें मसूद अजहर का साला जमीक अहमद, उसका भतीजा हमजा जमीक और रऊफ असगर का बेटा हुजैफा असगर शामिल थे। हुजैफा खैबर पख्तूनख्वा में जैश की भर्ती का प्रमुख था। इस हमले ने जैश के आतंकी ढांचे को तगड़ा झटका मिला।

इन हमलों के बाद पाकिस्तान सरकार ने इन ढांचों के पुनर्निर्माण की घोषणा की, लेकिन साथ ही जैश ने 313 नए मरकज बनाने का ऑनलाइन अभियान शुरू कर दिया। इसके तहत 3.91 अरब पाकिस्तानी रुपये (करीब 391 करोड़ रुपये भारतीय मूल्य) का एक ऑनलाइन अभियान (Pakistan Terror Funding) शुरू किया। इस अभियान को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक और व्हाट्सएप चैनलों के जरिए बढ़ावा दिया जा रहा है। जैश के कमांडरों और प्रॉक्सी खातों ने मसूद अजहर के नाम से पोस्टर, वीडियो और पत्र साझा किए हैं, जिसमें समर्थकों से प्रत्येक मरकज के लिए 1.25 करोड़ रुपये दान करने की अपील की गई है। पाकिस्तान और विदेशों में समर्थकों से कुल 391 करोड़ रुपये की मांग की गई है। जांच में एक रसीद की कॉपी भी मिली है, जो इस मेगा-फंडरेजिंग अभियान का हिस्सा है।

जांच से पता चला कि यह राशि कई डिजिटल वॉलेट्स (Pakistan Terror Funding) के जरिए जुटाई जा रही है। एक सादापे खाता मसूद अजहर के भाई तल्हा अल सैफ (तल्हा गुलजार) के नाम पर है, जो पाकिस्तानी मोबाइल नंबर +92 3025xxxx56 से जुड़ा है। यह नंबर जैश के हरिपुर जिला कमांडर आफताब अहमद के नाम पर रजिस्टर्ड है, जिसका सीएनआईसी नंबर 133020376995 खाला बट्ट टाउनशिप, हरिपुर में जैश के शिविर के पते पर है। एक अन्य फंडरेजिंग चैनल ईजीपैसा वॉलेट के जरिए ऑपरेट हो रहा है, जो मसूद अजहर के बेटे अब्दुल्ला अजहर (अब्दुल्ला खान) द्वारा चलाया जा रहा है और मोबाइल नंबर +92 33xxxx4937 से जुड़ा है।

Talha Saif Donation Appeal 15 August 2025: सुनें ये ऑडियो

https://www.rakshasamachar.com/wp-content/uploads/2025/08/Talha-Saif-Donation-Appeal-15-August-2025.mp3?_=1

खैबर पख्तूनख्वा में, जैश के कमांडर सैयद सफदर शाह भी एक ईजीपैसा वॉलेट के जरिए मरकज के लिए दान (Pakistan Terror Funding) जुटा रहे हैं, जो मोबाइल नंबर +92 344147xxxx और सीएनआईसी 4250142079691 से जुड़ा है। यह रजिस्ट्रेशन मेलवारा पोस्ट ऑफिस, ओघी, मस्नेहरा जिले के पास है। इन तीन खातों के अलावा, 250 से अधिक ईजीपैसा वॉलेट्स का इस्तेमाल जैश के 391 करोड़ रुपये के फंडरेजिंग अभियान के लिए किया जा रहा है। इसके साथ ही, जैश ने अपने प्रचार चैनल एमएसटीडी ऑफिशियल के जरिए तल्हा अल सैफ का एक ऑडियो रिकॉर्डिंग जारी किया है, जिसमें उन्होंने समर्थकों से प्रति व्यक्ति 21,000 रुपये दान करने की अपील की। यह भाषण 15 अगस्त को मरकज उस्मान-ओ-अली में एक सभा में दिया गया था।

