📍नई दिल्ली | 22 Aug, 2025, 8:08 PM
AMCA jet engine: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने घोषणा की है कि भारत और फ्रांस मिलकर देश के पहले स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के लिए स्वदेशी जेट इंजन तैयार करेंगे और उसका निर्माण भी भारत में ही करेंगे। यह साझेदारी फ्रांस की एयरोस्पेस कंपनी सफरान (Safran) के साथ होगी। उन्होंने कहा कि भारत अब विमान इंजन के निर्माण में भी आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ रहा है।
रक्षा मंत्री ने नई दिल्ली में आयोजित ईटी वर्ल्ड लीडर्स फोरम को संबोधित करते हुए कहा, “हमने अपने लड़ाकू विमान के इंजन को भारत में ही बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। हम फ्रांस की कंपनी सफरान के साथ मिलकर जल्द ही इंजन निर्माण का काम शुरू करने जा रहे हैं।” इस परियोजना को भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत बनाने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।
AMCA jet engine: फ्रांस के साथ तकनीकी सहयोग
सफरान दुनियाभर में एडवांस जेट इंजनों की मैन्युफैक्चरिंग के लिए जानी जाती है। कंपनी राफेल लड़ाकू विमान के लिए M88 इंजन बना चुकी है, जिसका इस्तेमाल भारतीय वायुसेना भी कर रही है। भारत और फ्रांस के बीच यह नया सहयोग इंजन टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, जॉइंट रिसर्च और देश में निर्माण को शामिल करेगा। हालांकि AMCA के लिए तैयार किया जा रहा इंजन अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित होगा, जिसमें स्टील्थ क्षमता, सुपरसोनिक क्रूज और हाई मोबिलिटी जैसी खूबियां होंगी। हालांकि इंजन के टेक्निकल स्पेसिफिकेशंस को सार्वजनिक नहीं किया गया है।
अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सभ्यता वैश्विक व्यवस्था को प्रभुत्व की होड़ के रूप में नहीं, बल्कि सम्मान और समानता पर आधारित साझा यात्रा के रूप में देखती है। उन्होंने कहा कि भारत की ताकत केवल शक्ति प्रदर्शन में नहीं, बल्कि देखभाल और सहयोग की क्षमता में निहित है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की रक्षा नीति संकीर्ण हितों पर आधारित नहीं है, बल्कि वैश्विक कल्याण की भावना पर आधारित है।
AMCA jet engine: सफरान ने भारत में बनाई एमआरओ सुविधा
सफरान पहले से ही भारत में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुकी है। कंपनी ने हैदराबाद में एक मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधा स्थापित की है, जो भारतीय और विदेशी एयरलाइंस के लिए LEAP-1A और LEAP-1B इंजनों का रखरखाव करती है। इसके अलावा, सफरान और एचएएल ने बेंगलुरु में एक संयुक्त उद्यम के तहत हेलीकॉप्टर और लड़ाकू विमानों के लिए इंजन पार्ट्स का निर्माण शुरू किया है।
🚨 Parliamentary Defence Panel visits HAL Bengaluru 🚨
The Parliamentary Standing Committee on Defence, led by Chairman Radha Mohan Singh, visited HAL facilities in Bengaluru today.
👨✈️ The 10-member panel was welcomed by HAL CMD Dr. D.K. Sunil and senior officials.
