📍महू (मध्यप्रदेश) | 26 Aug, 2025, 5:27 PM
Ran Samwad 2025: मध्यप्रदेश के महू में स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित रण संवाद 2025 के उद्घाटन सत्र में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने भारतीय सेनाओं की प्राथमिक जिम्मेदारी और बदलती युद्ध रणनीति पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत की प्रतिक्रिया तेज, निर्णायक और संयुक्त होनी चाहिए क्योंकि युद्ध का स्वरूप बदल रहा है और भविष्य के युद्ध केवल जमीन, समुद्र और आसमान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि साइबर और अंतरिक्ष जैसे डोमेन भी शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि यह सेमिनार शक्ति प्रदर्शन का मंच नहीं बल्कि उद्देश्य की स्पष्टता और साझा समझ विकसित करने का एक प्रयास है। उनके अनुसार, “हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी वॉर और वॉर फाइटिंग की समझ विकसित करना है। कई बार हम कूटनीति, भू-राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अधिक ध्यान देते हैं और मूल विषय यानी युद्ध की तैयारी को नजरअंदाज कर देते हैं। रण संवाद का मकसद इस सोच को बदलना है।”
उन्होंने कहा कि पिछले दो सालों से उनकी कोशिश रही है कि सेनाओं का ध्यान वॉर और वॉर फाइटिंग पर केंद्रित हो। वॉर फाइटिंग केवल सिद्धांतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तकनीक, रणनीति और टैक्टिक्स (युद्ध कौशल) के वास्तविक इस्तेमाल से जुड़ा हुआ है।
Ran Samwad 2025: पहली बार भारतीय मिलिट्री कॉन्क्लेव
जनरल चौहान मध्यप्रदेश के महू स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित ट्राई सर्विसेज रण संवाद 2025 मिलिट्री कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। यह सेमिनार 26–27 अगस्त तक आयोजित हो रहा है और इसे मुख्य रूप से हेडक्वार्टर इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (IDS) और आर्मी वॉर कॉलेज ने मिलकर तैयार किया है।
सीडीएस ने कहा, “जॉइंटमैनशिप अब कोई कल्पना नहीं रही। यह हमारे मौजूदा परिवर्तन की नींव है, जिसमें थिएटराइजेशन, इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक्स और जॉइंट ट्रेनिंग शामिल हैं।” उन्होंने कहा कि यह सेमिनार शक्ति प्रदर्शन का मंच नहीं बल्कि उद्देश्य की स्पष्टता और साझा समझ विकसित करने का एक प्रयास है।
Ran Samwad 2025: तकनीक ने रणनीति और युद्धकला को बदला
रण संवाद का मुख्य विषय है – युद्ध पर तकनीकी प्रगति का प्रभाव। इस दौरान वरिष्ठ सैन्य अफसर हाल में हुए संघर्षों का अध्ययन करेंगे और बताएंगे कि कैसे तकनीक ने रणनीति और युद्धकला को बदला है। चर्चा के प्रमुख बिंदुओं में शामिल हैं – उभरती तकनीकें, आधुनिक युद्ध की चुनौतियां, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल, समुद्री अभियानों में ड्रोन स्वॉर्म, लैंड वॉरफेयर में यूएवी का इस्तेमाल, ट्रेनिंग में टेक्नोलॉजी का इंटीग्रेशन और 2035 तक नई युद्ध संरचनाओं की योजना।
Ran Samwad 2025: इस बार सर्विंग अफसर हैं स्पीकर
जनरल चौहान ने बताया कि पहले ऐसे सेमिनारों में मुख्य वक्ता (स्पीकर) रिटायर्ड अफसर होते थे और दर्शकों में सर्विंग अफसर होते थे। लेकिन उन्होंने इस परंपरा को उलट दिया है। इस बार वर्तमान में सेवा दे रहे अधिकारी ही मुख्य वक्ता हैं, जबकि पूर्व अधिकारी अपने अनुभव साझा करेंगे। उनका मानना है कि नई पीढ़ी तकनीक और आधुनिक युद्ध पद्धतियों के प्रति ज्यादा जागरूक है और उनके विचारों को सुना जाना जजरूरी है।
CDS General Anil Chauhan speaks at Run Samwad – the first Tri-Services Seminar at Army War College, Mhow.