जैश के मरकज को इस्लाम में पवित्र धार्मिक कार्य माना जाता है, लेकिन जैश इनका इस्तेमाल आतंकियों को ट्रेनिंग देने और उनके रहने-ठहरने के लिए करता है। ऑपरेशन सिंदूर में नष्ट किया गया मरकज सुभानअल्लाह न केवल जैश का मुख्यालय था, बल्कि हथियारों की ट्रेनिंग का भी सेंटर था। इस हमले में मारे गए आतंकवादियों में मसूद अजहर के रिश्तेदार भी शामिल थे। मरकज सुभानअल्लाह से सिर्फ 6 किलोमीटर दूर मरकज उस्मान-ओ-अली है, जहां मसूद अजहर का परिवार हमले के बाद से रह रहा है। 10 मई को बहावलपुर के एक सांसद ने घायल परिवार के सदस्यों से मुलाकात की, और 21 मई को लश्कर-ए-तैय्यबा के कार्यकर्ताओं ने भी इस मरकज का दौरा किया था।

इसी तरह, मुजफ्फराबाद में मरकज बिलाल और कोटली में मरकज अब्बास भी आतंकियों के ट्रेनिंग सेंटर रहे हैं। इन पर भारतीय हमलों में आतंकवादी हसन और वकास मारे गए। जैश का सीनियर कमांडर मसूद इलियास कश्मीरी, जो भारत में वांछित है, वर्तमान में खैबर पख्तूनख्वा के दार समंद में मरकज तमीम दारी में रह रहा है। कराची में, जैश का मरकज इफ्ता 1.5 एकड़ में फैला है, जहां मौलवी छोटे बच्चों का ब्रेनवॉश करते हैं। यह जैश का प्रकाशन और प्रचार केंद्र भी है, जो मसूद अजहर और उनके भाइयों के दैनिक पत्र और भाषण प्रॉक्सी सोशल मीडिया खातों के जरिए जारी करता है। जैश का आधिकारिक सोशल मीडिया पेज एक महिला रोजिना (सीएनआईसी 4220176122374) के नाम पर रजिस्टर्ड नंबर +92 316xxxxx66 से जुड़ा है, जिसका पता मरकज इफ्ता के पास है।

भारतीय खुफिया एजेंसियों के अनुसार, जैश वर्तमान में 2,000 से अधिक डिजिटल वॉलेट्स (Pakistan Terror Funding) ऑपरेट कर रहा है, जो न केवल मरकज के लिए दान जुटा रहे हैं, बल्कि गाजा की मदद के बहाने फंड भी इकट्ठा कर रहे हैं। एक ऐसा गाजा से जुड़ा वॉलेट खालिद अहमद के नाम पर रजिस्टर्ड है, लेकिन इसे मसूद अजहर का बेटा हम्माद अजहर ऑपरेट करता है, जो नंबर +92xxxx195206 से जुड़ा है। जानकारों का कहना है कि ईजीपैसा और सादापे बैंकिंग नेटवर्क से बाहर काम करते हैं और एजेंटों के माध्यम से वॉलेट-टू-वॉलेट और वॉलेट-टू-कैश ट्रांसफर की अनुमति देते हैं, जिससे FATF की निगरानी लगभग असंभव हो जाती है।

जांच में यह भी पता चला कि मसूद अजहर का परिवार एक समय में 7-8 मोबाइल वॉलेट्स का इस्तेमाल करता है और हर 3-4 महीने में इन्हें बदल देता है। बड़े फंड कोर वॉलेट्स में जमा होते हैं, फिर छोटी राशियों में 10-15 वॉलेट्स (Pakistan Terror Funding) में बांट दिए जाते हैं, जिससे नकद निकासी या ऑनलाइन ट्रांसफर आसान हो जाता है। जैश हर महीने कम से कम 30 नए वॉलेट्स एक्टिव करता है ताकि सोर्स का पता न लगाया जा सके। इन फंड्स का इस्तेमाल हथियारों की खरीद, कैंपों को चलाने, प्रचार, मसूद अजहर के परिवार के लिए लक्जरी वाहन और सामान खरीदने में किया जाता है। इनमें से एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है।

शुक्रवार की चंदा वसूली

ऑनलाइन दान के अलावा, जैश के कमांडर हर शुक्रवार को मस्जिदों में नकद दान भी जुटाते हैं, जो प्रतिबंध के बावजूद जारी है। खैबर पख्तूनख्वा से प्राप्त एक वीडियो में जैश के कमांडर वसीम चौहान उर्फ वसीम खान उर्फ अकबर को शुक्रवार की नमाज के बाद नकद गिनते हुए देखा गया। यह दान कथित तौर पर गाजा के लिए था, लेकिन इसे जैश की गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