✈️ HAL… pic.twitter.com/oF5QFCaE8B— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) August 22, 2025
AMCA jet engine: पाकिस्तान को दिया करारा जवाब
रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख के हालिया बयान पर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, जिसमें मुनीर ने भारत की अर्थव्यवस्था की तुलना स्पोर्ट्स कार और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की तुलना ट्रक से की थी। उन्होंने कहा कि यह केवल मजाक नहीं बल्कि स्वीकारोक्ति है कि भारत ने सही नीतियों और दृष्टिकोण से प्रगति की है जबकि पाकिस्तान अपनी असफलताओं में फंसा रहा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की समृद्धि के साथ-साथ उसकी रक्षा क्षमता और राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा करने की प्रतिबद्धता भी उतनी ही मजबूत है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने पहले ही भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति को दिखा दिया है और पाकिस्तान के मन में भारत की ताकत को लेकर कोई गलतफहमी पनपने नहीं दी जाएगी।
AMCA jet engine: रक्षा उत्पादन और निर्यात में बड़ी छलांग
राजनाथ सिंह ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत के रक्षा निर्यात में 35 गुना वृद्धि हुई है। वर्ष 2013-14 में जहां यह मात्र 686 करोड़ रुपये था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 23,622 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। आज भारत लगभग 100 देशों को डिफेंस इक्विपमेंट्स निर्यात कर रहा है।
सरकार ने 2025 में रक्षा निर्यात का लक्ष्य 30,000 करोड़ रुपये और 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये तय किया है। इसके साथ ही रक्षा उत्पादन भी 2014 के 40,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 1.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है और वर्तमान वित्तीय वर्ष में यह लगभग 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है।
AMCA jet engine: आत्मनिर्भरता के लिए नई सूची
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने अब तक 509 प्लेटफॉर्म, सिस्टम और हथियारों को शामिल करते हुए पांच सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची जारी की हैं। इन सभी का निर्माण अब भारत में ही किया जाएगा। इसके अलावा रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs) ने 5,000 से अधिक महत्वपूर्ण उपकरणों और कलपुर्जों की अपनी स्वदेशीकरण सूची भी जारी की है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने रक्षा पूंजीगत खरीद बजट का 75% भारतीय कंपनियों के लिए रिजर्व कर दिया है।
तेजस के मिल रहे लगातार ऑर्डर
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि कंपनी को हाल ही में 97 तेजस लड़ाकू विमानों के लिए 66,000 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। इसके अलावा पहले से ही 83 तेजस विमानों का 48,000 करोड़ रुपये का ऑर्डर दिया गया था। उन्होंने कहा कि तेजस भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं का शानदार उदाहरण है।
बन रहे डिफेंस कॉरिडोर
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में यह भी बताया कि भारत ने रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में बन रहे डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर्स का जिक्र किया, जो निवेश को आकर्षित कर रहे हैं और रक्षा क्षेत्र के लिए विकास का इंजन बन रहे हैं। इसके अलावा, सरकार ने रक्षा क्षेत्र में FDI सीमा 74% (ऑटोमैटिक रूट) और 100% (गवर्नमेंट रूट) तक बढ़ा दी है और DRDO की तकनीक ट्रांसफर भी मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने बताया कि स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप मॉडल के जरिए निजी कंपनियों को लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, टैंक और पनडुब्बी बनाने का मौका दिया जा रहा है। स्टार्टअप्स और एमएसएमई को प्रोत्साहित करने के लिए iDEX (Innovations for Defence Excellence) जैसी योजनाओं की शुरुआत की गई है।
रक्षा बजट में बड़ा इजाफा
रक्षा मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का रक्षा बजट 2013-14 के 2.53 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में लगभग 6.22 लाख करोड़ रुपये हो गया है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद इसमें और बढ़ोतरी की गई है ताकि सेना को और आधुनिक बनाया जा सके।
विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश का न्योता
राजनाथ सिंह ने कहा कि आज दुनिया की बड़ी रक्षा कंपनियों के पास भारत में निवेश करने और यहां रक्षा उपकरण बनाने का बेहतरीन अवसर है। उन्होंने एयरबस और टाटा एयरोस्पेस के सहयोग से बन रहे C295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि भारत का “हमारा मेक इन इंडिया केवल भारत तक सीमित नहीं है। जब आप भारत में बनाएंगे, तो आप पूरी दुनिया के लिए बनाएंगे।
भारत की तीन बड़ी ताकतें
रक्षा मंत्री ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि भारत आने वाले समय में वैश्विक व्यवस्था के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाएगा। इसके पीछे उन्होंने तीन कारण गिनाए- भारत की सभ्यतागत मूल्य, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और युवा जनसंख्या।
उन्होंने बताया कि भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और तीसरे स्थान की ओर बढ़ रहा है। पिछले दशक में भारत का निर्यात 76% बढ़ा है और घरेलू मांग वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूत बनी हुई है।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत की 65% से अधिक आबादी 35 साल से कम उम्र की है और देश में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है, जिसमें 100 से अधिक यूनिकॉर्न शामिल हैं।