👉 “As a Viksit Bharat, we must also be Shashastra, Suraksit and Aatmanirbhar – not just in technology, but in ideas and practice. Awareness across society is vital on… pic.twitter.com/bDUYqUgoJY— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) August 26, 2025
सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही विचारों और ज्ञान का केंद्र रहा है। उन्होंने कौटिल्य का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे यहां हमेशा से बौद्धिक परंपरा रही है, लेकिन भारतीय युद्धों के गहन विश्लेषण या रणनीति पर शैक्षणिक विमर्श से जुड़ा साहित्य बहुत कम उपलब्ध है। उन्होंने कहा, “युद्ध के विभिन्न आयामों, नेतृत्व, प्रेरणा, मनोबल और तकनीक पर गंभीर शोध की आवश्यकता है। भारत को सशक्त, सुरक्षित, आत्मनिर्भर और विकसित बनाना है। यह तभी संभव है जब सभी हितधारक मिलकर भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार सेनाओं के निर्माण की प्रक्रिया में सामूहिक रूप से भाग लें।”
सीडीएस चौहान ने कहा कि आज युद्ध और शांति के बीच का फर्क धुंधला हो गया है। आधुनिक युग में संकट, संघर्ष और युद्ध एक-दूसरे से जुड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि पहले जीत का पैमाना इलाके पर कब्जा या युद्धबंदियों की संख्या होती थी, लेकिन अब जीत का अर्थ है तेज और प्रभावी कार्रवाई, मानसिक और मनोवैज्ञानिक बढ़त, और तकनीकी श्रेष्ठता।
उनके अनुसार, आज की लड़ाइयां केवल भौतिक नुकसान पर नहीं बल्कि नैरेटिव कंट्रोल पर भी निर्भर करती हैं। यही कारण है कि पारंपरिक हथियार के साथ सूचना युद्ध (information warfare) और साइबर अभियान (cyber ops) उतने ही अहम हो गए हैं।
Ran Samwad 2025: “जो सबसे तेज है वही आगे रहेगा”
सीडीएस चौहान ने कहा कि रण संवाद का उद्देश्य है भविष्य के युद्धों पर चर्चा करना। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में युद्ध का स्वरूप और तकनीकी का इस्तेमाल इतना मुश्किल हो जाएगा कि सेनाओं को हर क्षेत्र में बराबरी से तैयार रहना होगा।
उन्होंने कहा, “हम एक ऐसी दौड़ में हैं जहां जो सबसे तेज है वही आगे रहेगा। लेकिन यह दौड़ केवल रफ्तार की नहीं है, बल्कि नई तकनीकों और नए क्षेत्रों में कूदने की भी है। भारत को इस दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहिए।”
सीडीएस चौहान ने आगे कहा, देश हमेशा शांति के पक्ष में खड़ा रहा है। “हम एक शांति-प्रिय राष्ट्र हैं, लेकिन गलती से हमें निष्क्रियतावादी (Pacifist) न समझा जाए। मेरा मानना है कि ताकत के बिना शांति केवल एक कल्पना है। एक लैटिन कहावत है, जिसका अर्थ है- यदि आप शांति चाहते हैं, तो युद्ध की तैयारी करें।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत ने हमेशा ‘शस्त्र’ और ‘शास्त्र’ को एक साथ जोड़ा है, जो वास्तव में एक ही तलवार की दो धार हैं। शांति के लिए युद्ध लड़ना ही होगा। उन्होंने अंत में कहा कि भारतीय सेनाओं को सौ प्रतिशत तैयारी रखनी होगी क्योंकि भविष्य के युद्ध बहुआयामी होंगे और उनका स्वरूप पहले से कहीं अधिक जटिल होगा।
Ran Samwad 2025: ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबक
सीडीएस ने अपने भाषण में मई 2025 के ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। यह ऑपरेशन पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था। इसमें भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेनाओं ने 9 आतंकी कैंप और 13 पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। इसमें कम से कम 100 आतंकियों के मारे जाने की पुष्टि हुई थी। भारतीय वायुसेना ने कई हवाई अड्डों और सैन्य ठिकानों को टारगेट किया। सेना ने पाक अधिकृत कश्मीर में कई लॉन्चपैड नष्ट किए। सीडीएस ने कहा कि इस ऑपरेशन से भारतीय सेनाओं ने कई सबक लिए हैं और उनमें से अधिकांश को लागू किया जा चुका है।
मिशन सुदर्शन चक्र का जिक्र
अपने संबोधन में सीडीएस चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस पर किए गए मिशन सुदर्शन चक्र के एलान का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह भारत के पास अपना आयरन डोम जैसा एयर डिफेंस सिस्टम, जो दुश्मन के हवाई हमलों से न सिर्फ रक्षा करेगा बल्कि जवाबी कार्रवाई भी करेगा।
उन्होंने कहा कि इसके लिए भारी स्तर पर इंटीग्रेशन की जजरूरत होगी। इसमें जमीन, समुद्र, वायु, अंतरिक्ष और साइबर सभी क्षेत्रों के सेंसर और निगरानी तंत्र को जोड़ा जाएगा। रियल टाइम प्रतिक्रिया के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग का इस्तेमाल करना होगा।
DRDO का सफल परीक्षण
23 अगस्त को DRDO ने ओडिशा तट पर Integrated Air Defence Weapon System (IADWS) का पहला सफल परीक्षण किया था। इस स्वदेशी सिस्टम में QRSAM, VSHORADS और हाई-पावर लेज़र आधारित Directed Energy Weapon शामिल हैं। परीक्षण के दौरान तीन अलग-अलग टारगेट्स—दो हाई-स्पीड UAV और एक मल्टी-कॉप्टर ड्रोन को एक साथ नष्ट किया गया।
CDS चौहान ने कहा कि यह सिस्टम भविष्य के सुदर्शन चक्र का हिस्सा होगा। DRDO प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस सफलता को ऐतिहासिक बताया था।
आकाशतीर सिस्टम की भूमिका
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने अपने स्वदेशी एयर डिफेंस नेटवर्क आकशतीर का इस्तेमाल किया था। इस सिस्टम ने पाकिस्तानी हमलों को रोकने में अहम योगदान दिया। आकसटीर ने तेजी से दुश्मन के मिसाइल और ड्रोन का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय किया। इसे भारतीय वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) से जोड़ा गया था।
गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, चार दिन तक चले ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया था कि भारत की नई एयर डिफेंस क्षमता कितनी मजबूत हो चुकी है।