जैश का अल रहमत ट्रस्ट भी सक्रिय है, जो संगठन के फंड का 6-7 फीसदी (लगभग 10 करोड़ रुपये सालाना) योगदान देता है। जांच में पता चला कि अल रहमत ट्रस्ट के लिए दान बहावलपुर में नेशनल बैंक के खाते (खाता नंबर 105XX9) में घुलाम मुर्तजा के नाम पर जमा किए जा रहे हैं। इस ट्रस्ट को मसूद अजहर, तल्हा अल सैफ और अन्य लोग ऑपरेट करते हैं, जिनमें बहावलपुर के मोहम्मद इस्माइल (सीएनआईसी 312014281511), लाहौर के मोहम्मद फारूक (सीएनआईसी 3620165338575), चित्राल के फजल-उर-रहमान (सीएनआईसी 1520197787885) और कराची के रेहान अब्दुल रज्जाक (सीएनआईसी 4210119138007) शामिल हैं। पोस्टरों में कहा गया है कि यह दान जिहाद के लिए है।

जैश हर साल डिजिटल वॉलेट्स, बैंक ट्रांसफर और नकद के जरिए 100 करोड़ रुपये से अधिक जुटाता है, जिसमें से 50 फीसदी हथियारों की खरीद पर खर्च होता है। जैश का दावा है कि प्रत्येक मरकज की लागत 1.25 करोड़ रुपये है, लेकिन अनुमान के अनुसार, मरकज बिलाल जैसे छोटे केंद्र की लागत केवल 40-50 लाख रुपये है। बड़े मरकज, जैसे सुभानअल्लाह या उस्मान-ओ-अली, की लागत लगभग 10 करोड़ रुपये हो सकती है। अगर 3 बड़े मरकज और 310 छोटे मरकज बनाए जाते हैं, तो कुल लागत लगभग 123 करोड़ रुपये होगी, जिससे हथियार खरीद के लिए एक बड़ी रकम बचेगी।

जैश के हमास और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के साथ संबंध और नेतृत्व की बैठकों को देखते हुए, विशेषज्ञों का मानना है कि इस बची हुई रकम का इस्तेमाल एडवांस हथियारों, जैसे हमास द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले हमले ड्रोन या TTP द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले क्वाडकॉप्टर की खरीद के लिए किया जा सकता है। यह भी ज्ञात है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई जैश को ब्लैक मार्केट से सस्ते हथियार उपलब्ध कराने में मदद करती है। वर्तमान में, जैश के पास मशीन गन, रॉकेट लांचर और मोर्टार जैसे हथियार हैं। इस 391 करोड़ रुपये के अभियान से उसके पास हथियार को बड़ा जखीरा तैयार हो सकता है।

जैश के 313 मरकज बनाने के पीछे दो मुख्य मकसद हैं। पहला, लश्कर-ए-तैय्यबा के विशाल मरकज नेटवर्क की नकल करना, ताकि ट्रेनिंग सेंटरों को अलग-अलग किया जाए और भविष्य में ऑपरेशन सिंदूर जैसे भारतीय हमलों का असर कम हो। दूसरा, मसूद अजहर और उनके परिवार के लिए सुरक्षित और आलीशान ठिकाने बनाना, ताकि उनकी मौजूदगी से इनकार किया जा सके। इस योजना के तहत, 3-4 बड़े मरकज सुरक्षित ठिकानों के रूप में काम करेंगे, मध्यम आकार के केंद्र प्रशिक्षण शिविर होंगे, और बाकी रसद का काम संभालेंगे। यह नेटवर्क जैश को पूरे पाकिस्तान में संचालन करने की अनुमति देगा, जबकि पाकिस्तान सरकार मसूद अजहर की मौजूदगी से इनकार करती रहेगी।

भारतीय खुफिया एजेंसियां इस डिजिटल नेटवर्क पर नजर रख रही हैं। रक्षा विशेषज्ञ और सेवानिवृत्त कर्नल अनिमेष सिंह का कहना है कि अगर यह नेटवर्क बन गया, तो जैश की गतिविधियां और आसान हो जाएंगी, जबकि भारत के लिए चुनौतियां बढ़ जाएंगी।

हरेंद्र चौधरीhttp://harendra@rakshasamachar.com
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवादों, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं। 📍 Location: New Delhi, in 🎯 Area of Expertise: Defence, Diplomacy, National Security
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